ये हैं वो कारण जिनकी वजह से प्रदूषण की टॉप लिस्ट में आ गया कानपुर, डॉक्टरों के सुझाव भी जान लीजिए
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट में कानपुर को विश्व का सबसे प्रदूषित शहर बताया गया है। डब्ल्यूएचओ की यह रिपोर्ट वर्ष 2010 से 2016 के बीच किए गए अध्ययन पर आधारित है। डब्ल्यूएचओ 108 देशों के 4300 शहरों के प्रदूषण संबंधी आंकड़ों के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचा है। 2016 के बाद भी कानपुर में प्रदूषण की मात्रा में कोई विशेष कमी नहीं आई है। प्रदूषण बढ़ने की वजह शहर में जगह-जगह कूड़ा जलाना, वाहनों की बढ़ती संख्या, फैक्ट्रियों का धुआं, निर्माण कार्यों और उखड़ी सड़कों से उड़ने वाली धूल प्रमुख है। इतना सब होने के बावजूद शहर में प्रदूषण के सबसे खतरनाक मानक पीएम 2.5 को मापने की कोई व्यवस्था ही नहीं है।
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में बताया गया कि पीएम 2.5 की वजह से लोग कई तरह की घातक बीमारियाें के शिकार हो रहे हैं। चेतावनी भी दी गई है कि यदि इसे रोकने का प्रयास नहीं किया गया तो स्थिति और भी भयावह होती जाएगी। कानपुर की हवा में जो हानिकारक तत्व पाए गए हैं, उनमें नाइट्रोजन आक्साइड, सल्फर डाई आक्साइड और ब्लैक कार्बन की मात्रा अधिक बताई गई है। यह सभी हानिकारक तत्व शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे फेफडे़, आंख, आंत, रक्त संचार को प्रभावित करते हैं। डब्ल्यूएचओ में दक्षिण पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक पूनम खेत्रपाल सिंह का कहना है कि इससे सबसे ज्यादा महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग प्रभावित हो रहे हैं।
यह है पीएम 2.5
सुरक्षित स्तर: 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर
पीएम 10
हवा में जो भी प्रदूषित कण पाए जाते हैं, जिनकी मात्रा 10 मिलीग्राम होती है, उसे पीएम (पार्टिकुलेडेट मैटर) 10 कहा जाता है। यह पीएम 2.5 से कम खतरनाक होता है क्योंकि बड़ा कण होने की वजह से यह आसानी से मनुष्य के शरीर के अंदर प्रवेश नहीं कर पाता है। इसमें धूल, कोयले के कण, हवा में तैरते बैक्टीरिया आदि शामिल हैं। इनके शरीर में प्रवेश करने पर सांस लेने में तकलीफ, आंख, नाक और गले में जलन जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
सुरक्षित स्तर: 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर
इनकी वजह से फैलता है खतरनाक प्रदूषण
- सल्फर डाई आक्साइड -कोयला जलने (जैसे पावर हाउस में), लोहे और एल्युमिनियम को गलाने से निकलने वाली गैस से यह हानिकारक प्रदूषण हवा में फैलता है।
- ब्लैक कार्बन-डीजल, कच्चा तेल, मिट्टी का तेल और गन्ने की खोई जलने से निकलने वाली गैस से यह हानिकारक प्रदूषण फैलता है।
नवंबर 2017 में सीपीसीबी ने जारी की थी गाइड लाइन
पिछले वर्ष केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हवा में प्रदूषण फैलने से रोकने के लिए देश के सभी शहरों के लिए गाइड लाइन जारी की थी। जिसमें ट्रैफिक सिस्टम ठीक करना, खुदाई से धूल उड़ने से रोकना, मलबा शहर से हटाना, वन क्षेत्र को बढ़ाना, उद्योगों की चिमनियों में फिल्टर समय पर बदलते रहने को कहा गया था।
2017 में पीएम 10 का की स्थिति माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर में
शास्त्री नगर.....211.23
जरीब चौकी...216.37
पनकी एक.....220.81
आवास विकास कल्याणपुर..202.02
सामान्य स्थिति....100 माइक्रोग्राम/क्यूबिक मीटर
प्रशासन का दावा
प्रदूषण से दोगुने हुए दमा रोगी, घबराहट, तनाव भी बढ़ा
डाक्टरों के सुझाव
- वाहनों की शेयरिंग बढ़े
- रेड लाइट पर गाड़ी का इंजन बंद करें
- गाड़ी की समय से सर्विसिंग, टायरों में हवा का उचित प्रेशर
- मुंह पर मास्क लगाएं
- पेड़ ज्यादा से ज्यादा लगाएं
- अधिक प्रदूूषण वाले इलाकों में जाने से परहेज करें
- योग, नियमित व्यायाम