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Kanpur News: धान की कीमतों में तेजी से मुनाफा तय, किसान खुश
Sun, 25 Oct 2026 01:00 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sun, 25 Oct 2026 01:00 AM IST
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सरवनखेड़ा। खरीफ सीजन में तैयार धान की कीमतों में तेजी से मुनाफा तय है। इसको लेकर किसान खुश हैं। सीधे खलिहान से व्यापारी धान की खरीद कर रहे हैं। सरवनखेड़ा ब्लॉक क्षेत्र में किसान बहुतायत में धान उगाते हैं। पिछले वर्ष पतले धान सरबती का दाम 1700 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल रहा था। इस बार इसके दाम 2800 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल है। वहीं मोटा धान राधिका व सांभा किस्म की बिक्री पिछले वर्ष केवल 1300 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल रही थी।
इस वर्ष यह धान किस्म 1800 रुपये से 2000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा है। पिछले वर्ष धान के दामों में कमी की वजह से कोई व्यापारी खरीद में रुचि नहीं ले रहा था, इससे किसानों का धान काफी दिनों तक खलिहान में ही पड़ा रहा था। हालांकि इसबार दाम बढ़े हैं तो व्यापारी खेत से ही धान की खरीद कर रहे हैं। इसका फायदा किसानों को मिल रहा है। वह हार्वेस्टर से धान मड़ाई कराकर खलिहान से ही बिक्री कर रहे हैं।
सेरुवा निवासी विनय तिवारी ने बताया कि इस बार धान के दामों में उछाल से फायदा है। धान की मड़ाई के बाद घर तक लाने में खर्च व मेहनत बच रही है। वहीं धान सूखने से कम होने व नुकसान की आशंका नहीं है। गजनेर निवासी धनंजय सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष धान के दामों में भारी गिरावट के चलते धान की रोपाई कम की गई थी। अब दामों में उछाल से धान की फसल न उगाने वाले किसान पछता रहे हैं। धान व्यापारी रामू सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष मिलों में धान की मांग नहीं थी। इस बार गैर जिलों से पतले धान की मांग हो रही है। इसको लेकर इसका बाजार तेज है।
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इस वर्ष यह धान किस्म 1800 रुपये से 2000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा है। पिछले वर्ष धान के दामों में कमी की वजह से कोई व्यापारी खरीद में रुचि नहीं ले रहा था, इससे किसानों का धान काफी दिनों तक खलिहान में ही पड़ा रहा था। हालांकि इसबार दाम बढ़े हैं तो व्यापारी खेत से ही धान की खरीद कर रहे हैं। इसका फायदा किसानों को मिल रहा है। वह हार्वेस्टर से धान मड़ाई कराकर खलिहान से ही बिक्री कर रहे हैं।
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सेरुवा निवासी विनय तिवारी ने बताया कि इस बार धान के दामों में उछाल से फायदा है। धान की मड़ाई के बाद घर तक लाने में खर्च व मेहनत बच रही है। वहीं धान सूखने से कम होने व नुकसान की आशंका नहीं है। गजनेर निवासी धनंजय सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष धान के दामों में भारी गिरावट के चलते धान की रोपाई कम की गई थी। अब दामों में उछाल से धान की फसल न उगाने वाले किसान पछता रहे हैं। धान व्यापारी रामू सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष मिलों में धान की मांग नहीं थी। इस बार गैर जिलों से पतले धान की मांग हो रही है। इसको लेकर इसका बाजार तेज है।
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