{"_id":"65e30aa07867f461de022bcc","slug":"people-problems-increased-by-turning-the-living-into-dead-2024-03-02","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कर्मचारियों की कारस्तानी: जिंदा को मुर्दा बनाकर बढ़ाई लोगों की परेशानी, बिना सत्यापन के ही लगा रहे गलत रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कर्मचारियों की कारस्तानी: जिंदा को मुर्दा बनाकर बढ़ाई लोगों की परेशानी, बिना सत्यापन के ही लगा रहे गलत रिपोर्ट
Sat, 02 Mar 2024 04:53 PM IST
शिखा पांडेय
तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज
तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 02 Mar 2024 04:53 PM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
कन्नौज जिले में जीते जी मरने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। सरकारी कर्मचारियों की कारस्तानी उन्हें मुर्दा बता रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है कि अलग-अलग मामलों में बिना मौके पर सत्यापन किए ही गलत रिपोर्ट लगाई जा रही है। जब जानकारी सामने आती है तो हड़कंप मचता है। पिछले कई दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसने सरकारी कर्मचारियों की कारगुजारी को उजागर किया है।
पिछले कुछ दिनों में इस तरह के जो भी मामले सामने आए हैं, वह सभी तिर्वा तहसील क्षेत्र से ही जुड़े हैं। इन सभी मामलों में यही सामने आया कि अलग-अलग प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने के बाद आवेदक का सत्यापन किए बिना ही उसे मुर्दा बता दिया गया। हैरानी यह कि बिना जांच के ही रिपोर्ट बना देने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने से भी परहेज किया गया। मामला स्पष्टीकरण तक ही निपट गया। चंदुआहार गांव में जिंदा वोटरों को मुर्दा बताने वाले शिक्षक के खिलाफ जरूर बीएसए ने कार्रवाई की।
इन नजीर से समझिए, कैसे की जाती है जांच
केस एक: किसान को बता दिया मुर्दा --इंदरगढ़ थाना क्षेत्र के कलसान ग्रामसभा के भुजरिया गांव निवासी अमर सिंह खेती करके गुजर-बसर करते हैं। उन्होंने किसान सम्मान निधि के लिए आवेदन किया। आय प्रमाणपत्र बनवाने के लिए 18 दिसंबर को एक जनसेवा केंद्र पर ऑनलाइन आवेदन किया था। लेखपाल ने जांच रिपोर्ट में उन्हें मुर्दा बता दिया। मामला उजागर हुआ तो बताया गया कि इसी नाम के एक युवक का निधन हो चुका है। गलतफहमी में गलत रिपोर्ट बन गई।
विज्ञापन
केस दो: विरासत में बना दिया मुर्दा- -इंदरगढ़ थाना क्षेत्र के कलशान ग्रामसभा के नईवस्ती गांव निवासी रामसेवक (60) भी सरकारी कर्मचारियों की कारिस्तानी का शिकार हो चुके हैं। जनवरी के आखिरी में तहसील से खतौनी निकलवाई तो जानकारी हुई कि जमीन ग्रामसभा के ही विसेनेपुर्वा गांव निवासी स्व रामसेवक के पुत्रों के नाम चढ़ी थी। राजस्वकर्मियों ने बिना पड़ताल के ही उन्हें मुर्दा घोषित कर दिया। मामला सामने आने के बाद उनकी जमीन को फिर से उनके नाम पर खतौनी में दर्ज कराई गई।
