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कानपुर: 27 करोड़ रुपये के बोगस आईटीसी रैकेट का भंडाफोड़, तीन करोड़ पांच लाख रुपये जमा कराए
Sat, 31 Oct 2026 10:35 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Sat, 31 Oct 2026 10:35 PM IST
सार
मास्टरमाइंड तक पहुंची टीम। एक करोड़ 52 लाख की आईटीसी ब्लाॅक की गई। कई सीए के जरिये गोलमाल किया जा रहा था।
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जांच करती टीम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) की विशेष अनुसंधान शाखा ने बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। रैकेट में 27 करोड़ रुपये से अधिक की बोगस आईटीसी विभिन्न फर्मों को पासऑन की गई है। ये फर्में दिल्ली और चेन्नई में संचालित बताई जा रहीं थी। तीन करोड़ पांच लाख रुपये जमा कराए गए। एक करोड़ 52 लाख की आईटीसी ब्लाॅक कर दी गई है। मामले में कई सीए के नाम भी सामने आए हैं। जांच में पता चला कि खुद ही रद्द पंजीकरण वाली फर्मों के जरिये आईटीसी में गड़बड़ी की जा रही थी।
अपर आयुक्त कुमार आनंद और संयुक्त आयुक्त सुशील कुमार गौतम के निर्देशन में उपायुक्त संतोष कुमार सिंह, सहायक आयुक्त सुभाष चंद्र और राज्य कर अधिकारी रमेश कुमार तिवारी की टीम ने जाजमऊ स्थित फर्म फराज एक्सपोर्ट के प्रतिष्ठान पर छापा मारा। वहां न तो कोई दस्तावेज मिला और न ही कोई स्टॉक। परिसर आशिफ इकबाल, नासिर इकबाल और राशिद इकबाल के नाम दर्ज था। आशिफ इकबाल के पुत्र मोहम्मद अमान ने बताया कि इस फर्म द्वारा वर्ष 2017 के बाद से इस परिसर से कोई काम नहीं किया गया।
फर्म के पंजीयन में प्रयुक्त सहमति पत्र भी फर्जी और बोगस पाया गया। इससे साफ हुआ कि फर्म फराज एक्सपोर्ट के मालिक मो. फराज वास्तविक व्यापार न करते हुए सिर्फ बोगस आईटीसी का रैकेट चला रहे थे। फर्म ने वित्त वर्ष 2024-25 में 29.34 लाख रुपये और 2025-26 में 29.53 लाख रुपये का रिफंड प्राप्त किया था। फर्म स्वामी के मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया तो पता चला कि वो उमरा करने गए हैं।
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अपर आयुक्त कुमार आनंद और संयुक्त आयुक्त सुशील कुमार गौतम के निर्देशन में उपायुक्त संतोष कुमार सिंह, सहायक आयुक्त सुभाष चंद्र और राज्य कर अधिकारी रमेश कुमार तिवारी की टीम ने जाजमऊ स्थित फर्म फराज एक्सपोर्ट के प्रतिष्ठान पर छापा मारा। वहां न तो कोई दस्तावेज मिला और न ही कोई स्टॉक। परिसर आशिफ इकबाल, नासिर इकबाल और राशिद इकबाल के नाम दर्ज था। आशिफ इकबाल के पुत्र मोहम्मद अमान ने बताया कि इस फर्म द्वारा वर्ष 2017 के बाद से इस परिसर से कोई काम नहीं किया गया।
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फर्म के पंजीयन में प्रयुक्त सहमति पत्र भी फर्जी और बोगस पाया गया। इससे साफ हुआ कि फर्म फराज एक्सपोर्ट के मालिक मो. फराज वास्तविक व्यापार न करते हुए सिर्फ बोगस आईटीसी का रैकेट चला रहे थे। फर्म ने वित्त वर्ष 2024-25 में 29.34 लाख रुपये और 2025-26 में 29.53 लाख रुपये का रिफंड प्राप्त किया था। फर्म स्वामी के मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया तो पता चला कि वो उमरा करने गए हैं।
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दिल्ली-चेन्नई स्थित फर्जी फर्मों का बड़ा नेटवर्क
