{"_id":"68d843128ce00f980500e370","slug":"polytechnic-courses-that-offer-fewer-jobs-are-losing-steam-kanpur-news-c-12-1-knp1033-1280083-2025-09-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kanpur News: पॉलिटेक्निक के जिन कोर्स से नौकरी मिल रही कम उनका निकल रहा दम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur News: पॉलिटेक्निक के जिन कोर्स से नौकरी मिल रही कम उनका निकल रहा दम
विज्ञापन
कानपुर। नौकरी नहीं मिलने, वेतन की कमी और सरकारी नौकरियों में सीमित अवसरों के कारण पॉलिटेक्निक के कई पुराने कोर्स से छात्रों का मोहभंग होने लगा है। इससे कारपेट टेक्नोलॉजी, पेपर एंड पल्प टेक्नोलॉजी, टेक्सटाइल इंजीनियरिंग, फूड टेक्नोलॉजी, लेदर टेक्नोलॉजी (टैनिंग) में आधे से भी अधिक सीटें खाली बच रही हैं। कारपेट टेक्नोलॉजी में तो 83 प्रतिशत तक सीटें खाली रह गई हैं। हालांकि अभी भी कई कोर्स में छात्रों का रुझान बहुत अच्छा है। इसमें दो-चार प्रतिशत सीटें ही खाली हैं।
एक जमाना था जब पॉलिटेक्निक में पारंपरिक कोर्स का अलग ही दबदबा था। समय और इंडस्ट्रीज की मांग के चलते अब इनकी तस्वीर बदल रही है। छात्रों का रुख अब सिर्फ उन विषयों की ओर है जहां रोजगार की संभावनाएं हैं। इसमें प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (इंडस्ट्रियल कंट्रोल), ग्लास एंड सिरेमिक इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग (माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक्स), इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग जैसे कोर्सों में दाखिले की होड़ मची है। इनकी 98 प्रतिशत तक सीटें भरी हैं।
प्राविधिक शिक्षा के वर्तमान निदेशक अजीज अहमद ने बताया कि पॉलिटेक्निक में एडमिशन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब शासन स्तर पर समीक्षा बैठक होगी जिसमें तय होगा कि किन कोर्सों को बंद किया जाए और किन्हें संशोधित किया जाए ताकि छात्रों को अधिक रोजगारपरक और उद्योग की मांग के अनुरूप शिक्षा दी जा सके। वहीं
विज्ञापन
प्राविधिक शिक्षा के पूर्व निदेशक कन्हैया राम ने बताया कि जब छात्रों को किसी कोर्स से नौकरी और प्लेसमेंट की संभावना नहीं दिखती तो उनका रुझान स्वाभाविक रूप से उससे हट जाता है। जरूरत है कि तकनीकी संस्थान ऐसे कोर्स शुरू करें जो मौजूदा उद्योगों और बाजार की मांग से मेल खाते हों। तभी सीटें भरेंगी और संस्थानों की साख भी बढ़ेगी।
विज्ञापन
एक जमाना था जब पॉलिटेक्निक में पारंपरिक कोर्स का अलग ही दबदबा था। समय और इंडस्ट्रीज की मांग के चलते अब इनकी तस्वीर बदल रही है। छात्रों का रुख अब सिर्फ उन विषयों की ओर है जहां रोजगार की संभावनाएं हैं। इसमें प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (इंडस्ट्रियल कंट्रोल), ग्लास एंड सिरेमिक इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग (माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक्स), इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग जैसे कोर्सों में दाखिले की होड़ मची है। इनकी 98 प्रतिशत तक सीटें भरी हैं।
विज्ञापन
प्राविधिक शिक्षा के वर्तमान निदेशक अजीज अहमद ने बताया कि पॉलिटेक्निक में एडमिशन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब शासन स्तर पर समीक्षा बैठक होगी जिसमें तय होगा कि किन कोर्सों को बंद किया जाए और किन्हें संशोधित किया जाए ताकि छात्रों को अधिक रोजगारपरक और उद्योग की मांग के अनुरूप शिक्षा दी जा सके। वहीं
विज्ञापन
प्राविधिक शिक्षा के पूर्व निदेशक कन्हैया राम ने बताया कि जब छात्रों को किसी कोर्स से नौकरी और प्लेसमेंट की संभावना नहीं दिखती तो उनका रुझान स्वाभाविक रूप से उससे हट जाता है। जरूरत है कि तकनीकी संस्थान ऐसे कोर्स शुरू करें जो मौजूदा उद्योगों और बाजार की मांग से मेल खाते हों। तभी सीटें भरेंगी और संस्थानों की साख भी बढ़ेगी।