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मनीष हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट में याचिका स्वीकार, सुनवाई 12 नवंबर को, पत्नी ने की सीबीआई जांच की मांग
Sat, 30 Oct 2021 10:30 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 30 Oct 2021 10:30 AM IST
सार
मनीष गुप्ता हत्याकांड की जांच के लिए कानपुर पुलिस कमिश्नरी में एसआईटी का गठन हुआ। इसके बाद इंस्पेक्टर समेत छह पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। मनीष की पत्नी मीनाक्षी घटना के बाद से ही सीबीआई जांच की मांग कर रही हैं।
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मनीष गुप्ता हत्याकांड
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कानपुर के मनीष गुप्ता हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग को लेकर पत्नी मीनाक्षी गुप्ता की ओर से दाखिल याचिका सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर ली है। इस पर 12 नवंबर को सुनवाई होगी। बर्रा तीन निवासी मनीष गुप्ता की 27 सितंबर को गोरखपुर में पुलिस की पिटाई से मौत हो गई थी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर मामले की जांच के लिए कानपुर पुलिस कमिश्नरी में एसआईटी का गठन हुआ। इसके बाद इंस्पेक्टर समेत छह पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। मनीष की पत्नी मीनाक्षी घटना के बाद से ही सीबीआई जांच की मांग कर रही हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान भी यह मांग रखी थी। मुख्यमंत्री ने इसकी सिफारिश भी कर दी है। लेकिन, अभी तक जांच सीबीआई को नहीं सौंपी गई है। इस बीच, निर्भया केस की अधिवक्ता सीमा समृद्धि ने मीनाक्षी से मुलाकात की। मीनाक्षी से बातचीत के बाद अधिवक्ता के सहयोगी अधिवक्ता आनंद शंकर की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में 21 अक्तूबर को सीबीआई जांच के लिए क्रिमिनल रिट पिटीशन दाखिल की गई।
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इसमें उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, गृह सचिव, सीबीआई और कार्मिक लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय को पार्टी बनाया गया है। केस के लिस्टेड होने की जानकारी शासन से कानपुर पुलिस कमिश्नरी और प्रशासनिक अधिकारियों को भी दी गई है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर मामले की जांच के लिए कानपुर पुलिस कमिश्नरी में एसआईटी का गठन हुआ। इसके बाद इंस्पेक्टर समेत छह पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। मनीष की पत्नी मीनाक्षी घटना के बाद से ही सीबीआई जांच की मांग कर रही हैं।
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उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान भी यह मांग रखी थी। मुख्यमंत्री ने इसकी सिफारिश भी कर दी है। लेकिन, अभी तक जांच सीबीआई को नहीं सौंपी गई है। इस बीच, निर्भया केस की अधिवक्ता सीमा समृद्धि ने मीनाक्षी से मुलाकात की। मीनाक्षी से बातचीत के बाद अधिवक्ता के सहयोगी अधिवक्ता आनंद शंकर की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में 21 अक्तूबर को सीबीआई जांच के लिए क्रिमिनल रिट पिटीशन दाखिल की गई।
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इसमें उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, गृह सचिव, सीबीआई और कार्मिक लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय को पार्टी बनाया गया है। केस के लिस्टेड होने की जानकारी शासन से कानपुर पुलिस कमिश्नरी और प्रशासनिक अधिकारियों को भी दी गई है।