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आईआईटी की पूर्व छात्रा को शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार, अणुओं के संश्लेषण के लिए तैयार की नई कार्यप्रणाली
Mon, 28 Sep 2020 10:16 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 28 Sep 2020 10:16 PM IST
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आईआईटी की पूर्व छात्रा ज्योतिर्मय दास
- फोटो : अमर उजाला
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केमिकल साइंस के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान देने वाली आईआईटी की पूर्व छात्रा ज्योतिर्मय दास को शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार दिया जाएगा। ज्योतिर्मय ने आईआईटी से पीएचडी की है। बता दें कि आईआईटी की एक और पूर्व छात्रा और फैकल्टी प्रो. बुशरा अतीक को भी यह पुरस्कार दिया जाएगा।
विभिन्न क्षेत्रों में इनोवेशन करने वालों को काउंसिल एंड साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च की ओर से यह पुरस्कार दिया जाता है। मूल रूप से उड़ीसा की रहने वाली ज्योतिर्मय ने विभिन्न अणुओं के संश्लेषण के लिए नई कार्यप्रणाली तैयार की है।
दवाओं के मॉलिक्यूल्स और केमिकल कॉम्बिनेशंस पर काम किया है, जिसका उपयोग नई दवाओं की खोज के लिए कर सकते हैं। वर्तमान समय में वह इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साइंस में प्रोफेसर हैं।
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इससे पहले 2009 में उनकी नियुक्ति कोलकाता के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हुई थी। यहां वह तीन साल रही थीं। यह पुरस्कार कब दिया जाएगा, इसकी तिथि अभी घोषित नहीं की गई है।
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विभिन्न क्षेत्रों में इनोवेशन करने वालों को काउंसिल एंड साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च की ओर से यह पुरस्कार दिया जाता है। मूल रूप से उड़ीसा की रहने वाली ज्योतिर्मय ने विभिन्न अणुओं के संश्लेषण के लिए नई कार्यप्रणाली तैयार की है।
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दवाओं के मॉलिक्यूल्स और केमिकल कॉम्बिनेशंस पर काम किया है, जिसका उपयोग नई दवाओं की खोज के लिए कर सकते हैं। वर्तमान समय में वह इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साइंस में प्रोफेसर हैं।
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इससे पहले 2009 में उनकी नियुक्ति कोलकाता के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हुई थी। यहां वह तीन साल रही थीं। यह पुरस्कार कब दिया जाएगा, इसकी तिथि अभी घोषित नहीं की गई है।