केस तीन: चंदुआहार में जिंदा मतदाताओं को बना दिया मुर्दा--तिर्वा विधानसभा के बूथ संख्या 285 चंदुआहार में बड़ी संख्या में जिंदा वोटरों को मुर्दा बनाने का भी मामला सामने आ चुका है। गांव के लज्जाराम, जयपाल, राजेश, रहमत अली, रमेश अली, कंठ श्री, शाकिर अली, शमशेर, मनीष, आबिद अली आदि को मुर्दा बताया गया। मामला उजागर हुआ तो जांच हुई। बाद में ऐसा करने वाले शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई हुई। प्रशासन ने बताया जांच में लापरवाही के दौरान यह गलती हुई थी।
केस चार: 80 साल की बुजुर्ग को मुर्दा बताकर रोका पेंशन-- तिर्वा तहसील के ही रामपुर मझिला निवासी 80 वर्षीय विद्यावती भी इसी कारगुजारी का शिकार हुई हैं। उन्हें वृद्धावस्था पेंशन मिल रही थी। 24 सितंबर 2022 को पेंशन की आखिरी किस्त आई थी। उसके बाद पेंशन बंद हो गई है। जानकारी की तो बताया गया कि सत्यापन के दौरान उनको मुर्दा बताया गया है। इसी आधार पर पेंशन रोक दी गई। अब मामला सामने आया है तो पेंशन बहाल करने का आश्वासन दिया गया है।
विज्ञापन
पिछले कुछ दिनों में इस तरह के जो भी मामले सामने आए हैं, वह सभी तिर्वा तहसील क्षेत्र से ही जुड़े हैं। इन सभी मामलों में यही सामने आया कि अलग-अलग प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने के बाद आवेदक का सत्यापन किए बिना ही उसे मुर्दा बता दिया गया। हैरानी यह कि बिना जांच के ही रिपोर्ट बना देने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने से भी परहेज किया गया। मामला स्पष्टीकरण तक ही निपट गया। चंदुआहार गांव में जिंदा वोटरों को मुर्दा बताने वाले शिक्षक के खिलाफ जरूर बीएसए ने कार्रवाई की।
विज्ञापन
इन नजीर से समझिए, कैसे की जाती है जांच
केस एक: किसान को बता दिया मुर्दा --इंदरगढ़ थाना क्षेत्र के कलसान ग्रामसभा के भुजरिया गांव निवासी अमर सिंह खेती करके गुजर-बसर करते हैं। उन्होंने किसान सम्मान निधि के लिए आवेदन किया। आय प्रमाणपत्र बनवाने के लिए 18 दिसंबर को एक जनसेवा केंद्र पर ऑनलाइन आवेदन किया था। लेखपाल ने जांच रिपोर्ट में उन्हें मुर्दा बता दिया। मामला उजागर हुआ तो बताया गया कि इसी नाम के एक युवक का निधन हो चुका है। गलतफहमी में गलत रिपोर्ट बन गई।
विज्ञापन
केस दो: विरासत में बना दिया मुर्दा- -इंदरगढ़ थाना क्षेत्र के कलशान ग्रामसभा के नईवस्ती गांव निवासी रामसेवक (60) भी सरकारी कर्मचारियों की कारिस्तानी का शिकार हो चुके हैं। जनवरी के आखिरी में तहसील से खतौनी निकलवाई तो जानकारी हुई कि जमीन ग्रामसभा के ही विसेनेपुर्वा गांव निवासी स्व रामसेवक के पुत्रों के नाम चढ़ी थी। राजस्वकर्मियों ने बिना पड़ताल के ही उन्हें मुर्दा घोषित कर दिया। मामला सामने आने के बाद उनकी जमीन को फिर से उनके नाम पर खतौनी में दर्ज कराई गई।
केस तीन: चंदुआहार में जिंदा मतदाताओं को बना दिया मुर्दा--तिर्वा विधानसभा के बूथ संख्या 285 चंदुआहार में बड़ी संख्या में जिंदा वोटरों को मुर्दा बनाने का भी मामला सामने आ चुका है। गांव के लज्जाराम, जयपाल, राजेश, रहमत अली, रमेश अली, कंठ श्री, शाकिर अली, शमशेर, मनीष, आबिद अली आदि को मुर्दा बताया गया। मामला उजागर हुआ तो जांच हुई। बाद में ऐसा करने वाले शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई हुई। प्रशासन ने बताया जांच में लापरवाही के दौरान यह गलती हुई थी।
