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सोशल मीडिया पर भइया बड़े लड़इया
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 23 Jan 2017 12:18 AM IST
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जिनको टिकट मिल चुका है वो भी सोशल मीडिया पर खूब धनवर्षा कर रहे हैं
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विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे में हुई देरी के कारण क्षेत्र में न जा पाए प्रत्याशी सोशल मीडिया पर तलवारें भांज रहे हैं। फेसबुक, ट्विटर पर पोस्ट होने वाले संदेश युक्त फोटो, वीडियो को स्पांसर (विज्ञापित) कर रहे हैं ताकि उसकी पहुंच ज्यादा से ज्यादा लोगों तक हो सके। जो पोस्ट ज्यादा पठनीय हैं उस पर उतने ही पैसे लगाए जा रहे हैं। प्रत्याशी एक पोस्ट को स्पांसर करने के लिए 1500 से लेकर 50,000 रुपये तक खर्च कर रहे हैं। जिनको टिकट मिल चुका है वो भी सोशल मीडिया पर खूब धनवर्षा कर रहे हैं।
अलग-अलग नामों से बनाए गए पेज और ग्रुप
प्रचार-प्रसार के लिए प्रत्याशियों ने फेसबुक पर अलग-अलग नामों से पेज और ग्रुप बनवा रखे हैं। उदाहरण के तौर पर अगर माइक टेलर नामक शख्स चुनाव लड़ रहा है तो उसका खुद का पेज तो रहता ही है साथ में माइक टेलर सपोर्टर, आई एम विद माइक टेलर, माइक टेलर फैंस जैसे कई अन्य नामों से भी पेज और ग्रुप तैयार किए गए हैं। पेज पर संबंधित प्रत्याशी की फोटो, वीडियो आदि अपडेट किए जाते रहते हैं और उनमें से जो बेहतर पोस्ट होता है उसे स्पांसर कर दिया जाता है ताकि उसकी पहुंच अधिक से अधिक लोगों तक हो सके।
चुनाव आयोग को भी देते हैं गच्चा
चुनाव प्रसार-प्रसार पर होने वाली पाई-पाई खर्च का हिसाब प्रत्याशियों को देना होता है। चुनाव आयोग अमूमन पोस्टर, बैनर, रैली, सभा, वाहन, खान-पान आदि पर ही फोकस रखती है। ऐसे में प्रत्याशी बड़ी आसानी से सोशल मीडिया पर खर्च होने वाली मोटी रकम चुनाव आयोग की नजर से छिपा लेते हैं। सोशल मीडिया की निगरानी के पर्याप्त संसाधन प्रशासन के पास नहीं हैं।
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ऐसे होता है स्पांसर
फेसबुक और ट्विटर पर यूजर को अपने पोस्ट और पेज स्पांसर करने की सुविधा दी गई है। इसके लिए फेसबुक और ट्विटर शुल्क वसूलता है। यूजर इस सुविधा का लाभ उठाते हुए घर बैठे अपनी पहचान दुनिया के कोने-कोने में बना सकता है। अपने हर एक पोस्ट, फोटो, वीडियो आदि की पहुंच ज्यादा बनाने के लिए निर्धारित शुल्क अदा करके स्पांसर कर सकता है। शुल्क पोस्ट की पहुंच के अपेक्षा निर्धारित होती है। मतलब अगर आपको कोई पोस्ट एक हजार लोगों तक पहुंचानी है तो इसके लिए फेसबुक आपसे सौ से डेढ़ सौ रुपये तक वसूलती है।
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अलग-अलग नामों से बनाए गए पेज और ग्रुप
प्रचार-प्रसार के लिए प्रत्याशियों ने फेसबुक पर अलग-अलग नामों से पेज और ग्रुप बनवा रखे हैं। उदाहरण के तौर पर अगर माइक टेलर नामक शख्स चुनाव लड़ रहा है तो उसका खुद का पेज तो रहता ही है साथ में माइक टेलर सपोर्टर, आई एम विद माइक टेलर, माइक टेलर फैंस जैसे कई अन्य नामों से भी पेज और ग्रुप तैयार किए गए हैं। पेज पर संबंधित प्रत्याशी की फोटो, वीडियो आदि अपडेट किए जाते रहते हैं और उनमें से जो बेहतर पोस्ट होता है उसे स्पांसर कर दिया जाता है ताकि उसकी पहुंच अधिक से अधिक लोगों तक हो सके।
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चुनाव आयोग को भी देते हैं गच्चा
चुनाव प्रसार-प्रसार पर होने वाली पाई-पाई खर्च का हिसाब प्रत्याशियों को देना होता है। चुनाव आयोग अमूमन पोस्टर, बैनर, रैली, सभा, वाहन, खान-पान आदि पर ही फोकस रखती है। ऐसे में प्रत्याशी बड़ी आसानी से सोशल मीडिया पर खर्च होने वाली मोटी रकम चुनाव आयोग की नजर से छिपा लेते हैं। सोशल मीडिया की निगरानी के पर्याप्त संसाधन प्रशासन के पास नहीं हैं।
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ऐसे होता है स्पांसर
फेसबुक और ट्विटर पर यूजर को अपने पोस्ट और पेज स्पांसर करने की सुविधा दी गई है। इसके लिए फेसबुक और ट्विटर शुल्क वसूलता है। यूजर इस सुविधा का लाभ उठाते हुए घर बैठे अपनी पहचान दुनिया के कोने-कोने में बना सकता है। अपने हर एक पोस्ट, फोटो, वीडियो आदि की पहुंच ज्यादा बनाने के लिए निर्धारित शुल्क अदा करके स्पांसर कर सकता है। शुल्क पोस्ट की पहुंच के अपेक्षा निर्धारित होती है। मतलब अगर आपको कोई पोस्ट एक हजार लोगों तक पहुंचानी है तो इसके लिए फेसबुक आपसे सौ से डेढ़ सौ रुपये तक वसूलती है।