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Ram Mandir Bhumi Pujan: आंदोलन का लक्ष्य अयोध्या, रणनीति का केंद्र था कानपुर
Tue, 04 Aug 2020 03:20 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 04 Aug 2020 03:20 PM IST
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अयोध्या
- फोटो : amar ujala
स्वतंत्रता संग्राम की तरह राम जन्मभूमि आंदोलन में भी कानपुर की भूमिका अहम रही है। एक तरफ जहां इस आंदोलन का लक्ष्य अयोध्या था, वहीं इसका रणनीतिक केंद्र कानपुर था। कानपुर के तत्कालीन प्रांत संघचालक बैरिस्टर स्व. नरेंद्रजीत सिंह के परिवार की इस आंदोलन में उल्लेखनीय भूमिका रही। स्वयं बैरिस्टर समेत उनकी तीन पीढ़ियों ने इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संघचालक व तत्कालीन महानगर संघचालक वीरेंद्रजीत सिंह उन दिनों का वाकया सुनाते हुए बड़े ही उत्तेजित हो उठे। उन्होेंने बताया कि पिता नरेंद्रजीत सिंह ने उत्तर प्रदेश और आसपास संघ के विस्तार में आधारभूत भूमिका निभाई थी। द्वितीय सरसंघचालक गुरुजी, रज्जू भैया, भाउराव जी देवरस, दीनदयाल, नानाजी देशमुख, और राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के मुख्य शिल्पी अशोक सिंघल सभी का उनके घर आना जाना होता था।
रज्जू भैया और अशोक सिंघल उनसे अक्सर परामर्श करते थे। रावतपुर स्थित श्रीरामलला मंदिर उन दिनों सभी गतिविधियों का मुख्य केंद्र था। बैरिस्टर नरेंद्रजीत सिंह रामलला मंदिर के ट्रस्टी के नाते रणनीतिकार की भूमिका निभाते रहे। बताते हैं कि पूरे देश में जब राम कारसेवा के लिए शिलापूजन का अभियान चल रहा था तो रामलला मंदिर पुन: इस अभियान का मुख्य केंद्र रहा।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संघचालक व तत्कालीन महानगर संघचालक वीरेंद्रजीत सिंह उन दिनों का वाकया सुनाते हुए बड़े ही उत्तेजित हो उठे। उन्होेंने बताया कि पिता नरेंद्रजीत सिंह ने उत्तर प्रदेश और आसपास संघ के विस्तार में आधारभूत भूमिका निभाई थी। द्वितीय सरसंघचालक गुरुजी, रज्जू भैया, भाउराव जी देवरस, दीनदयाल, नानाजी देशमुख, और राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के मुख्य शिल्पी अशोक सिंघल सभी का उनके घर आना जाना होता था।
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रज्जू भैया और अशोक सिंघल उनसे अक्सर परामर्श करते थे। रावतपुर स्थित श्रीरामलला मंदिर उन दिनों सभी गतिविधियों का मुख्य केंद्र था। बैरिस्टर नरेंद्रजीत सिंह रामलला मंदिर के ट्रस्टी के नाते रणनीतिकार की भूमिका निभाते रहे। बताते हैं कि पूरे देश में जब राम कारसेवा के लिए शिलापूजन का अभियान चल रहा था तो रामलला मंदिर पुन: इस अभियान का मुख्य केंद्र रहा।
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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए बने ट्रस्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास भी उन दिनों रामलला मंदिर में शिला पूजन कार्यक्रम में उपस्थित हुए। रामलला विद्यालय के प्राचार्य पंडित कालीशंकर अवस्थी, ज्ञानेंद्र सचान और हरिनारायण वाजपेयी इस आंदोलन में पूर्ण समर्पित थे।