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पालीटेक्निक की लैब मशीन खरीद में धांधली, जांच शुरू
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Fri, 06 Feb 2015 03:02 AM IST
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राजकीय पालीटेक्निकों के लिए लैब मशीन खरीदने में धांधली की शिकायत पर प्राविधिक शिक्षा निदेशालय की दो सदस्यीय कमेटी (अपर निदेशक कफिल अहमद, संयुक्त निदेशक आरके वर्मा) ने मामले की जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। खरीदी गईं 12 लैब मशीनों की कीमत करीब 61 लाख रुपये है।
आरोप है कि एक ही कंपनी को तीन टेंडर देकर कानपुर नगर के रावतपुर और घाटमपुर सहित यूपी के 12 राजकीय पालीटेक्निक में खराब मशीनों की सप्लाई कर दी गई है। ज्यादातर मशीनें बंद हैं।
इस संबंध में शिकायत मिलने पर लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ने जांच के आदेश दिए हैं। प्रारंभिक जांच में ही तमाम गड़बड़ियां मिली हैं। पूरी रिपोर्ट जल्द ही आएगी। इस मामले में तत्कालीन प्राविधिक शिक्षा निदेशक मधुकर और घाटमपुर सहित यूपी के 11 राजकीय पालीटेक्निक के प्रिंसिपल की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।
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राजकीय पालीटेक्निकों में मेकेनिकल इंजीनियरिंग की लैब हैं। इनमें स्टूडेंट्स को लोहा काटने, उससे नट, बोल्ट सहित तमाम उपकरण बनाने, बोरिंग, टर्निंग का प्रशिक्षण दिया जाता है। पूरा काम मैनुअल होता है।
इस प्रशिक्षण को हाईटेक बनाने के लिए ही प्राविधिक शिक्षा निदेशालय ने शैक्षिक सत्र 2010-11 में कंप्यूटराइज्ड न्यूमेरिकली कंट्रोल्ड (सीएनसी) मशीनें मंगा ली।
इसके जरिए लोहे को सेप देकर उपकरण बनाने का प्रशिक्षण दिया गया लेकिन कुछ दिनों में ही मशीनें खराब हो गईं। तब प्राविधिक शिक्षा निदेशालय ने जांच कराई थी लेकिन मामला हाई प्रोफाइल होने के कारण कार्रवाई नहीं की जा सकी। अब इसी मामले की जांच लोकायुक्त करवा रहे हैं।
इसकी पुष्टि प्राविधिक शिक्षा निदेशक ओपी वर्मा ने भी की है। सूत्रों ने बताया कि दो सदस्यीय कमेटी की प्रारंभिक जांच में ही टेंडर खोलने की गलती सामने आई है।
पता चला है कि प्राविधिक शिक्षा निदेशालय ने जो टेंडर खोले थे, उसे एक ही कंपनी ने खरीदा। अलग-अलग पालीटेक्निक के लिए एक ही टेंडर निकाला गया, जो नियमों के खिलाफ है।
नियमानुसार हर पालीटेक्निक की लैब मशीन के लिए अलग-अलग टेंडर निकाले जाने चाहिए थे। जिस कंपनी ने टेंडर खरीदा, उसका संबंध तत्कालीन प्राविधिक शिक्षा निदेशक मधुकर से बताया गया है।
इसी कंपनी ने कानपुर सहित यूपी के 12 राजकीय पालीटेक्निक में जंग लगी पुरानी सीएनसी मशीनों की सप्लाई कर दी, जो कि चलने लायक नहीं थीं। इस पर राजकीय पालीटेक्निक रावतपुर के तत्कालीन प्रिंसिपल ने आपत्ति भी की। साथ ही भुगतान रोक दिया। इस पर कंपनी ने दूसरी मशीन की सप्लाई की और भुगतान ले लिया।
हालांकि दूसरी मशीन की क्वालिटी भी ठीक नहीं है। वर्कशॉप में काम नहीं कर रही है। सूत्रों ने कहा कि इस मामले में सुमेरपुर हमीरपुर, नरैनी बांदा, मानिकपुर चित्रकूट, घाटमपुर सहित यूपी के 10 राजकीय पालीटेक्निक के प्रिंसिपल की भूमिका संदिग्ध है।
प्राविधिक शिक्षा निदेशालय के दबाव में इन प्रिंसिपलों ने मशीन की क्वालिटी नहीं देखी। खराब मशीन वर्कशॉप में रखवाई और 11 मशीनों के एवज में 56.10 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। अब इन पर कार्रवाई की तलवार लटक है। इस मसले पर पूर्व निदेशक मधुकर से बातचीत करने की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
कन्नौज के एक व्यक्ति की शिकायत पर मशीन खरीद की जांच कराई जा रही है। यह मामला काफी गंभीर है। शिकायत में तत्कालीन निदेशक मधुकर पर आय से अधिक संपत्ति हासिल करने का आरोप भी है लेकिन उसके एवज में ठोस साक्ष्य नही हैं। मशीन खरीद में गड़बड़ी के ठोस साक्ष्य हैं।
-एनके मेहरोत्रा, लोकायुक्त यूपी
