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सात साल के बेटे ने दी थी पिता के खिलाफ गवाही तो पत्नी के हत्यारे पति को मिला आजीवन कारावास
Sat, 24 Aug 2019 11:56 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, जालौन
यूपी डेस्क, अमर उजाला, जालौन
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 24 Aug 2019 11:56 PM IST
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कोर्ट ने सुनाया फैसला
- फोटो : अमर उजाला
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जालौन में आठ साल पूर्व पत्नी को जलाकर मारने के दोषी पति को अपर सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) निशा सिंह की अदालत से आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। अभियुक्त पर पांच हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) हृदेश कुमार पांडेय ने बताया कि डकोर थाना क्षेत्र के फूलपुरा गांव में निवासी रामसेवक की पत्नी भैया द्विज के मौके पर मायके जाना चाहती थी। इससे इन्कार कर रहे रामसेवक ने पत्नी के जिद करने पर 28 अक्तूबर 2011 को मिट्टी का तेल डालकर उसे आग के हवाले कर दिया था।
बुरी तरह जली संगीता ने दम तोड़ने से पहले मजिस्ट्रेट व अपने भाई को पूरा वाकया बताया था। मृतका के भाई मनोज कुमार पुत्र लक्ष्मीनारायण ने बहनोई रामसेवक पुत्र लच्छीराम के खिलाफ बहन को जलाकर मारने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वारदात के बाद गायब हुए रामसेवक ने 10 नवंबर 2011 को पुलिस के समक्ष समर्पण कर दिया था।
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तीन साल बाद जमानत मिलने पर वह जेल से बाहर आ गया था। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान घटना के वक्त घर में मौजूद रहे मृतका के सात साल के बेटे ने पिता के खिलाफ गवाही दी। गवाह व अन्य सुबूतों को आधार बनाकर अदालत ने उसे उम्रकैद और अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) हृदेश कुमार पांडेय ने बताया कि डकोर थाना क्षेत्र के फूलपुरा गांव में निवासी रामसेवक की पत्नी भैया द्विज के मौके पर मायके जाना चाहती थी। इससे इन्कार कर रहे रामसेवक ने पत्नी के जिद करने पर 28 अक्तूबर 2011 को मिट्टी का तेल डालकर उसे आग के हवाले कर दिया था।
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बुरी तरह जली संगीता ने दम तोड़ने से पहले मजिस्ट्रेट व अपने भाई को पूरा वाकया बताया था। मृतका के भाई मनोज कुमार पुत्र लक्ष्मीनारायण ने बहनोई रामसेवक पुत्र लच्छीराम के खिलाफ बहन को जलाकर मारने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वारदात के बाद गायब हुए रामसेवक ने 10 नवंबर 2011 को पुलिस के समक्ष समर्पण कर दिया था।
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तीन साल बाद जमानत मिलने पर वह जेल से बाहर आ गया था। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान घटना के वक्त घर में मौजूद रहे मृतका के सात साल के बेटे ने पिता के खिलाफ गवाही दी। गवाह व अन्य सुबूतों को आधार बनाकर अदालत ने उसे उम्रकैद और अर्थदंड की सजा सुनाई है।