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कानपुर: खुफिया विभाग की निगरानी में शमसुद्दीन, एलआईयू ने जानी पाकिस्तान की दास्तां
Wed, 18 Nov 2020 12:46 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 18 Nov 2020 12:46 AM IST
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पाकिस्तान से आए शमसुद्दीन
- फोटो : अमर उजाला
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पाकिस्तान से 28 साल बाद घर लौटे शमसुद्दीन खुफिया की निगरानी में हैं। उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। खासकर वो किससे मिल रहे हैं और कहां जा रहे हैं। हालांकि उनके आने-जाने पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं है।
यह सब एहतियातन किया जा रहा है। इधर मंगलवार को एलआईयू की टीम शमसुद्दीन के घर पहुंची और पाकिस्तान की पूरी दास्तां जानी। शमसुद्दीन 28 साल तक पाकिस्तान में रहे। आठ साल सलाखों के पीछे रहे।
जब साबित हो गया कि वे जासूस नहीं हैं, तब उन्हें भारत भेजा गया। रविवार को शमसुद्दीन कंघी मोहाल स्थित अपने घर पहुंचे। एसपी पश्चिम डॉ. अनिल कुमार ने शमसुद्दीन की वापसी करवाकर परिजनों से मिलवाया। हालांकि शमसुद्दीन अभी पूरी तरह से आजाद नहीं हुए हैं।
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दरअसल, पहले पाकिस्तान में उन पर जासूसी का आरोप था और अब भारत आने पर उनकी निगरानी की जा रही है। मंगलवार को एलआईयू की एक टीम उनके घर पहुंची। शमसुद्दीन ने उनको बताया कि पाकिस्तान में वो जाकर बस गए थे।
फर्जी कागजात बनवाकर उसी पर पासपोर्ट बनवाया था। जब वो पासपोर्ट का नवीनीकरण कराने पहुंचे थे तो पकड़ लिए गए। इसके बाद वे जेल भेज दिए गए। एलआईयू ने पूछताछ के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर ली है। रिपोर्ट शासन को और विदेश मंत्रालय भेजी जाएगी।
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यह सब एहतियातन किया जा रहा है। इधर मंगलवार को एलआईयू की टीम शमसुद्दीन के घर पहुंची और पाकिस्तान की पूरी दास्तां जानी। शमसुद्दीन 28 साल तक पाकिस्तान में रहे। आठ साल सलाखों के पीछे रहे।
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जब साबित हो गया कि वे जासूस नहीं हैं, तब उन्हें भारत भेजा गया। रविवार को शमसुद्दीन कंघी मोहाल स्थित अपने घर पहुंचे। एसपी पश्चिम डॉ. अनिल कुमार ने शमसुद्दीन की वापसी करवाकर परिजनों से मिलवाया। हालांकि शमसुद्दीन अभी पूरी तरह से आजाद नहीं हुए हैं।
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दरअसल, पहले पाकिस्तान में उन पर जासूसी का आरोप था और अब भारत आने पर उनकी निगरानी की जा रही है। मंगलवार को एलआईयू की एक टीम उनके घर पहुंची। शमसुद्दीन ने उनको बताया कि पाकिस्तान में वो जाकर बस गए थे।
फर्जी कागजात बनवाकर उसी पर पासपोर्ट बनवाया था। जब वो पासपोर्ट का नवीनीकरण कराने पहुंचे थे तो पकड़ लिए गए। इसके बाद वे जेल भेज दिए गए। एलआईयू ने पूछताछ के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर ली है। रिपोर्ट शासन को और विदेश मंत्रालय भेजी जाएगी।