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कानपुर से परिचित हैं नए आईजी प्रशांत कुमार, मोहित अग्रवाल को आईजी तकनीकी सेवाएं बनाया गया
Thu, 28 Oct 2021 01:45 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 28 Oct 2021 01:45 PM IST
सार
आईजी मोहित अग्रवाल का कार्यकाल तकरीबन सवा दो साल का रहा। इस दौरान कुछ ऐसी घटनाएं हुईं, जिनके लिए उनका कार्यकाल यादगार रहेगा। उनके कार्यकाल में तीन बड़ी वारदातें हुई हैं।
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अफसरों ने आईजी मोहित अग्रवाल को दी विदाई
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) से लौटे वर्ष 2000 बैच के आईपीएस अफसर प्रशांत कुमार कानपुर रेंज के आईजी बनाए गए हैं। वह गुरुवार को ज्वाइन कर सकते हैं। वर्तमान आईजी मोहित अग्रवाल को आईजी तकनीकी सेवाएं बनाया गया है।
आईपीएस प्रशांत कुमार मूलरूप से बिहार के रहने वाले हैं। उनकी पढ़ाई झारखंड में हुई। छह वर्षों से उनकी तैनाती एनआईए में थी। प्रशांत कुमार ने बताया कि वह कानपुर में वर्ष 2006 में एसपी विजिलेंस के पद पर रह चुके हैं।
इसके अलावा बांदा, शाहजहांपुर समेत कई जिलों के एसपी व एसएसपी और झांसी रेंज के डीआईजी भी रहे। उन्होंने बताया कि अपराध पर शिकंजा कसने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। माफिया और संगठित अपराध करने वाले अपराधियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
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आईजी मोहित अग्रवाल का कार्यकाल इसलिए रहेगा यादगार
आईजी मोहित अग्रवाल का कार्यकाल तकरीबन सवा दो साल का रहा। इस दौरान कुछ ऐसी घटनाएं हुईं, जिनके लिए उनका कार्यकाल यादगार रहेगा। उनके कार्यकाल में तीन बड़ी वारदातें हुई हैं। पहली 2 जुलाई 2020 को बिकरू गांव में, जहां आठ पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतार दिया गया था।
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आईपीएस प्रशांत कुमार मूलरूप से बिहार के रहने वाले हैं। उनकी पढ़ाई झारखंड में हुई। छह वर्षों से उनकी तैनाती एनआईए में थी। प्रशांत कुमार ने बताया कि वह कानपुर में वर्ष 2006 में एसपी विजिलेंस के पद पर रह चुके हैं।
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इसके अलावा बांदा, शाहजहांपुर समेत कई जिलों के एसपी व एसएसपी और झांसी रेंज के डीआईजी भी रहे। उन्होंने बताया कि अपराध पर शिकंजा कसने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। माफिया और संगठित अपराध करने वाले अपराधियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
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आईजी मोहित अग्रवाल का कार्यकाल इसलिए रहेगा यादगार
आईजी मोहित अग्रवाल का कार्यकाल तकरीबन सवा दो साल का रहा। इस दौरान कुछ ऐसी घटनाएं हुईं, जिनके लिए उनका कार्यकाल यादगार रहेगा। उनके कार्यकाल में तीन बड़ी वारदातें हुई हैं। पहली 2 जुलाई 2020 को बिकरू गांव में, जहां आठ पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतार दिया गया था।
दूसरे ही दिन दो बदमाशों के एनकाउंटर हुए थे, जिसे मोहित अग्रवाल ने लीड किया था। उनके सिर के पास से गोली गुजरी थी। इसके बाद बिकरू कांड की जांच में उनकी भूमिका अहम रही। इसके बाद संजीत अपहरण हत्याकांड और तीसरा बड़ा मामला फर्रुखाबाद में हुआ था।
फर्रुखाबाद में बदमाश ने 30 बच्चों को बंधक बना लिया था। मोहित अग्रवाल ने ऑपरेशन को लीड कर बच्चों को मुक्त कराया था। बदमाश भी मारा गया था। बदमाश की छोटी बच्ची को आईजी ने गोद लिया था। बुधवार शाम को सभी पुलिस अफसरों ने उनको विदाई दी।
फर्रुखाबाद में बदमाश ने 30 बच्चों को बंधक बना लिया था। मोहित अग्रवाल ने ऑपरेशन को लीड कर बच्चों को मुक्त कराया था। बदमाश भी मारा गया था। बदमाश की छोटी बच्ची को आईजी ने गोद लिया था। बुधवार शाम को सभी पुलिस अफसरों ने उनको विदाई दी।