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Kanpur News: खेतों में भरा नदी का पानी, किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें
Sun, 04 Oct 2026 12:28 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sun, 04 Oct 2026 12:28 AM IST
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रसूलाबाद। पांडु नदी का जलस्तर बेहद धीमी गति से उतर रहा है। हालात ये हैं कि करीब 15 गांवों में करीब 1500 बीघा खेत जलमग्न हैं। फसलें बर्बाद होने की कगार पर हैं तो किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभरी हैं।
पांडु नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद एक सप्ताह हो चुके हैं। बेहद धीमी गति से पानी उतर रहा है। इधर कुर्सी खेड़ा, कृष्ण दत्त निवादा, रामनगर, दलिकपुर महाराजपुर, खरकपुर, सुक्खा निवादा, भग्गा निवादा व तोरना समेत 15 गांवों में फसलें जलमग्न हैं। कई रास्तों पर अभी पानी भरा है। नदी जल लगभग स्थिर होने के कारण किसानों की चिंताएं बढ़ गई है। मुन्ना सविता ने बताया कि धान की 15 बीघा फसल बर्बाद हो गई। नवदा एनी निवासी सुधीर तिवारी ने कहा कि जलभराव के चलते धान की 15 बीघा फसल खराब हो गई।
महेश तिवारी ने बताया कि धान की करीब 10 बीघा और नरेंद्र दुबे ने बताया कि उनकी धान की करीब 10 बीघा फसल नष्ट होने की कगार पर है। दिलीप त्रिवेदी ने बताया कि 12 बीघा धान की फसल जलमग्न है। भीतरगांव निवासी सुरेंद्र मिश्रा ने बताया कि करीब 20 बीघा धान, रामकुमार मिश्रा ने बताया कि 20 बीघा धान और छुन्ना दुबे ने बताया कि छह बीघा धान की फसल सड़ने की कगार पर है।
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इसी प्रकार भीतरगांव निवासी रामलखन दुबे ने बताया कि धान की छह बीघा और प्रदीप अवस्थी ने बताया कि धान की 10 बीघा फसल जलमग्न होने से बर्बाद होने की कगार पर है। खेत जलमग्न होने से मवेशियों के लिए चारे का संकट बना है। पड़ोसी किसानों से भूसा उधार लेकर जानवरों को खिलाया जा रहा है। एसडीएम अभिषेक कुमार ने बताया कि फसल नुकसान के सर्वे के अनुसार प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता दी जाएगी।
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पांडु नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद एक सप्ताह हो चुके हैं। बेहद धीमी गति से पानी उतर रहा है। इधर कुर्सी खेड़ा, कृष्ण दत्त निवादा, रामनगर, दलिकपुर महाराजपुर, खरकपुर, सुक्खा निवादा, भग्गा निवादा व तोरना समेत 15 गांवों में फसलें जलमग्न हैं। कई रास्तों पर अभी पानी भरा है। नदी जल लगभग स्थिर होने के कारण किसानों की चिंताएं बढ़ गई है। मुन्ना सविता ने बताया कि धान की 15 बीघा फसल बर्बाद हो गई। नवदा एनी निवासी सुधीर तिवारी ने कहा कि जलभराव के चलते धान की 15 बीघा फसल खराब हो गई।
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महेश तिवारी ने बताया कि धान की करीब 10 बीघा और नरेंद्र दुबे ने बताया कि उनकी धान की करीब 10 बीघा फसल नष्ट होने की कगार पर है। दिलीप त्रिवेदी ने बताया कि 12 बीघा धान की फसल जलमग्न है। भीतरगांव निवासी सुरेंद्र मिश्रा ने बताया कि करीब 20 बीघा धान, रामकुमार मिश्रा ने बताया कि 20 बीघा धान और छुन्ना दुबे ने बताया कि छह बीघा धान की फसल सड़ने की कगार पर है।
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इसी प्रकार भीतरगांव निवासी रामलखन दुबे ने बताया कि धान की छह बीघा और प्रदीप अवस्थी ने बताया कि धान की 10 बीघा फसल जलमग्न होने से बर्बाद होने की कगार पर है। खेत जलमग्न होने से मवेशियों के लिए चारे का संकट बना है। पड़ोसी किसानों से भूसा उधार लेकर जानवरों को खिलाया जा रहा है। एसडीएम अभिषेक कुमार ने बताया कि फसल नुकसान के सर्वे के अनुसार प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता दी जाएगी।