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Kanpur News: हाईवे पर काल बनकर दौड़ रहीं निजी टूरिस्ट स्लीपर बसें

Tue, 12 May 2026 01:52 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 12 May 2026 01:52 AM IST
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Private tourist sleeper buses are running like death on the highway.
कानपुर। शहर की सड़कों और हाईवे पर इन दिनों निजी स्लीपर बसें खुलेआम परिवहन नियमों की धज्जियां उड़ा कर काल बनकर दौड़ रही हैं। दिल्ली, आगरा, लखनऊ, हरियाणा, राजस्थान और पूर्वांचल रूट पर जाने वाली कई निजी बसों को यात्री बस कम और चलता-फिरता मालवाहक ज्यादा बना दिया गया है। बसों की छतों पर अवैध कैरियर लगाकर भारी मात्रा में सामान ढोया जा रहा है। अंदर यात्रियों को ठूंस-ठूंसकर भरा जा रहा है। बात यह है कि यह पूरा खेल आरटीओ प्रवर्तन टीम और स्थानीय पुलिस की आंखों के सामने चल रहा है। जिम्मेदार किसी घटना के बाद सख्ती दिखाते हैं और इसके बाद फिर खेल शुरू हो जाता है।
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रात होते ही नौबस्ता, रामादेवी, चकेरी, फजलगंज, घंटाघर और हाईवे किनारे निजी बसों का जमावड़ा लग जाता है। यहां खुलेआम बसों की छतों पर बड़े-बड़े बैग, पार्सल, घरेलू सामान, सब्जियों की बोरियां और कारोबारियों का माल लादा जाता है। कई बसों में छत तक इतना वजन भर दिया जाता है कि वाहन का संतुलन तक बिगड़ जाता है। जिम्मेदार विभाग कार्रवाई के बजाय मूकदर्शक बना बैठा है।
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सोमवार तड़के बिल्हौर के पास लखनऊ एक्सप्रेसवे पर पटना से दिल्ली जा रही निजी बस हादसे का शिकार हो गई। इसकी छत पर ओवरलोड सामान रखा था। हादसे में दो लोगों की मौत और कई घायल हुए। इसके बाद भी कानपुर से गुजरने वाली निजी बसों की ओवरलोडिंग पर कोई असर नहीं दिखा। हादसे के बाद कुछ घंटों की औपचारिक चेकिंग जरूर हुई लेकिन रात ढलते ही फिर से पुराना खेल शुरू हो गया।
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निजी बस ऑपरेटरों और विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से निजी बसों का यह कारोबार वर्षों से फल-फूल रहा है। बस संचालकों से वसूली कर नियमों को नजरअंदाज किया जाता है। यही वजह है कि हाईवे पर चेकिंग के बड़े-बड़े दावे करने वाला विभाग शायद ही कभी किसी बड़ी बस का परमिट निरस्त करता दिखाई देता है। जिन बसों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों की नियमित जांच होनी चाहिए उन्हीं बसों में यात्रियों की सीटों के बीच तक पार्सल रख दिए जाते हैं। हादसे की स्थिति में यात्रियों का बाहर निकलना तक मुश्किल हो सकता है।

आरटीओ विभाग की प्रवर्तन दल की टीम रात में सड़कों पर ओवरलोड वाहनों की जांच कर कार्रवाई करती है। इसमें सबसे ज्यादा टीम मौरंग, गिट्टी के ट्रकों पर कार्रवाई होती है। इसके अलावा निजी सवारों बसों पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है। कानपुर से ही करीब 200 से 300 बसें छत पर ओवरलोड सामान भरकर दिल्ली, हरियाणा, लखनऊ, आगरा को रवाना होती हैं लेकिन हालात ये हैं कि बीते एक वर्ष में 161 निजी बसों का चालान काटा। 45 बसों को सीज किया है। इनमें से ज्यादातर बसें दूसरे शहर या राज्य की हैं। बसों में ज्यादातर का फिटनेस और परमिट एक्सपायर हो चुका था।


ये हैं निजी बसों में प्रतिबंधित


- बस की छत पर स्थायी कैरियर लगाकर भारी सामान ढोना।

- वाहन की मूल बॉडी स्ट्रक्चर बदलना।

- सीटों की संख्या बढ़ाना या गलियारा कम करना।

- इमरजेंसी गेट बंद करना या उसके सामने सामान रखना।

- स्लीपर बस में अतिरिक्त बर्थ जोड़ना।
-गैस सिलिंडर, ज्वलनशील पदार्थ या भारी पार्सल ढोना

-वाहन की ऊंचाई और चौड़ाई तय मानक से ज्यादा करना

-फिटनेस प्रमाणपत्र में दर्ज डिजाइन से अलग बदलाव करना

- बिना अनुमति अतिरिक्त एलईडी, प्रेशर हॉर्न, फ्लैश लाइट लगाना

वर्जन-
बसों को लेकर अभियान लगातार चलाया जाता है। यात्री बसों की छत पर सामान रखकर ढोना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। बीते वर्ष 161 बसों का चालान 45 सीज की गई हैं।
कहकशा खातून, एआरटीओ प्रवर्तन
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