Poonch Attack: बच्चों को सेना में अधिकारी बनाने की इच्छा रखते थे लायंस नायक करन, याद में बिलख रहा पूरा परिवार
बलिदानी करन यादव अपने बच्चों को भी फौज में अधिकारी बनना चाहते थे, उनके एक बेटा आयुष डेढ़ वर्ष वएक बेटी आर्या 6 वर्ष जो लाल बंगला में किराए के मकान में रहते हैं।
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देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए चौबेपुर के भाऊपुर गांव निवासी एक वीर सपूत ने अपनी प्राणों की आहूति दी है। आतंकी मुठभेड़ में भाऊपुर गांव निवासी सैनिक करन सिंह यादव के बलिदान होने की सूचना मिलते ही परिजन ही नहीं बल्कि आसपास गांवों के हजारों लोगों का तांता पीड़ित परिवारवालों के साथ ढाढस बधाने के लिए उमड़ा हुआ है। वहीं सेना और जिला प्रशासन के अधिकारी भी पीड़ित परिवार को सात्वना देने के लिए पहुंच रहे हैं।
उप जिलाधिकारी बिल्हौर रश्मी लांबा और तहसीलदार तिमराज सिंह ने बताया कि चौबेपुर भाऊपुर गांव निवासी बाबू लाल के 30 वर्षीय करन सिंह यादव जम्मू कश्मीर के पुंछ सेक्टर में 48 आरआर बटालियन में लायंस नायक के पद पर तैनात थे। प्रारंभिक सूचना के अनुसार बीते दिनों सीमा की सुरक्षा करते समय आतंकियों के हमले में सेना के पांच जवान बलिदान हुए उसमें से क्षेत्र के करन सिंह यादव भी आंतकियों का शिकार हुए।
पिता बाबूलाल ने बताया कि पुत्र करन सिंह शुरू से ही देश की सेवा के लिए मन बना चुका था और पढ़ाई करते हुए उसने कड़ी मेहनत कर वर्ष 2013 में सेना में नौकरी पाई। पुत्र करण की शादी करीब 6 साल पहले अंजू से हुई। करन के एक पुत्री 5 वर्षीय आर्या और डेढ वर्षीय पुत्र आयुष है। बहू लाल बग्ला, कानपुर में रहकर आर्या को सैनिक स्कूल में पढ़ाती है। वहीं अगस्त 2023 में करण रक्षाबंधन पर्व पर घर आया था तब उसने फरवरी 2023 में घर आने की बात कही थी, लेकिन बेटा तो नहीं आया, लेकिन उसके बलिदान होने की सूचना जरूर आ गई।
उधर, करन के बलिदान होने की जानकारी पर अधिकारियों सहित सेना से जुड़े अफसरों, राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों सहित नाते रिश्तेदारों का भी पीड़ित परिवार को ढाढस बंधाने के लोगों का आना लगातार जारी है। बलिदानी सैनिक करन के छोटे भाई अरुण यादव ने बताया कि भाई देश सेवा के लिए उसे भी प्रेरित करते थे, वह भी सेना में जाने के लिए तैयारी कर रहे हैं। शहादत की खबर मिली, परिवार ही नहीं पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। घरवाले बेटे के आखिरी वादे को याद कर-करके बिलख रहे हैं। परिवार, गांव ही नहीं बल्कि इलाके में घटना की सूचना के बाद मातम का माहौल है।
करन के आने का परिवार के साथ पड़ोसियों को रहता था इंतजार
दिलेरी, जांबाजी और अपने स्वभाव के चलते करन गांव के दोस्तों व ग्रामीणों में लायंस नायक करन सिंह यादव काफी लोकप्रिय थे। जब भी छुट्टी पर आते तो गांव वालों से बड़े प्यार से बात करते। सेना की कई रोचक किस्से भी वह ग्रामीणों-पड़ोसियों को बताते थे, साथ ही पिता बाबूलाल, भाई अरुण के साथ खेतों पर भरपूर काम करने के साथ ही सभी को घुमाने के लिए कानपुर और बाजार से खरीददारी करवाने ले जाते थे। इसलिए करण सिंह के आने का इंतजार सिर्फ परिवार के लोगों को ही नहीं बल्कि गांव के पड़ोसियों को भी रहता था।
बच्चों को सेना में अधिकारी बनाने की इच्छा रखते थे लायंस नायक करन
बलिदानी करन यादव अपने बच्चों को भी फौज में अधिकारी बनना चाहते थे, उनके एक बेटा आयुष डेढ़ वर्ष वएक बेटी आर्या 6 वर्ष जो लाल बंगला में किराए के मकान में रहते हैं। बिटिया को सैनिक स्कूल में पढ़ती है। पत्नी अंजू ने बताया कि उनका सपना था कि उनका बेटा सेना में बड़ा अधिकारी बने।
भाई के बलिदान होने पर बहनें व्याकुल
बलिदान होने की खबर पर पूरे परिवार में कोहराम मचा हुआ है। अगस्त में रक्षाबंधन पर तीन बहनों साधना, जिनकी शादी हो चुकी है और आराधना व सोनम अविवाहित है ने भाई के हाथों में राखी बांधी थी। उन्हें क्या पता कि था कि अगले रक्षाबंधन में दोबारा राखी नहीं बाध पाएंगी।