जांच में पता चला कि मेसर्स ओवरसीज लेदर ने 77.24 लाख, ओवरसीज इंटरप्राइजेज ने तीन करोड़ 19 लाख, मेसर्स मेरिट एक्जिम ने एक करोड़ 24 लाख, मेसर्स पीस लेदर ने 84 लाख, मेसर्स अपोलो एक्जिम ने 52 लाख की बोगस आईटीसी रद्द फर्मों के जरिये लिया। वहीं, मेसर्स एसएच ने एक करोड़ 24 लाख, मेसर्स सैडल हैवन ने 77 लाख, मेसर्स फराज एक्सपोर्ट ने एक करोड़ 25 लाख, मेसर्स हॉक इंटरनेशनल ने दो करोड़ 36 लाख की बोगस आईटीसी का इस्तेमाल रद्द फर्मों के जरिये लिया और अपनी करदेयता में समायोजित कर लिया। इन फर्मों ने रद्द हो चुकी फर्मों से कुल 12 करोड़ 18 लाख 24 हजार रुपये की बोगस आईटीसी ली थी। इन फर्मों (मेसर्स सीएस इंटरप्राइजेज, आलम इंटरप्राइजेज, ओवैस एक्जिम, विकास इंटरप्राइजेज, न्यू ऐरा क्रिएशन, जीएस साल्यूशन, एसए ट्रेडर, एसके ट्रेडर, आयुष, गौतम इंटररप्राइजेज, अल्पाइन, एएन ट्रेनर्स, गुडविल टेनरी, पीएस इंटरप्राइजेज, बाला जी इंटरप्राइजेज, आईटीआई इंटरप्राइजेज, केएम एग्रोफूड, स्वान टैनिंग इंटरप्राइजेज, अदीना इण्टरप्राइजेज, ओरियन इंटरप्राइजेज, अकीजा इंटरप्राइजेज) ने प्रदेश से बाहर चेन्नई और दिल्ली की 10 रद्द फर्मों के जरिये आईटीसी पासऑन की। इसमें मुख्यता रद्द फर्म जेड आई एक्सिम, रक्शी इंटरप्राइजेज, आइकिज एक्जिम, अदीना इंटरप्राइजेज से कुल 27 करोड़ की बोगस आईटीसी विभिन्न फर्मों को पासऑन की गई है। सभी फर्में पंजीयन तिथि से खुद ही रद्द घोषित हैं। अपर आयुक्त और संयुक्त आयुक्त ने बताया कि विशेष अनुसंधान शाखा रेंज डी की ओर से पिछले कई महीनों से बोगस आईटीसी के लेनदेन के खेल में शामिल फर्मों की जांच डाटा विश्लेषण के जरिये की जा रही थी। जब छापा मारा गया तो पूरे रैकेट का भंडाफोड़ हुआ। कुछ सीए के नाम भी सामने आ रहे हैं। इनके खिलाफ सीए संस्थान में जांच के बाद शिकायत की जाएगी।
जांच में पता चला कि मेसर्स ओवरसीज लेदर ने 77.24 लाख, ओवरसीज इंटरप्राइजेज ने तीन करोड़ 19 लाख, मेसर्स मेरिट एक्जिम ने एक करोड़ 24 लाख, मेसर्स पीस लेदर ने 84 लाख, मेसर्स अपोलो एक्जिम ने 52 लाख की बोगस आईटीसी रद्द फर्मों के जरिये लिया। वहीं, मेसर्स एसएच ने एक करोड़ 24 लाख, मेसर्स सैडल हैवन ने 77 लाख, मेसर्स फराज एक्सपोर्ट ने एक करोड़ 25 लाख, मेसर्स हॉक इंटरनेशनल ने दो करोड़ 36 लाख की बोगस आईटीसी का इस्तेमाल रद्द फर्मों के जरिये लिया और अपनी करदेयता में समायोजित कर लिया। इन फर्मों ने रद्द हो चुकी फर्मों से कुल 12 करोड़ 18 लाख 24 हजार रुपये की बोगस आईटीसी ली थी। इन फर्मों (मेसर्स सीएस इंटरप्राइजेज, आलम इंटरप्राइजेज, ओवैस एक्जिम, विकास इंटरप्राइजेज, न्यू ऐरा क्रिएशन, जीएस साल्यूशन, एसए ट्रेडर, एसके ट्रेडर, आयुष, गौतम इंटररप्राइजेज, अल्पाइन, एएन ट्रेनर्स, गुडविल टेनरी, पीएस इंटरप्राइजेज, बाला जी इंटरप्राइजेज, आईटीआई इंटरप्राइजेज, केएम एग्रोफूड, स्वान टैनिंग इंटरप्राइजेज, अदीना इण्टरप्राइजेज, ओरियन इंटरप्राइजेज, अकीजा इंटरप्राइजेज) ने प्रदेश से बाहर चेन्नई और दिल्ली की 10 रद्द फर्मों के जरिये आईटीसी पासऑन की। इसमें मुख्यता रद्द फर्म जेड आई एक्सिम, रक्शी इंटरप्राइजेज, आइकिज एक्जिम, अदीना इंटरप्राइजेज से कुल 27 करोड़ की बोगस आईटीसी विभिन्न फर्मों को पासऑन की गई है। सभी फर्में पंजीयन तिथि से खुद ही रद्द घोषित हैं। अपर आयुक्त और संयुक्त आयुक्त ने बताया कि विशेष अनुसंधान शाखा रेंज डी की ओर से पिछले कई महीनों से बोगस आईटीसी के लेनदेन के खेल में शामिल फर्मों की जांच डाटा विश्लेषण के जरिये की जा रही थी। जब छापा मारा गया तो पूरे रैकेट का भंडाफोड़ हुआ। कुछ सीए के नाम भी सामने आ रहे हैं। इनके खिलाफ सीए संस्थान में जांच के बाद शिकायत की जाएगी।