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न पुलिस पहुंची न एंबुलेंस, मर गए होनहार

Sun, 10 Apr 2016 02:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 10 Apr 2016 02:05 AM IST
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Neither police nor ambulance arrive, students died
जानलेवा मोड़ - फोटो : amarujala
सड़क हादसे में उत्तर प्रदेश वस्त्र प्रौद्योगिकी संस्थान के होनहार बीटेक छात्र पल्लव और शुभम की मौत अपने पीछे तमाम सवाल छोड़ गई। घटनास्थल से बमुश्किल पांच सौ मीटर की दूरी पर अस्पताल, ब्लड बैंक के अलावा डीएम आवास, आईजी और कमिश्नर दफ्तर भी हैं। इसके बावजूद समय पर न पुलिस पहुंची और न ही एंबुलेंस। पब्लिक ने भी सिर्फ तमाशबीन की भूमिका निभाई। दोनों को अस्पताल पहुंचाने की जरूरत नहीं समझी। दोनों के शरीर से खून रिसता रहा। आखिर पल्लव ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
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पांच मिनट में घटनास्थल पर एंबुलेंस पहुंचने का दावा धरा रह गया। उधर शुभम किसी तरह से उर्सला पहुंचा लेकिन उसे इलाज ही नहीं मिला। डॉक्टरों ने बला टालने के लिए उसे हैलट रेफर कर दिया। हादसे के बाद लोगों ने 108 नंबर एंबुलेंस को कई बार काॅल किया लेकिन काफी देर तक एंबुलेंस नहीं आई। यह हालात तब हैं जब उर्सला में एक एंबुलेंस हमेशा मौजूद रहती है। शहर के अन्य अस्पतालों में भी एंबुलेंस हमेशा उपलब्ध रहती है। नियम है कि पांच मिनट के अंदर एंबुलेंस पहुंच जानी चाहिए लेकिन अस्पताल के बगल में ही आधे घंटे बाद एंबुलेंस पहुंची।
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लापरवाही ने मौत के मुंह में धकेला
उर्सला में शुभम को डॉक्टरों की लापरवाही ने भी मौत की ओर ढकेल दिया। लगातार खून बहने के बाद भी डॉक्टरों ने उसे तत्काल ब्लड देने    की जगह पट्टी बांधकर दर्द का इंजेक्शन लगाया और हायर सेंटर रेफर कर दिया। यदि उर्सला के डॉक्टरों ने उसी समय शुभम को ब्लड चढ़ा दिया होता तो उसके बचने की गुंजाइश बढ़ गई होती।
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अंधे जानलेवा मोड़ का इलाज कीजिए साहब
वीआईपी रोड पर आईजी आवास के सामने अंधा मोड़ है, जहां गुरुवार को नगर निगम के डंपर और कार की भिड़ंत में बीटेक के दो छात्रों की मौत हो गई थी। इस अंधे मोड़ पर भविष्य में कोई हादसा न हो, इसके लिए प्रशासन ने कोई योजना नहीं सोची। संकेतक तक नहीं लगाया गया।


आईजी आवास के सामने अंधा मोड़ है। इससे कुछ ही दूरी पर कमिश्नर का दफ्तर, डीएम और एडीएम सिटी का आवास समेत कई वीआईपी लोगों के घर हैं। इसी अंधे मोड़ पर करीब तीन महीने पहले डॉ. अभिषेक त्रिवेदी की कार और कारोबारी की बाइक टकरा गई थी। इसमें कारोबारी की मौत हो गई थी। हादसे केबाद जमकर हंगामा हुआ था पर अफसरों की नींद नहीं टूटी।
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