लोकायुक्त के आदेश के बाद प्राविधिक शिक्षा निदेशालय की दो सदस्यीय कमेटी मामले की जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कोई टिप्पणी की जा सकती है। मेकेनिकल इंजीनियरिंग लैब की मशीनें शैक्षिक सत्र 2010-11 में खरीद गई थीं। यह पुराना मामला है। अब लोकायुक्त ने जांच केआदेश दिए हैं।
-ओपी वर्मा, निदेशक प्राविधिक शिक्षा
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आरोप है कि एक ही कंपनी को तीन टेंडर देकर कानपुर नगर के रावतपुर और घाटमपुर सहित यूपी के 12 राजकीय पालीटेक्निक में खराब मशीनों की सप्लाई कर दी गई है। ज्यादातर मशीनें बंद हैं।
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इस संबंध में शिकायत मिलने पर लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ने जांच के आदेश दिए हैं। प्रारंभिक जांच में ही तमाम गड़बड़ियां मिली हैं। पूरी रिपोर्ट जल्द ही आएगी। इस मामले में तत्कालीन प्राविधिक शिक्षा निदेशक मधुकर और घाटमपुर सहित यूपी के 11 राजकीय पालीटेक्निक के प्रिंसिपल की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।
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राजकीय पालीटेक्निकों में मेकेनिकल इंजीनियरिंग की लैब हैं। इनमें स्टूडेंट्स को लोहा काटने, उससे नट, बोल्ट सहित तमाम उपकरण बनाने, बोरिंग, टर्निंग का प्रशिक्षण दिया जाता है। पूरा काम मैनुअल होता है।
इस प्रशिक्षण को हाईटेक बनाने के लिए ही प्राविधिक शिक्षा निदेशालय ने शैक्षिक सत्र 2010-11 में कंप्यूटराइज्ड न्यूमेरिकली कंट्रोल्ड (सीएनसी) मशीनें मंगा ली।
इसके जरिए लोहे को सेप देकर उपकरण बनाने का प्रशिक्षण दिया गया लेकिन कुछ दिनों में ही मशीनें खराब हो गईं। तब प्राविधिक शिक्षा निदेशालय ने जांच कराई थी लेकिन मामला हाई प्रोफाइल होने के कारण कार्रवाई नहीं की जा सकी। अब इसी मामले की जांच लोकायुक्त करवा रहे हैं।
इसकी पुष्टि प्राविधिक शिक्षा निदेशक ओपी वर्मा ने भी की है। सूत्रों ने बताया कि दो सदस्यीय कमेटी की प्रारंभिक जांच में ही टेंडर खोलने की गलती सामने आई है।
पता चला है कि प्राविधिक शिक्षा निदेशालय ने जो टेंडर खोले थे, उसे एक ही कंपनी ने खरीदा। अलग-अलग पालीटेक्निक के लिए एक ही टेंडर निकाला गया, जो नियमों के खिलाफ है।
नियमानुसार हर पालीटेक्निक की लैब मशीन के लिए अलग-अलग टेंडर निकाले जाने चाहिए थे। जिस कंपनी ने टेंडर खरीदा, उसका संबंध तत्कालीन प्राविधिक शिक्षा निदेशक मधुकर से बताया गया है।
इसी कंपनी ने कानपुर सहित यूपी के 12 राजकीय पालीटेक्निक में जंग लगी पुरानी सीएनसी मशीनों की सप्लाई कर दी, जो कि चलने लायक नहीं थीं। इस पर राजकीय पालीटेक्निक रावतपुर के तत्कालीन प्रिंसिपल ने आपत्ति भी की। साथ ही भुगतान रोक दिया। इस पर कंपनी ने दूसरी मशीन की सप्लाई की और भुगतान ले लिया।
हालांकि दूसरी मशीन की क्वालिटी भी ठीक नहीं है। वर्कशॉप में काम नहीं कर रही है। सूत्रों ने कहा कि इस मामले में सुमेरपुर हमीरपुर, नरैनी बांदा, मानिकपुर चित्रकूट, घाटमपुर सहित यूपी के 10 राजकीय पालीटेक्निक के प्रिंसिपल की भूमिका संदिग्ध है।
प्राविधिक शिक्षा निदेशालय के दबाव में इन प्रिंसिपलों ने मशीन की क्वालिटी नहीं देखी। खराब मशीन वर्कशॉप में रखवाई और 11 मशीनों के एवज में 56.10 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। अब इन पर कार्रवाई की तलवार लटक है। इस मसले पर पूर्व निदेशक मधुकर से बातचीत करने की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
कन्नौज के एक व्यक्ति की शिकायत पर मशीन खरीद की जांच कराई जा रही है। यह मामला काफी गंभीर है। शिकायत में तत्कालीन निदेशक मधुकर पर आय से अधिक संपत्ति हासिल करने का आरोप भी है लेकिन उसके एवज में ठोस साक्ष्य नही हैं। मशीन खरीद में गड़बड़ी के ठोस साक्ष्य हैं।
-एनके मेहरोत्रा, लोकायुक्त यूपी
लोकायुक्त के आदेश के बाद प्राविधिक शिक्षा निदेशालय की दो सदस्यीय कमेटी मामले की जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कोई टिप्पणी की जा सकती है। मेकेनिकल इंजीनियरिंग लैब की मशीनें शैक्षिक सत्र 2010-11 में खरीद गई थीं। यह पुराना मामला है। अब लोकायुक्त ने जांच केआदेश दिए हैं।
-ओपी वर्मा, निदेशक प्राविधिक शिक्षा