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कर्नल मामलाः यूपी के युवाओं को देता था रानीखेत-नैनीताल में नौकरी के फर्जी कॉल लेटर
Wed, 22 May 2019 10:37 PM IST
प्रशांत कुमार
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Wed, 22 May 2019 10:37 PM IST
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फर्जी कर्नल (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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सेना में नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी करने वाला फर्जी कर्नल सूर्य प्रताप सिंह उर्फ मनोज सिंह सेंगर उत्तराखंड के युवाओं को लखनऊ, आगरा और मेरठ में नौकरी के कॉल लेटर देता था, जबकि यहां के युवाओं को रानीखेत, नैनीताल और अल्मोड़ा के कॉल लेटर देता था। रेल बाजार और नैनीताल के होटल में फर्जी कर्नल द्वारा लिए गए कमरों से पुलिस को मिले दस्तावेजों की जांच में यह खुलासा हुआ।
कानपुर रेल बाजार इंस्पेक्टर दधिबल तिवारी ने बताया कि इन सभी लेटर पर रिक्रुटिंग अथॉरिटी ऑफ लखनऊ की फर्जी मुहर लगी है। कथित रिटायर कैप्टन कमलेश चंद्र अग्निहोत्री के दस्तखत व मुहर भी है। पुलिस का कहना है कि यूपी के लोगों को उत्तराखंड और वहां के लोगों को यूपी के शहरों का नियुक्ति पत्र इसलिए देता था ताकि जल्दी पकड़ा न जा सके। रेलबाजार पुलिस मामले की छानबीन के लिए दो दिन बाद नैनीताल जाएगी।
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कानपुर रेल बाजार इंस्पेक्टर दधिबल तिवारी ने बताया कि इन सभी लेटर पर रिक्रुटिंग अथॉरिटी ऑफ लखनऊ की फर्जी मुहर लगी है। कथित रिटायर कैप्टन कमलेश चंद्र अग्निहोत्री के दस्तखत व मुहर भी है। पुलिस का कहना है कि यूपी के लोगों को उत्तराखंड और वहां के लोगों को यूपी के शहरों का नियुक्ति पत्र इसलिए देता था ताकि जल्दी पकड़ा न जा सके। रेलबाजार पुलिस मामले की छानबीन के लिए दो दिन बाद नैनीताल जाएगी।
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ठगी की हर डील में एक महिला शामिल रहती थी
ठगी की हर डील में एक महिला शामिल रहती थी। आरोपी उसको सेना में जेसीओ बताकर सभी से मिलवाता था। पीड़ितों के मुताबिक इन सभी ने जब भी पैसा दिया, सूर्य प्रताप पूरा पैसा प्रीति को ही देता था। तहरीर में भी महिला का जिक्र किया गया था, इसके बाद भी उसे आरोपी नहीं बनाया गया। अब केवल पूछताछ कर उसे छोड़ दिया गया।
ऐसी पहुंची पुलिस
मूल रूप से औरैया बेला का रहने वाला फर्जी कर्नल पिछले एक महीने से नैनीताल में दिल्ली के एक टैक्सी ड्राइवर के साथ घूम रहा था। उसी की कार से हर जगह डील करने जाता था। इस बीच पुलिस को ड्राइवर नंबर मिल गया था। जिसे पुलिस ने सर्विलांस पर लगाया था। फर्जी कर्नल ने ड्राइवर के नंबर से एक युवक से नौकरी लगवाने की बात की। इस नंबर को ट्रेस कर पुलिस पहले युवक तक पहुंची और फिर आरोपी फर्जी कर्नल तक।
ऐसी पहुंची पुलिस
मूल रूप से औरैया बेला का रहने वाला फर्जी कर्नल पिछले एक महीने से नैनीताल में दिल्ली के एक टैक्सी ड्राइवर के साथ घूम रहा था। उसी की कार से हर जगह डील करने जाता था। इस बीच पुलिस को ड्राइवर नंबर मिल गया था। जिसे पुलिस ने सर्विलांस पर लगाया था। फर्जी कर्नल ने ड्राइवर के नंबर से एक युवक से नौकरी लगवाने की बात की। इस नंबर को ट्रेस कर पुलिस पहले युवक तक पहुंची और फिर आरोपी फर्जी कर्नल तक।