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आठ सीएचसी में नहीं बाल रोग विशेषज्ञ

Sun, 23 May 2021 12:58 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 23 May 2021 12:58 AM IST
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Pediatrician not in eight CHCs
कानपुर देहात। देश और दुनियां के विशेषज्ञ कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर को पहले से ही अलर्ट जारी कर चुके हैं। तीसरी लहर में सबसे ज्यादा खतरा बच्चों को बताया जा रहा है। शासन ने बच्चों के इलाज के लिए तैयारी करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन जिले की आठ सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। करीब 20 लाख की आबादी वाले जिले में बच्चों के सिर्फ सात डॉक्टर तैनात हैं।
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जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में सीएचसी व पीएचसी संचालित हैं। सभी दस सीएचसी में एक-एक बाल रोग विशेषज्ञ का पद है। इसमें डेरापुर व रसूलाबाद को छोड़कर किसी भी सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। तीन ब्लॉक पीएचसी हैं। वहां भी बाल रोग चिकित्सक की तैनाती नियमानुसार होनी चाहिए लेकिन यहां भी इनके पद खाली हैं।
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हालांकि जिला अस्पताल में दो पदों के सापेक्ष दोनों डॉक्टर तैनात हैं। वहीं महिला जिला अस्पताल के विशेष नवजात देखभाल इकाई में तीन बाल रोग विशेषज्ञ संविदा पर तैनात है। कोरोना की दूसरी लहर गांवों तक पहुंच गई। इससे बड़ी संख्या में ग्रामीण भी संक्रमण का शिकार हुए।
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संक्रमितों की संख्या गांव में बढ़ने पर लोगों की चिंता बढ़ गई। वहीं विशेषज्ञों की माने तो तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने की संभावना ज्यादा रहेगी। इससे अभिभावकों में चिंता साफ देखने को मिल रही है। वहीं उपचार के लिए बाल रोग विशेषज्ञों की उपलब्धता न होने से मामला और भी चिंताजनक हो गया है।
बाल रोग विशेषज्ञ के पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। जिले में जो डॉक्टर उपलब्ध हैं उनसे काम चलाया जा रहा है। कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए डॉक्टरों को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। हर संभव उपचार मुहैया कराया जाएगा। - डॉ. राजेश कटियार, सीएमओ
इमरजेंसी में बुलाकर हो रहा बच्चों का उपचार
डेरापुर सीएचसी में तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर पवन गुप्ता ने बताया कि आम दिनों में 25 से 30 बच्चे ओपीडी में आते थे। वहीं मौसम बदलने के दौरान सर्दी, बुखार, खांसी से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ जाती थी। इस समय ओपीडी बंद चल रही है। अगर कोई बच्चा इमरजेंसी में आता है तो उसका उपचार किया जा रहा है। इसी तरह से जिला अस्पताल में इमरजेंसी में बच्चों का उपचार किया जा रहा है।

बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाने के लिए जाते कानपुर
जिले के सीएचसी पीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञों के पद खाली हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्र के गरीब तबके के लोग बच्चों को लेकर जिला अस्पताल आते हैं। वहीं सामान्य आर्थिक स्थिति वाले लोग बच्चों के बेहतर उपचार के लिए कानपुर शहर जाते हैं। रूरा, गजनेर, हवासपुर, झींझक, रसूलाबाद, पुखरायां, अकबरपुर, सिकंदरा में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होने से यहां के लोगों के सामने गैर जनपद जाना मजबूरी है।
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