केस चार: 80 साल की बुजुर्ग को मुर्दा बताकर रोका पेंशन-- तिर्वा तहसील के ही रामपुर मझिला निवासी 80 वर्षीय विद्यावती भी इसी कारगुजारी का शिकार हुई हैं। उन्हें वृद्धावस्था पेंशन मिल रही थी। 24 सितंबर 2022 को पेंशन की आखिरी किस्त आई थी। उसके बाद पेंशन बंद हो गई है। जानकारी की तो बताया गया कि सत्यापन के दौरान उनको मुर्दा बताया गया है। इसी आधार पर पेंशन रोक दी गई। अब मामला सामने आया है तो पेंशन बहाल करने का आश्वासन दिया गया है।
Trending Videos
मौके पर जांच कर रिपोर्ट बनाने का है नियम
एडीएम आशीष सिंह बताते हैं कि किसी भी काम के लिए प्रमाण पत्र या कोई भी दस्तावेज बनवाने के लिए आवेदन आए तो संबंधित कर्मचारी, लेखपाल को मौके पर जाकर सत्यापन करने के बाद ही अपनी रिपोर्ट लगानी चाहिए। मौके पर न जाकर इधर-उधर से मिली जानकारी के आधार पर रिपोर्ट बाने पर ही गलतियां होती हैं। पिछले दिनों में जो भी ऐसे मामले सामने आए हैं, उनमें इसी तरह की लापरवाही रही है।
एसडीएम बोले, कोई सामने आए तो पता चले गलती
तिर्वा तहसील में लगातार गड़बड़ी सामने आ रही है, इसके बावजूद एसडीएम का तर्क है कि उन्हें ऐसे मामलों की जानकारी नहीं है। रामपुर मझिला निवासी 80 वर्षीय विद्यावती को मुर्दा बताने पर उनका कहना है कि कोई सामने आए तभी वह बता पाएंगे कि रिपोर्ट में क्या और क्यों लिखा गया है। ऐसे वह कुछ नहीं बता सकते हैं। हैरानी यह कि उनके रहते हुए ही कई गड़बड़ियां सामने आई हैं, फिर भी रह-रह कर इस तरह का मामला सामने आ रहा है।
एडीएम आशीष सिंह बताते हैं कि किसी भी काम के लिए प्रमाण पत्र या कोई भी दस्तावेज बनवाने के लिए आवेदन आए तो संबंधित कर्मचारी, लेखपाल को मौके पर जाकर सत्यापन करने के बाद ही अपनी रिपोर्ट लगानी चाहिए। मौके पर न जाकर इधर-उधर से मिली जानकारी के आधार पर रिपोर्ट बाने पर ही गलतियां होती हैं। पिछले दिनों में जो भी ऐसे मामले सामने आए हैं, उनमें इसी तरह की लापरवाही रही है।
एसडीएम बोले, कोई सामने आए तो पता चले गलती
तिर्वा तहसील में लगातार गड़बड़ी सामने आ रही है, इसके बावजूद एसडीएम का तर्क है कि उन्हें ऐसे मामलों की जानकारी नहीं है। रामपुर मझिला निवासी 80 वर्षीय विद्यावती को मुर्दा बताने पर उनका कहना है कि कोई सामने आए तभी वह बता पाएंगे कि रिपोर्ट में क्या और क्यों लिखा गया है। ऐसे वह कुछ नहीं बता सकते हैं। हैरानी यह कि उनके रहते हुए ही कई गड़बड़ियां सामने आई हैं, फिर भी रह-रह कर इस तरह का मामला सामने आ रहा है।
बिना मौके पर जाए गलत रिपोर्ट बनाने की शिकायत मिली तो इसे गंभीरता से लेते हुए जांच करवाई जाएगी। ऐसे लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। बिना मौके पर जाए गलत रिपोर्ट बनाना गलत और गंभीर है।- शुभ्रांत शुक्ला, डीएम