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Kanpur News: प्रोटीन बी मार्कर बताएगा गुर्दा, अग्नाशय की सेहत
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कानपुर। लिपिड प्रोफाइल के एपोलाइपो प्रोटीन बी मार्कर की जांच से गुर्दा, अग्नाशय की सेहत का पता चल जाएगा। अगर यह मार्कर बढ़ा हुआ मिलता है तो तुरंत गुर्दा, ब्लड शुगर आदि की जांच करा लेनी चाहिए। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में एपोलाइपो प्रोटीन बी मार्कर पर शोध रिपोर्ट से यह पता चला है। आमतौर पर अभी रोगी जो लिपिड प्रोफाइल की जांच कराते हैं उसमें इस मार्कर की जांच नहीं की जाती। इस मार्कर की जांच से विभिन्न गुर्दा, अग्नाशय के रोग बहुत शुरुआत में ही पकड़ में आ जाएंगे। इससे रोगी इलाज कराकर इनसे बच सकता है।
लिपिड प्रोफाइल में खून में मौजूद वसा, कोलेस्ट्राल आदि का पता चलता है। इससे धमनियों में वसा का जमाव, हृदय रोग आदि के संकेत मिल जाते हैं। इस जांच के वास्ते लिए गए सैंपल से ही अगर एपोलाइपो प्रोटीन बी की भी जांच करा ली जाए तो हृदय के साथ गुर्दा रोग के भी संकेत मिल जाएंगे। इस मार्कर पर शोध करने वाले डॉ. नितेश नायक ने बताया कि एपोलाइपो प्रोटीन बी खून में 80 से 100 मिलीग्राम प्रति डीएल होना चाहिए। अगर इसकी मात्रा 105 मिलीग्राम से अधिक निकलती है तो इसका मतलब है कि गुर्दा खराब हो सकता है। तुरंत गुर्दे से संबंधित सभी जांचें करा लेनी चाहिए।
इसके साथ ही यह डायबिटीज होने का भी संकेत देता है कि आगे रोगी का ब्लड शुगर लेवल बढ़ेगा। शरीक के मेटाबोलिक सिंड्रोम की और भी खामियां पकड़ में आती हैं। इससे मोटापे के खतरे भी पकड़ में आते हैं। उन्होंने बताया कि अगर इस प्रोटीन की मात्रा खून में बढ़ती है तो लिपिड प्रोफाइल भी बढ़ने लगता है। रोग की बहुत शुरुआत में ही इस मार्कर से संकेत मिल जाते हैं। व्यक्ति को रोगों से बचाव का मौका मिल जाता है। डॉ. नायक ने बताया कि मार्कर को लेकर दो सौ रोगियों पर शोध किया गया। इनमें 54 फीसदी महिलाएं और 46 फीसदी पुरुष रोगी शामिल रहे हैं।
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लिपिड प्रोफाइल में खून में मौजूद वसा, कोलेस्ट्राल आदि का पता चलता है। इससे धमनियों में वसा का जमाव, हृदय रोग आदि के संकेत मिल जाते हैं। इस जांच के वास्ते लिए गए सैंपल से ही अगर एपोलाइपो प्रोटीन बी की भी जांच करा ली जाए तो हृदय के साथ गुर्दा रोग के भी संकेत मिल जाएंगे। इस मार्कर पर शोध करने वाले डॉ. नितेश नायक ने बताया कि एपोलाइपो प्रोटीन बी खून में 80 से 100 मिलीग्राम प्रति डीएल होना चाहिए। अगर इसकी मात्रा 105 मिलीग्राम से अधिक निकलती है तो इसका मतलब है कि गुर्दा खराब हो सकता है। तुरंत गुर्दे से संबंधित सभी जांचें करा लेनी चाहिए।
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इसके साथ ही यह डायबिटीज होने का भी संकेत देता है कि आगे रोगी का ब्लड शुगर लेवल बढ़ेगा। शरीक के मेटाबोलिक सिंड्रोम की और भी खामियां पकड़ में आती हैं। इससे मोटापे के खतरे भी पकड़ में आते हैं। उन्होंने बताया कि अगर इस प्रोटीन की मात्रा खून में बढ़ती है तो लिपिड प्रोफाइल भी बढ़ने लगता है। रोग की बहुत शुरुआत में ही इस मार्कर से संकेत मिल जाते हैं। व्यक्ति को रोगों से बचाव का मौका मिल जाता है। डॉ. नायक ने बताया कि मार्कर को लेकर दो सौ रोगियों पर शोध किया गया। इनमें 54 फीसदी महिलाएं और 46 फीसदी पुरुष रोगी शामिल रहे हैं।
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