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Kanpur News: मुश्किलों भरी डगर में छुआ सफलता का शिखर

Fri, 31 Jul 2026 02:08 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jul 2026 02:08 AM IST
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Scaled the pinnacle of success on a challenging path.
कानपुर। कड़ी मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर जिंदगी की मुश्किलों को दर किनार कर सफलता के शिखर का छू लिया। हम बात कर रहे हैं कोलकाता के रोहन मुखर्जी की, जिन्होंने एमएससी-पीएचडी इंटीग्रेटेड कोर्स में दाखिला लिया है। वह सस्टेनेबल एनर्जी इंजीनियरिंग प्रोग्राम में पीएचडी करेंगे। उन्हें ‘रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा’ नामक एक दुर्लभ नेत्र रोग, जिसमें 80 प्रतिशत दृष्टि बाधित रहती है। वह अपना सफर मोटे चश्में और छड़ी के सहारे पूरा करते हैं।
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रोहन ने जादवपुर यूनिवर्सिटी से भौतिकी ऑनर्स किया है। रोहन ‘रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा’ नामक एक दुर्लभ नेत्र रोग से पीड़ित हैं, जिसमें धीरे-धीरे दृष्टि कम होती जाती है। कुछ महीने पहले हैदराबाद स्थित एलवी प्रसाद आई इंस्टीट्यूट में जांच के दौरान पता चला कि वह अपनी लगभग 80 फीसदी दृष्टि खो चुके हैं।
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रोहन के कहते हैं शुरुआत में पढ़ने और वस्तुएं ढूंढने में दिक्क्त होती थी। पहले इसे नजरों की सामान्य कमजोरी समझा गया, लेकिन बाद में असली बीमारी का पता चला। शुरुआती स्कूली शिक्षा के दौरान उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। एक समय ऐसा भी आया जब शिक्षकों द्वारा समझ की कमी के कारण उन्हें कक्षा से अलग बैठाया जाता था, जिससे उनका पढ़ाई के प्रति मनोबल कमजोर होने लगा। धीरे धीरे सीनियर कक्षाओं के स्कूल ने उनका सहयोग दिया।
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रोहन ने अपनी मेहनत के दम पर माध्यमिक परीक्षा में 92.3फीसदी और उच्च माध्यमिक में 84 फीसदी अंक हासिल किए। पढ़ाई के दौरान वे लैपटॉप और टेक्नोलॉजी का सहारा लेते रहे, जिसमें टेक्स्ट-टू-स्पीच जैसे फीचर्स ने उनकी काफी मदद की। आईआईटी कानपुर में प्रवेश पाने के लिए उन्होंने फरवरी में आयोजित जॉइंट एडमिशन टेस्ट फॉर मास्टर्स (जैम) भी सफलतापूर्वक पास किया। रोहन कहते हैं कि चुनौतियां तो काफी हैं, बिना छड़ी की मदद से नहीं चल सकते हैं। उनके पिता रंजन मुखर्जी साफ्टवेयर इंजीनियर और मां नंदिता मुखर्जी बंगाली थियेटर आर्टिस्ट हैं। कहते हैं कि वह दोनों मुझे आईआईटी छोड़ने आए। यहां मेरे रूममेट्स मेरा अच्छे से ध्यान रखते हैं। रोजमर्रा के कार्यों को धीरे-धीरे सही लेकिन वह स्वयं करते हैं।
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