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‘खामोश’ रहा मुस्लिम वोटर, चौंका सकते हैं परिणाम
वैभव शर्मा, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 22 Feb 2017 06:00 PM IST
सार
- या तो अनिर्णय की स्थिति बनी रही या बदल दिया सोच का नजरिया
- अलग-अलग सीट पर इस बार अपनी पसंद से तैयार किया खाका
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विस्तार
यूपी विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण के मतदान के दौरान मुस्लिम वोटर कतार में लग कर भी खामोश रहा। प्रत्याशी और पार्टी दावे चाहें जितने करें, अंतिम वक्त तक मुसलमानों की थाह कोई नहीं ले पाया। उनकी यह खामोशी 11 मार्च को मतगणना के बाद अप्रत्याशित परिणाम ला सकती है।
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पोलिंग बूथों पर नहीं दिखा ध्रुवीकरण
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जिस मुस्लिम वोटर के दम पर चुनावी गणित बनाए और बिगाड़े गए उसने इस बार पत्ते नहीं खोले। रविवार को मतदान के दौरान आलम यह रहा कि उम्रदराज से लेकर कम उम्र के लड़के-लड़कियों ने अपना रुख स्पष्ट नहीं होने दिया।
पोलिंग बूथों पर न तो ध्रुवीकरण दिखा न ही अपीलों-फरमानों का असर। कहना गलत न होगा कि अलग-अलग सीट पर मुस्लिम वोटराें ने इस बार अपने नजरिए से खाका तैयार किया। यह भी माना जा सकता है कि मतदान के लिए अंत तक वह अनिर्णय की स्थिति में बना रहा।
पोलिंग बूथों पर न तो ध्रुवीकरण दिखा न ही अपीलों-फरमानों का असर। कहना गलत न होगा कि अलग-अलग सीट पर मुस्लिम वोटराें ने इस बार अपने नजरिए से खाका तैयार किया। यह भी माना जा सकता है कि मतदान के लिए अंत तक वह अनिर्णय की स्थिति में बना रहा।
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पिछले चुनावों की अपेक्षा कम पड़ा वोट
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इस वर्ग के वोटर आए और खामोशी से मतदान कर चले गए। पिछले चुनावों की अपेक्षा वो समूह में कम आए। किसी ने पार्टी विशेष में निष्ठा जताई तो किसी ने प्रत्याशी में, कोई विकल्प न देख कई सपा-कांग्रेस गठबंधन के पक्ष में दिखे तो कुछ को इस गठबंधन से ही एतराज था। शहर की सीसामऊ, आर्यनगर, गोविंदनगर, कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र में कमोबेश यही हालात दिखे।
कुछ उच्च वर्ग के मुसलमानों ने तो यहां तक कहा कि विकास करने वाला प्रत्याशी हो तो उनके लिए पारंपरिक ढर्रा मायने नहीं रखता। वे लीक से हटकर किसी को भी वोट कर सकते हैं, और करेंगे। लाल इमली चौराहा स्थित जीआईसी, एसएन सेन बालिका विद्यालय, रावतपुर स्थित रामलला मंदिर आदि मुस्लिम बहुल कई अन्य महत्वपूर्ण पोलिंग स्टेशनों का नजारा कुछ ऐसा ही रहा।