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15 दिसंबर से इसलिए वर्जित हैं मांगलिक कार्यक्रम
राहुल शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 13 Dec 2016 12:00 AM IST
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15 से खरमास, मांगलिक कार्यक्रम वर्जित
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सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने पर 15 दिसंबर की रात 8:52 बजे से मांगलिक कार्यक्रम वर्जित होंगे। इसी के साथ खरमास प्रारंभ हो जाएगा। 14 जनवरी 2017 को सुबह 7:39 बजे सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होते ही मांगलिक कार्यक्रम शुरू हो सकेंगे। पहली शुभ लगन 15 जनवरी को पड़ रही है।
कानपुर के महामोहपाध्याय डॉ. आदित्य पांडेय ने बताया कि खरमास का प्रारंभ 15 दिसंबर की रात से होगा और यह एक माह तक चलेगा। 14 मार्च 2017 को जब सूर्य पुन: गुरु की दूसरी राशि मीन में प्रवेश करेंगे। खरमास फिर प्रारंभ होगा। ऐसे में 15 जनवरी से 13 मार्च तक मांगलिक कार्यक्रम होंगे। आचार्य अमरेश मिश्रा ने बताया कि 14 जनवरी की सुबह 7:39 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। उदयातिथि नियम के अनुसार मांगलिक कार्यक्रम 15 जनवरी से ही प्रारंभ होंगे। जनवरी में लगन का सबसे उत्तम मुहूर्त 29 जनवरी को हैं।
विवाह के शुभ मुहूर्त
जनवरी 2017 में-15, 16, 17, 18, 19, 20, 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27 व 29
फरवरी में-1, 2, 5, 6, 7, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18, 19, 20, 21, 22 व 28
मार्च में-1, 4, 5, 7, 10, 11, 12 व 13
खरमास का धार्मिक महत्व
ऐसी मान्यता है कि स्वयं सूर्य देवगुरु बृहस्पति के साथ कर्मकांड में व्यस्त हो जाते है। विवाह आदि मांगलिक कार्यक्रमों में देवगुरु बृहस्पति का हम सदैव आह्वान करते है। ऐसे में बृहस्पति की व्यस्तता में किया गया कार्यक्रम उचित नहीं माना जाता है। इस माह को खरमास के नाम से जाना जाता है।
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कानपुर के महामोहपाध्याय डॉ. आदित्य पांडेय ने बताया कि खरमास का प्रारंभ 15 दिसंबर की रात से होगा और यह एक माह तक चलेगा। 14 मार्च 2017 को जब सूर्य पुन: गुरु की दूसरी राशि मीन में प्रवेश करेंगे। खरमास फिर प्रारंभ होगा। ऐसे में 15 जनवरी से 13 मार्च तक मांगलिक कार्यक्रम होंगे। आचार्य अमरेश मिश्रा ने बताया कि 14 जनवरी की सुबह 7:39 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। उदयातिथि नियम के अनुसार मांगलिक कार्यक्रम 15 जनवरी से ही प्रारंभ होंगे। जनवरी में लगन का सबसे उत्तम मुहूर्त 29 जनवरी को हैं।
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विवाह के शुभ मुहूर्त
जनवरी 2017 में-15, 16, 17, 18, 19, 20, 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27 व 29
फरवरी में-1, 2, 5, 6, 7, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18, 19, 20, 21, 22 व 28
मार्च में-1, 4, 5, 7, 10, 11, 12 व 13
खरमास का धार्मिक महत्व
ऐसी मान्यता है कि स्वयं सूर्य देवगुरु बृहस्पति के साथ कर्मकांड में व्यस्त हो जाते है। विवाह आदि मांगलिक कार्यक्रमों में देवगुरु बृहस्पति का हम सदैव आह्वान करते है। ऐसे में बृहस्पति की व्यस्तता में किया गया कार्यक्रम उचित नहीं माना जाता है। इस माह को खरमास के नाम से जाना जाता है।
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