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Kanpur News: कृषि का रजिस्ट्रेशन, ट्रैक्टर से सवारी ढो कर रहे कमाई
Thu, 29 Oct 2026 01:38 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Thu, 29 Oct 2026 01:38 AM IST
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कानपुर देहात। आए दिन ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से होने वाले हादसे से जिम्मेदार सबक नहीं लेते हैं। खेती और व्यावसायिक कार्य के लिए पंजीकरण कराकर संचालक मनमाने तरीके से सवारी बैठाकर कमाई कर रहे हैं। किराया कम लगे इसकी लालच में ग्रामीण क्षेत्र के लोग जान की परवाह किए बिना आए दिन ट्रैक्टर-ट्रॉली पर बैठकर धार्मिक स्थलों पर सामूहिक रूप से जाते हैं। मेला के अलावा बरात में भी लोग इसका प्रयोग करते हैं। जबकि अधिकतर ट्रैक्टर-ट्रॉली का एआरटीओ में सिर्फ कृषि कार्य के लिए हैं, लेकिन चालक सड़कों पर सवारी बैठाकर दौड़ रहे।
जनपद के एआरटीओ कार्यालय में कृषि कार्य के लिए 21840 ट्रैक्टर पंजीकृत हैं, जबकि व्यावसायिक कार्य के लिए मात्र 75 ट्रैक्टर ही पंजीकृत हैं। सड़कों पर सवारी बैठाकर फर्राटा भरने वाले ट्रैक्टरों में अधिकांश कृषि कार्य के नाम से ही पंजीकृत होते हैं। जिम्मेदार भले ही ऐसे वाहनों पर कार्रवाई करने का दावा करते हैं, लेकिन इसका असर जमीन पर नहीं नजर आ रहा है। बुधवार को संवाद न्यूज एजेंसी टीम ने पड़ताल की तो कुछ ऐसा नहीं दृश्य नजर आया। ट्रैक्टर चालक सवारी को बैठाकर हाईवे व मुख्यालय के पास से निकलते रहे और सड़क पर तैनात यातायात कर्मी सबकुछ देखकर भी अनजान बने रहे। जबकि विभागीय आंकड़ों की बात करें, तो जनवरी से अबतक जनपद की सड़कों पर हुई करीब 583 मार्ग दुर्घटनाओं में 314 लोगों की जान जा चुकी है और 482 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
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डॉल्फिन तिराहा माती, समय। दोपहर 12:30 बजे
माती मुख्यालय से अकबरपुर की तरफ आने के दौरान डॉल्फिन तिराहा पहुंचने पर एक ट्रैक्टर आता नजर आया। ट्रॉली में दस से अधिक लोग बैठे हुए थे और चालक ट्रैक्टर को चलाते हुए उनसे पीछे मुड़कर बातचीत भी करता जा रहा था। ऐसे में जरा से अनदेखी पर दुर्घटना हो सकती है। जबकि मुख्यालय होने के साथ इस मार्ग पर अधिकांश अधिकारियों का कार्यालय व निवास भी है। इसके बावजूद इन पर रोक नहीं लगाई जा सकी।
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बाराजोड़, अकबरपुर, समय। दोपहर 1:10 बजे
कानपुर-इटावा हाईवे पर बाराजोड़ से आगे बढ़ते ही एक ट्रैक्टर जाता हुआ नजर आया। चालक ने ट्रॉली के पीछे भवन निर्माण में प्रयोग होने वाले मिक्सर को बांध रखा था। लापरवाही की हद पार कर ट्रॉली में तो लोग बैठे हुए ही थे, मिक्सर पर भी कुछ लोग लटके हुए थे। जबकि हाईवे पर तेज रफ्तार में भारी व हल्के वाहन निकलते हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन जिम्मेदार भी जब कभी कोई हादसा होता है तभी उनकी नींद टूटती है।
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बयान.....
ट्रैक्टर व ट्रॉली का कृषि या फिर व्यावसायिक कार्य के लिए ही पंजीकरण होता है। इनमें सवारी बैठाने की सख्त मनाही है, इसके बावजूद अगर इनमें लोगों को बैठाकर संचालित पाया जाता है, तो कार्रवाई करते हुए चालान किया जाता है। एक बार फिर से इनके खिलाफ अभियान चलाते हुए कार्रवाई की जाएगी। - रोहित राजपूत, एआरटीओ, प्रवर्तन
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जनपद के एआरटीओ कार्यालय में कृषि कार्य के लिए 21840 ट्रैक्टर पंजीकृत हैं, जबकि व्यावसायिक कार्य के लिए मात्र 75 ट्रैक्टर ही पंजीकृत हैं। सड़कों पर सवारी बैठाकर फर्राटा भरने वाले ट्रैक्टरों में अधिकांश कृषि कार्य के नाम से ही पंजीकृत होते हैं। जिम्मेदार भले ही ऐसे वाहनों पर कार्रवाई करने का दावा करते हैं, लेकिन इसका असर जमीन पर नहीं नजर आ रहा है। बुधवार को संवाद न्यूज एजेंसी टीम ने पड़ताल की तो कुछ ऐसा नहीं दृश्य नजर आया। ट्रैक्टर चालक सवारी को बैठाकर हाईवे व मुख्यालय के पास से निकलते रहे और सड़क पर तैनात यातायात कर्मी सबकुछ देखकर भी अनजान बने रहे। जबकि विभागीय आंकड़ों की बात करें, तो जनवरी से अबतक जनपद की सड़कों पर हुई करीब 583 मार्ग दुर्घटनाओं में 314 लोगों की जान जा चुकी है और 482 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
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डॉल्फिन तिराहा माती, समय। दोपहर 12:30 बजे
माती मुख्यालय से अकबरपुर की तरफ आने के दौरान डॉल्फिन तिराहा पहुंचने पर एक ट्रैक्टर आता नजर आया। ट्रॉली में दस से अधिक लोग बैठे हुए थे और चालक ट्रैक्टर को चलाते हुए उनसे पीछे मुड़कर बातचीत भी करता जा रहा था। ऐसे में जरा से अनदेखी पर दुर्घटना हो सकती है। जबकि मुख्यालय होने के साथ इस मार्ग पर अधिकांश अधिकारियों का कार्यालय व निवास भी है। इसके बावजूद इन पर रोक नहीं लगाई जा सकी।
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बाराजोड़, अकबरपुर, समय। दोपहर 1:10 बजे
कानपुर-इटावा हाईवे पर बाराजोड़ से आगे बढ़ते ही एक ट्रैक्टर जाता हुआ नजर आया। चालक ने ट्रॉली के पीछे भवन निर्माण में प्रयोग होने वाले मिक्सर को बांध रखा था। लापरवाही की हद पार कर ट्रॉली में तो लोग बैठे हुए ही थे, मिक्सर पर भी कुछ लोग लटके हुए थे। जबकि हाईवे पर तेज रफ्तार में भारी व हल्के वाहन निकलते हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन जिम्मेदार भी जब कभी कोई हादसा होता है तभी उनकी नींद टूटती है।
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बयान.....
ट्रैक्टर व ट्रॉली का कृषि या फिर व्यावसायिक कार्य के लिए ही पंजीकरण होता है। इनमें सवारी बैठाने की सख्त मनाही है, इसके बावजूद अगर इनमें लोगों को बैठाकर संचालित पाया जाता है, तो कार्रवाई करते हुए चालान किया जाता है। एक बार फिर से इनके खिलाफ अभियान चलाते हुए कार्रवाई की जाएगी। - रोहित राजपूत, एआरटीओ, प्रवर्तन