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Kanpur News: आईआईटी में बीमारियों के त्वरित इलाज पर शोध से तैयार होंगे मेडिकल उत्पाद

Fri, 18 Sep 2026 01:56 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 18 Sep 2026 01:56 AM IST
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Medical products will be developed at IIT based on research into rapid disease treatment.
कानपुर। आईआईटी कानपुर में अब लैब में होने वाले लाइफ साइंसेज और मेडिकल टेक्नोलॉजी में बीमारियों के त्वरित इलाज पर शोध करके मेडिकल उत्पाद तैयार किए जाएंगे। संस्थान में वाधवानी इनोवेशन सेंटर फॉर लाइफ साइंसेज एंड मेडिकल टेक्नोलॉजीज की शुरुआत की गई है। सेंटर को अगले पांच वर्षों में पांच मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब 48 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी।
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सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तौर पर यह शोधकर्ताओं को तकनीक के विकास से लेकर उसके परीक्षण, पेटेंट, नियामकीय प्रक्रिया और व्यावसायीकरण तक सहयोग देगा। सेंटर का शुभारंभ रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), नई दिल्ली के महानिदेशक डॉ. उपेंद्र कुमार सिंह की मौजूदगी में हुआ। आईआईटी कानपुर में बायोमेडिकल रिसर्च से जुड़े कई क्षेत्रों में पहले से शोध चल रहा है। नए सेंटर के माध्यम से ऐसे शोधों को अगले चरण तक ले जाने की व्यवस्था मजबूत की जाएगी।
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सेंटर के तहत थेरेप्यूटिक्स, रीजनरेटिव मेडिसिन, ड्रग डिलीवरी, वैक्सीन, मेडिकल डिवाइस और डायग्नोस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में संभावनाशील शोध को सहयोग मिलेगा। न्यूरो डीजेनेरेटिव बीमारियां, मानसिक स्वास्थ्य, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्वास्थ्य सेवाएं भी इसके प्रमुख फोकस क्षेत्रों में शामिल हैं।
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इंजीनियरिंग और मेडिकल रिसर्च को जोड़ने की तैयारी
आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि संस्थान में रीजनरेटिव मेडिसिन, मॉलिक्यूलर मेडिसिन, न्यूरोसाइंस और एआई समेत बायोमेडिकल रिसर्च का मजबूत इकोसिस्टम है। नए सेंटर के माध्यम से संभावनाशील अनुसंधान को तकनीक विकास, उद्यमिता और व्यावसायीकरण से जोड़ने में मदद मिलेगी।बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि सेंटर के माध्यम से शोधकर्ताओं को वैज्ञानिक खोज के साथ उसके वास्तविक उपयोग और जरूरतों पर भी ध्यान देने का अवसर मिलेगा। एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. संतोष मिश्रा ने कहा कि चिकित्सकीय जरूरतों को इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीकों से जोड़कर बीमारियों के त्वरित इलाज पर शोध होगा। बाजार के लिए बायोमेडिकल उत्पाद विकसित करने पर काम किया जाएगा।
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