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#हिंदीहैंहमः तकनीक के संस्थान में हो रहा हिंदी पर शोध, आईआईटी के प्रोफेसर विसुअल वर्ड रिकॉग्निशन पर कर रहे काम
Tue, 15 Sep 2020 03:15 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 15 Sep 2020 03:15 PM IST
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आईआईटी कानपुर
- फोटो : अमर उजाला
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तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी माने जाने वाले आईआईटी में हिंदी पर शोध हो रहा है। मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अर्क वर्मा विसुअल वर्ड रिकॉग्निशन पर काम कर रहे हैं। प्रो. वर्मा ने बताया कि हिंदी के शब्दों को हमारा दिमाग किस तरह और कितने समय में पढ़ता है, इसका अध्ययन किया जा रहा है।
साथ ही पढ़ने के बाद जुबान तक आने में हिंदी के शब्दों को कितना समय लगता है, इसके बारे में भी पता किया जा रहा है। प्रो. वर्मा ने बताया कि शोध के दौरान प्रयोगशाला में प्रतिभागियों को हिंदी के शब्द पढ़ने के लिए काफी कम समय के लिए दिए जाते हैं। कितने समय और कितनी शुद्धता से वे इन शब्दों को पढ़ते हैं, इसका मापन किया जाता है।
अभी तक के शोध में पता चला है कि पाठक हिंदी के शब्दों को पढ़ने में 500 से 1200 माइक्रो सेकेंड का समय लेते हैं। बताया कि इन सभी का अध्ययन करके डाटाबेस भी तैयार किया जा रहा है। चूंकि अभी हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं को दिमाग कितनी देर में पढ़ता है, इसको लेकर सीमित शोध ही किए गए हैं। ऐसे में शोध का प्रमुख विषय इन चीजों को समझना ही है।
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साथ ही पढ़ने के बाद जुबान तक आने में हिंदी के शब्दों को कितना समय लगता है, इसके बारे में भी पता किया जा रहा है। प्रो. वर्मा ने बताया कि शोध के दौरान प्रयोगशाला में प्रतिभागियों को हिंदी के शब्द पढ़ने के लिए काफी कम समय के लिए दिए जाते हैं। कितने समय और कितनी शुद्धता से वे इन शब्दों को पढ़ते हैं, इसका मापन किया जाता है।
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अभी तक के शोध में पता चला है कि पाठक हिंदी के शब्दों को पढ़ने में 500 से 1200 माइक्रो सेकेंड का समय लेते हैं। बताया कि इन सभी का अध्ययन करके डाटाबेस भी तैयार किया जा रहा है। चूंकि अभी हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं को दिमाग कितनी देर में पढ़ता है, इसको लेकर सीमित शोध ही किए गए हैं। ऐसे में शोध का प्रमुख विषय इन चीजों को समझना ही है।
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