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माफिया के मददगार बने खनन अफसर: तहसील की रिपोर्ट पर नहीं की कार्रवाई, आईजीआरएस पोर्टल पर भी लगा दी झूठी रिपोर्ट

Fri, 22 Oct 2021 01:48 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 22 Oct 2021 01:48 AM IST
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Mining officer became the helper of mining mafia
खनन का खेल - फोटो : अमर उजाला
कानपुर के तेजीपुरवा के राजनारायण के खेत से मिट्टी खोदने के मामले में खनन अधिकारी और कर्मचारियों ने भी खूब खेल किया। नवंबर 2020 में जब इस प्रकरण की शिकायत हुई तो बिधनू क्षेत्र की कानूनगो आस्था पांडेय ने इसकी जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट तत्कालीन तहसीलदार, एसडीएम से होते हुए एडीएम (वित्त) तक पहुंची थी। एडीएम ने इस रिपोर्ट के आधार पर खनन अधिकारी को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया था।
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मगर खनन अधिकारी और कर्मचारी इस रिपोर्ट को दबा गए। तहसीलदार, एसडीएम, एडीएम में से किसी ने भी पलटकर खनन अधिकारी से नहीं पूछा कि क्या कार्रवाई हुई? नतीजा ये हुआ कि खनन माफिया के हौसले बुलंद रहे और पीड़ित दर-दर भटकता रहा। बताते हैं कि ऐसे मामलों में कार्रवाई न करने के एवज में खनन अधिकारी के कार्यालय को हर महीने मोटी रकम पहुंचती है।
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यही वजह रही कि राजनारायण की ओर से आईजीआरएस पोर्टल पर की गई शिकायत पर भी झूठी रिपोर्ट लगाकर मामले को निस्तारित दिखा दिया गया। इसमें एक खनन इंस्पेक्टर की भूमिका संदिग्ध है। हालांकि यह सारा मामला खनन अधिकारी कुंवर पाल सिंह के संज्ञान में रहा है। उन्होंने कहा कि शिकायत मिली थी। मौके पर जांच भी कराई थी, लेकिन खनन करने वालों की पहचान नहीं हो सकी थी। गुरुवार को खनन अधिकारी ने फिर से मौके पर जांच की, मगर कार्रवाई का खाका देर रात तक तैयार नहीं कर सके।

खनन माफिया की सूची तक नहीं बनी 
हैरत की बात देखिए कि खनन अधिकारी के कार्यालय में खनन माफिया की कोई सूची तक नहीं। यानी अधिकारियों और कर्मचारियों ने कभी खनन माफिया चिह्नित ही नहीं किए। जबकि खनन इंस्पेक्टरों ने अलग-अलग व्यक्तियों के डंपर, ट्रैैक्टर और जेसीबी को कई बार पकड़ा है। मगर जुर्माना और रिश्वत के दम पर हर बार छूट जाते हैं। बार बार पकड़े जाने वालों के वाहनों की जब्ती नहीं हुई। 

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इस पर नजर है। देख रहे हैं कि अवैध खनन रोक न पाने में किसकी भूमिका है। इस पर जल्द ही किसी नतीजे पर पहुंचेंगे।
विशाख जी. डीएम 

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