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अब भगवान भरोसे रेलवे ट्रैक, अफसरों के घर चाकरी कर रहे गैंगमैन

Mon, 28 Nov 2016 01:49 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर Updated Mon, 28 Nov 2016 01:49 AM IST
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not learn to pukhrayan train accident gangmen at officers home
डेमो
पुखरायां के पास हुए रेल हादसे केबाद भी रेलवे महकमा सबक लेने को तैयार नहीं हैं। प्रशासन सतर्क नहीं नजर आ रहा है। लापरवाही बदस्तूर जारी है। 75 किलोमीटर रेल लाइन में 228 गैंगमैनों की तैनाती होनी चाहिए। इसके मुकाबले यहां सिर्फ 189 गैंगमैन हैं। इनमें भी अधिकतर गैंगमैन अफसरों की गुलामी में लगा रखे हैं। वह अधिकारियों के बंगलों में चाकरी कर रहे है और रेलवे ट्रैक भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।
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बांदा रेलवे परिक्षेत्र में बांदा से कबरई और खैराडा से इंगोहटा तक 75 किलोमीटर ट्रैक पर 16 रेलवे स्टेशन हैं। इतने लंबे ट्रैक पर नजर रखने के लिए महज 228 गैंगमैनों के पद स्वीकृत हैं। इनमें 39 पद खाली हैं। इस पर भी 12 गैंगमैन अधिकारियों के बंगलों में लगा रखे गए हैं। ये उनके किचन से लेकर बाजार तक का बेगार करते हैं। रेलवे परिपथ के पीडब्ल्यूआई आरके शिवहरे ने बताया कि छह किलोमीटर रेलवे परिपथ पर 15 गैंगमैन लगाए जाते हैं।
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बांदा परिक्षेत्र में 20 फाटक हैं। इनमें दो-दो के हिसाब से 40 गैंगमैन लगे हैं। 13 चाबीमैन और 12 मेठ हैं। 10 गैंगमैनों को रिजर्व मेें रखा जाता है। उन्होंने बताया कि कर्मियों की कमी के चलते रिजर्व गैंगमैनों से भी काम लिया जा रहा है। पुखरायां हादसे के बाद डीआरएम के आदेश पर परिक्षेत्र के सभी स्टेशनों के बीच ट्रैक पर रात में भी पेट्रोलिंग करने की व्यवस्था शुरू हुई है। ट्रैक की सेफ्टी जांचने के लिए टेस्टिंग मशीन चलाने के साथ नियमित काउंसलिंग की जा रही है।  
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सहायक चालकों की कमी
बांदा परिक्षेत्र में चालक व सहायक चालक और गार्ड के 50 फीसदी पद खाली हैं। बांदा सर्किल में करीब 120 चालक व सहायक चालक तथा 62 गार्ड के पद हैं। तैनाती आधे से भी कम है। सहायक चालक कम होने से दो चालकों को एक साथ ड्यूटी पर भेजा जाता है। इससे दोनों में वर्चस्व को लेकर भी तकरार होती है। क्योंकि दोनों समकक्ष हैं। कोई भी सहायक के रूप में काम नहीं करना चाहता। दूसरी तरफ पद खाली होने से चालकों पर ज्यादा ड्यूटी का दबाव है। लोको इंचार्ज ने बताया कि चालक की ड्यूटी अमूमन आठ घंटे की है। चार घंटे अतिरिक्त मिलाकर 12 घंटे काम करना होता है। 


दो मिनट में चेक होती हैं 10 से 12 बोगियां
यहां रेलवे स्टेशन से करीब 29 ट्रेनों का आवागमन है। कुछ ट्रेनों का स्टापेज मात्र दो मिनट है। इतने कम समय में पूरी ट्रेन की चेकिंग या जांच मात्र औपचारिकता ही बनकर रह जाती है। गड़बड़ी की शंका होने पर जब कभी गेटमैन या गैंगमैन द्वारा सूचना दी जाती है तो ट्रेन रोक कर जांच की जाती है। 

 
 
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