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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Ramleela 2023, The character of Ravana comes alive with the dialogues of Sanjeev, played the role 600 times

Ramleela 2023: ‘संजीव’ के संवाद से सजीव हो जाता ‘रावण’ का किरदार, कहा- याद नहीं कितनी बार निभा चुका हूं भूमिका

Mon, 23 Oct 2023 10:04 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Mon, 23 Oct 2023 10:04 AM IST
सार

Kanpur News: संजीव की दिनचर्या भगवान भोलेनाथ की आराधना से शुरू होती है। प्रदेश के बाहर तीर्थ स्थलों में कानपुर शैली की रामलीला मंचन में धनुष यज्ञ लीला का आयोजन करवाने का श्रेय भी संजीव अवस्थी को ही जाता है।

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Ramleela 2023, The character of Ravana comes alive with the dialogues of Sanjeev, played the role 600 times
सहायक अभियंता संजीव अवस्थी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में रामलीलाओं का दौर जब भी शुरू होता है, तो कल्याणपुर निवासी डायरेक्टर जनरल ऑफ क्वालिटी एश्योरेंस (डीजीक्यूए) विभाग के सहायक अभियंता संजीव अवस्थी का चेहरा लोगों के जेहन स्वयं ही आ जाता है। संजीव पिछले 13 वर्षों से रामलीलाओं में रावण का किरदार निभाते आ रहे हैं।

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वह अब इस किरदार में इतने रच बस गए हैं कि लोग उन्हें अक्सर इसी नाम से ही पुकारने लगते हैं। रावण को लेकर जो मानसिकता लोगों में है, उससे संजीव का जीवन बिल्कुल उलट है। वह परिवार और समाज के बीच सुलझे व्यक्ति और अच्छे अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं।

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याद नहीं...कितनी बार निभा चुके हैं रावण का किरदार
संजीव बताते हैं कि उन्हें याद ही नहीं कि वह अब तक कितनी बार रावण का किरदार निभा चुके हैं। मूलरूप से कानपुर देहात के औनहां निवासी संजीव के जीवन में रावण जैसे किरदार का उदय उस समय हुआ, जब उन्होंने रामानंद सागर के रामायण सीरियल में अभिनेता अरविंद त्रिवेदी को रावण के रूप में शिव तांडव स्तोत्र कहते सुना।

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भगवान भोलेनाथ की आराधना से शुरू होती है दिनचर्या
उसी समय से उन्हें लगा कि इस किरदार में कुछ है, जो उन्हें उसकी ओर प्रेरित कर रहा है। संजीव की दिनचर्या भगवान भोलेनाथ की आराधना से शुरू होती है। प्रदेश के बाहर तीर्थ स्थलों में कानपुर शैली की रामलीला मंचन में धनुष यज्ञ लीला का आयोजन करवाने का श्रेय भी संजीव अवस्थी को ही जाता है।

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विभिन्न जिलों में निभा चुके हैं रावण का किरदार
वह बताते हैं कि अब तक मध्य प्रदेश, हमीरपुर, जालौन, उरई, कानपुर देहात, फतेहपुर, उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर, प्रयागराज में कुंभ मेला, वृंदावन, चित्रकूट धाम, अयोध्या में लक्ष्मण किला सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में वह रावण का किरदार निभा चुके हैं।

रावण की गायन शैली का प्रारंभ उन्होंने ही किया
बताते है कि शिव तांडव का संपूर्ण वाचन व रावण-राम संवाद में रावण की गायन शैली का प्रारंभ उन्होंने ही किया। उनका कहना है कि भोले शंकर ही उनके गुरु और पूज्य है, जिनका अनुशरण कर वह अपनी भूमिका को दमदार बनाने में सफल होते आ रहे हैं।

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