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खुशखबरीः कृषि स्नातक को दुकान के लिए मिलेगा लोन
टीम डिजिटल/अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 03 Sep 2016 11:06 PM IST
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सर्किट हाउस में बैठक को संबोधित करते मुख्य सचिव कृषि
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एग्रीकल्चर (कृषि) से ग्रेजुएट पास करने वाले युवाओं को रोजगार के लिए सरकार ने अच्छा अवसर दिया है। सरकार ने दुकान खोलने के लिए लोन देने की बात कही है। एग्री जंक्शन नाम की इस दुकान में खाद-बीज, कीटनाशक बेचे जाएंगे। इसके लिए कृषि विभाग में आवेदन करना होगा। इसकी कोई अंतिम तिथि नहीं है। यह जानकारी प्रमुख सचिव कृषि व मंडी परिषद रजनीश गुप्ता ने दी। वे शनिवार को हाउस में कृषि व मंडी परिषद की समीक्षा कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि लोन व दुकान खोलने के लिए अभी तक जो आवेदन आए हैं, वे 15 सितंबर तक शासन के पास भेज दिए जाएंगे। इसके अलावा भूमि संरक्षण का बजट न खर्च करने पर फर्रुखाबाद के भूमि संरक्षण अधिकारी और विभाग के मंडलीय अधिकारी को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। उन्होंने बताया कि कन्नौज को छोड़कर मंडल के सभी जिलों में फसल बीमा का क्लेम किसानों के खातों में भेजा जा चुका है। कन्नौज के लिए भी 16 करोड़ रुपये जारी किए जा रहे हैं।
मिट्टी परीक्षण को बढ़ाई जाएंगी लैब
प्रमुख सचिव ने कहा कि भारत सरकार ने मिट्टी के माइक्रो न्यूट्रिएंट्स (सूक्ष्म पोषक तत्व) की पूरी जानकारी किसानों को देने के निर्देश दिए हैं। अभी प्रदेश में 35 ऐसी लैब हैं। 35 और लैब खोलने पर विचार चल रहा है। बताया कि रिपोर्ट देने के लिए भारत सरकार ने तीन साल का समय दिया था, अब इसे घटाकर दो साल कर दिया गया है। ऐसे में जिन जिलों में मृदा परीक्षण की सुविधा नहीं है, वहां के कर्मचारियों को दूसरे जिलों में अटैच कर काम लिया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि लोन व दुकान खोलने के लिए अभी तक जो आवेदन आए हैं, वे 15 सितंबर तक शासन के पास भेज दिए जाएंगे। इसके अलावा भूमि संरक्षण का बजट न खर्च करने पर फर्रुखाबाद के भूमि संरक्षण अधिकारी और विभाग के मंडलीय अधिकारी को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। उन्होंने बताया कि कन्नौज को छोड़कर मंडल के सभी जिलों में फसल बीमा का क्लेम किसानों के खातों में भेजा जा चुका है। कन्नौज के लिए भी 16 करोड़ रुपये जारी किए जा रहे हैं।
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मिट्टी परीक्षण को बढ़ाई जाएंगी लैब
प्रमुख सचिव ने कहा कि भारत सरकार ने मिट्टी के माइक्रो न्यूट्रिएंट्स (सूक्ष्म पोषक तत्व) की पूरी जानकारी किसानों को देने के निर्देश दिए हैं। अभी प्रदेश में 35 ऐसी लैब हैं। 35 और लैब खोलने पर विचार चल रहा है। बताया कि रिपोर्ट देने के लिए भारत सरकार ने तीन साल का समय दिया था, अब इसे घटाकर दो साल कर दिया गया है। ऐसे में जिन जिलों में मृदा परीक्षण की सुविधा नहीं है, वहां के कर्मचारियों को दूसरे जिलों में अटैच कर काम लिया जा रहा है।
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