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एक लाख खर्च के बाद भी नहीं सही हुए मरीज के पैर, डॉक्टर पर लगा मशीन पार करने का आरोप

Fri, 17 May 2019 05:23 PM IST
प्रशांत कुमार यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रशांत कुमार Updated Fri, 17 May 2019 05:23 PM IST
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patients in Physical and financial problems due to doctors negligently
अस्पताल में भर्ती मरीज जयदीप - फोटो : अमर उजाला
कानपुर हैलट के वार्ड नंबर पांच में भर्ती महाराजपुर के जयदीप (50) के पैर करीब एक लाख रुपये खर्च होने के बाद भी खराब की खराब हैं, हालत बिगड़ी रही है। अभी भी उनकी ड्रेसिंग के लिए सामान, दवाएं, जांचें आदि बाहर से करवाई जा रही हैं। हालत यह है कि वह केस अस्थि रोग विभाग के हैं और भर्ती सर्जरी में किया गया है। पैसा खर्च कराने के बाद अब परिजनों पर उन्हें अस्पताल से ले जाने का दबाव बनाया जा रहा है। परेशान परिजनों ने गुरुवार को प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी से गुहार लगाई है।
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महाराजपुर के पुरवामीर के रहने वाले जयदीप की दुकान में वाहन घुस जाने से वह 15 अप्रैल को घायल हो गए थे। इस दौरान उनके पैर टूट गए थे। परिजनों ने रात को उन्हें हैलट इमरजेंसी में भर्ती कराया। 17 अप्रैल को अस्थि रोग विभाग के एक डॉक्टर ने उनकी सर्जरी की।
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रोगी के दामाद राम प्रताप और पुत्र अंकित कश्यप ने बताया कि रॉड डालने के लिए 16 हजार रुपये लिए गए। इसका बिल भी नहीं मिला। 3400 रुपये की दवा खरीदी। ड्रेसिंग के लिए 21 हजार रुपये की मशीन मंगाई गई, जो डॉक्टर साहब ले गए। आराम न मिला तो 8 मई को ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया गया। वहां रोगी को लिया नहीं गया क्योंकि रेफर लेटर में खामियां थीं। सेंटर से रोगी को लौटा दिया गया। हैलट लौटे जयदीप को सर्जरी विभाग के वार्ड में भर्ती कर दिया गया।
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उसे अस्थि रोग विभाग रेफर करने के बजाय डिस्चार्ज का दबाव बनाया जा रहा है। राम प्रताप ने बताया कि अब तक एक लाख से अधिक रुपये खर्च हो गए हैं। परिजनों ने प्राचार्य से गुहार लगाई है कि रोगी का इलाज करा दिया जाए।

अभी मैं बाहर हूं। लौटने के बाद जांच कराऊंगी। मरीज को दिक्कत कैसे हुई और ढंग का इलाज क्यों नहीं मिला। इसकी तस्दीक की जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि अगर रॉड पड़े हैं तो उनकी कीमत कितनी है, मरीज को पूरा इलाज मुफ्त मुहैया कराया जाएगा।
                               डॉ. आरती लालचंदानी, प्राचार्य जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज

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