Kanpur: 'सृष्टि नाद ओंकार' का लाभ ले रहीं मुस्लिम महिलाएं, 84% महिलाओं का सामान्य प्रसव, जानें क्या हैं फायदे
Kanpur News: गर्भसंस्कार के प्रोजेक्ट में 15 फीसदी मुस्लिम महिलाएं शामिल हुईं। ये महिलाएं मां की पाठशाला ऑनलाइन कार्यक्रम में भी शिरकत करती हैं। नाद साधना, योग वगैरह भी करती हैं। यह सृष्टि का नाद है, सबको इसका लाभ लेना चाहिए। मां स्वस्थ रहेगी, तो बच्चे भी स्वस्थ और संस्कारवान होते हैं।
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कानपुर में सृष्टि नाद ओंकार की साधना का लाभ मुस्लिम महिलाएं भी ले रही हैं। इस साधना को करने वाली महिलाओं को इसका लाभ मिला है। नाद साधना में शरीक होने वाली महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान होने वाली दिक्कतें बहुत कम हुईं। सामान्य प्रसव हुआ और बच्चे स्वस्थ पैदा हुए।
इस तथ्य का खुलासा जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग के गर्भसंस्कार पर किए शोध में हुआ है। शोध में पता चला है कि गर्भधारण के तीन त्रैमास में होने वाली हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज की समस्या नियंत्रित रही। उनके हार्मोंस का सामंजस्य दुरुस्त रहा। गर्भसंस्कार के प्रोजेक्ट में 15 फीसदी मुस्लिम महिलाएं शामिल हुईं।
स्त्री रोग विभाग की पूर्व अध्यक्ष डॉ. किरन पांडेय और डॉ. सीमा द्विवेदी की अगुवाई में गर्भ संस्कार पर शोध किया गया था। इसमें अखिल भारतीय गायत्री परिवार के आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी उत्तर प्रदेश की प्रांतीय समन्वयक वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संगीता सारस्वत भी जुड़ी थीं। गर्भ संस्कार की कार्यशाला हर महीने हुई।
संतुलित, सात्विक और संस्कारिक आहार
नाद साधना के साथ ही उन्हें संतुलित, सात्विक और संस्कारिक आहार के बारे में बताया गया। यौगिक क्रियाएं कराई गईं। प्रोजेक्ट में शामिल मुस्लिम महिलाओं ने भी इसका पालन किया। डॉ. सारस्वत ने बताया कि ओंकार सृष्टि नाद है। लाभ मिलता तो यह आस्था का हिस्सा हो जाता है। यह निजी मामला होता है।
गर्भसंस्कार के प्रोजेक्ट में 15 फीसदी मुस्लिम महिलाएं शामिल हुईं। ये महिलाएं मां की पाठशाला ऑनलाइन कार्यक्रम में भी शिरकत करती हैं। नाद साधना, योग वगैरह भी करती हैं। यह सृष्टि का नाद है, सबको इसका लाभ लेना चाहिए। मां स्वस्थ रहेगी, तो बच्चे भी स्वस्थ और संस्कारवान होते हैं। इसमें धर्म, वर्ग और जाति कहीं आड़े नहीं आती। -डॉ. संगीता सारस्वत
- शोध वर्ष 2018 से वर्ष 2022 तक चला।
- गर्भ संस्कार में कुल दो हजार महिलाएं शामिल हुईं।
- गर्भ संस्कार में पांच सौ महिलाओं पर शोध किया गया, इनकी नौ महीने मॉनीटरिंग की गई।
- सामान्य तरीके से रहीं पांच सौ गर्भवती महिलाओं की स्थिति का भी अध्ययन किया।
- गर्भ संस्कार वाली 83 फीसदी महिलाओं के सामान्य प्रसव हुआ, जबकि सामान्य तरीके से रहीं 40 फीसदी महिलाओं का सामान्य प्रसव हुआ।
- गर्भसंस्कार वाली महिलाओं के पहले त्रैमास में जी मिचलाने, कमजोरी, गर्भपात में 70 फीसदी कमी आई।
- दूसरे त्रैमास में कब्ज, खून की कमी, हाई ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर की दिक्कत में 60 फीसदी की कमी आई।
- तीसरे त्रैमास में समय से पहले प्रसव, खून की कमी, बीपी की दिक्कत में 50 फीसदी की कमी आई।
सृष्टि नाद से लाभ (डॉ. संगीता सारस्वत)
- ओम के उच्चारण से शरीर में ऑक्सीजन बढ़ती, कार्बन डाई ऑक्साइड कम होती है।
- लैक्टिक एसिड कम बनता है, इससे थकान, कमजोरी नहीं लगती है।
- न्यूरोनल कनेक्शन अच्छे बनते है।
- डोपामीन, एंडोरफिन, सेरोटोनिन, ऑक्सीटोसिन और एनकेफ्लीन हार्मोंस का सामंजस्य बना रहता है।
- गर्भस्थ शिशु का स्वास्थ्य बेहतर रहता है, मस्तिष्क का विकास तेज होता है।