चौहान ‘चेते’, योगी राज में नहीं बना ‘योग’
मध्य प्रदेश के पन्ना से लेकर बांदा के चिल्ला तक केन नदी में जगह-जगह बड़े पैमाने पर बालू का अवैध खनन हो रहा है। जिससे नदी की जलधारा बाधित हो रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और हाईकोर्ट के कई आदेश भी इस अपराध को नहीं रोक पाए। यूपी-एमपी दोनों राज्यों में अब भाजपा की सरकारें हैं। पिछले कुछ दिनों से अवैध खनन में और तेजी आ गई है। जगह-जगह केन नदी की जलधारा में लिफ्टर और मशीनों से बालू निकालकर नदी को गहरा करने के साथ ही जलधारा मोड़ रहे हैं। गहराई बढ़ने से जल धारा आगे नहीं बढ़ पा रही।
अवैध खनन पर एमपी सरकार ने सुध ली
चंदौरा खदान से चार पोकलैंड, चांदीपीट से तीन, बीरा से चार पोकलैंड और एक जेसीबी जब्त की है। चार लिफ्टर मशीनों में तीन चंदौरा और एक चांदीपाटी खदान से पकड़ी गई है। खदानों में बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया है। बालू माफियाओं में हड़कंप और खलबली है। एमपी के खनिज अधिकारियों ने रिपोर्ट भी दर्ज कराई है।
चेकिंग और चालान की रस्म अदायगी
लमेहटा, कुल्लूखेड़ा, हटेटी पुरवा-1, खप्टिहा आदि में खनन का काम चालू हो गया है। उधर, एमपी से भी बालू के सैकड़ों ट्रक रोजाना शहर से गुजर रहे हैं। इक्का-दुक्का की चेकिंग और चालान की रस्म अदायगी की जा रही है।
केन को बचाने के लिए पन्ना में धरना शुरू
आंदोलन और धरने की अगुवाई कर रहे बांदा जिला पंचायत के पूर्व सदस्य और मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग युवा संघ प्रदेश उपाध्यक्ष महेंद्र पाल वर्मा के साथ कई समर्थक और स्वयंसेवी धरने में शामिल हुए। उनकी मुख्य मांग अवैध खनन की सीबीआई जांच और दोषी अधिकारियों व माफियाओं के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई किए जाने की है।
आरोप लगाया है कि सत्ताधारी जनप्रतिनिधि भी केन नदी को बर्बाद करने में शामिल हैं। केन से करोड़ों रुपये की बालू निकालकर एक तरफ जहां पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ राजस्व को भी चूना लगाया जा रहा है।