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Kanpur News: सबके घर को महका अपने आंगन में ला रहीं खुशियां
Sat, 06 Sep 2025 12:29 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sat, 06 Sep 2025 12:29 AM IST
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अगरबत्ती की पैकिंग करतीं समूह की महिलाएं। स्रोत स्वयं
कानपुर देहात। कभी घर गृहस्थी के काम-काज में व्यस्त रहने वाली महिलाएं आज आर्थिक रूप से सक्षम हैं। वे खुद कमा रही हैं और विपरीत परिस्थितियों में परिवार को भी आर्थिक सहयोग प्रदान करती हैं। बदलाव की यह बयार मलासा ब्लॉक के इनायतपुर गांव में बह रही है। यहां की दर्जनों महिलाएं अगरबत्ती बनाती हैं। इसकी बनाई अगरबत्ती की खुशबू अब क्षेत्र से बाहर निकल अन्य जिलों में भी फैलने लगी है। इस खुशबू से जितने घर महकेंगे उतनी ही ज्यादा इनके आंगन में खुशी आ रही है।
जय माता जी समूह से जुड़ी महिलाएं अगरबत्ती बनाने के साथ त्योहार के समय मोमबत्ती भी बनाने का काम करती है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन विभाग की जिला मिशन प्रबंधक निखा सचान बताती हैं कि कुछ महिलाओं ने मिलकर जय माता जी नाम से समूह बनाकर अगरबत्ती बनाने का कारोबार शुरू किया। समूह की अध्यक्ष सीमा देवी ने विभाग से संपर्क कर कारोबार को शुरू करने की इच्छा जताई। इसके लिए इन्हें करीब एक लाख 10 हजार रुपये का ऋण सीआईएफ से मिला। शुरूआत में कारोबार में अच्छा मुनाफा नहीं मिला, लेकिन इन महिलाओं ने हार नहीं मानी। इनकी मेहनत और लगन का नतीजा है कि अब इनकी बनाई अगरबत्ती जिले से बाहर आस पास के क्षेत्रों में खुशबू बिखेर रही है।
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सामाजिक बंधनों को तोड़, सपने को किया साकार
समूह से जुड़ी करिश्मा, सुधा, लीलावती, प्रियंका, रमा, विनीता और अन्य सदस्य बताती हैं कि कारोबार की शुरूआत करना आसान नहीं था। पहले 25 हजार रुपये से काम की शुरूआत कर मां नाम से उत्पाद बनाया गया। लेकिन, कारोबार न चल पाने से आसपास के लोगों ने मजाक बनाया। इसकी परवाह न करते हुए अपने सपनों को सभी ने जिंदा रखा। सभी ने आपस में मिलकर करीब डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर कारोबार को बड़े स्तर से शुरू करते हुए वंदे भारत नाम से उत्पाद बनाना शुरू किया। इसको सभी ने सराहा और इसका नतीजा रहा कि अगरबत्ती की मांग चित्रकूट, हमीरपुर, घाटमपुर व कालपी के छोटे बड़े कस्बों से होती है।
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मिला प्रशिक्षण, उपलब्ध हुआ कच्चा माल
शुरूआत अच्छी न होने से थोड़ी निराशा जरूर हुई, लेकिन हार नहीं मानी। पुखरायां में लगे मेले में श्याम इंटरप्राइजेज के पवन प्रताप सिंह से मुलाकात हुई। उत्पाद के विषय में जानकारी लेते हुए उन्होंने महिलाओं को प्रशिक्षण देने के साथ कच्चा माल उपलब्ध कराया। अब अगर बत्ती के साथ अन्य उत्पाद भी बना रहे हैं। इससे समूह की महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं। - सीमा देवी, इनायतपुर, मलासा
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महिला सशक्तिकरण खबर का इनसेट
ब्रांड की राष्ट्रीय स्तर पर दिलानी है पहचान
फोटो-17- करिश्मा, इनायतपुर, मलासा। स्रोत स्वयं
समूह की महिलाओं की मेहनत रंग ला रही है। इसका परिणाम है कि बनाए हुए उत्पाद को आस-पास के जिलों में पहचान मिली है। अगर मौका और सही मार्ग दर्शन मिले तो ब्रांड को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा। समूह की एकजुटता ही हमारी असली ताकत है, सभी मिलकर आत्मनिर्भर बनने की राह में अग्रसर हैं। पहले दूसरों पर निर्भर रहते थे, अब स्वयं कमाई कर परिवार को आर्थिक सहायता पहुंचा रहे हैं। - करिश्मा, इनायतपुर, मलासा
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वर्जन-
जय माता जी समूह की महिलाओं ने विभाग से संपर्क कर स्वयं का कारोबार शुरू करने की इच्छा व्यक्त की। इन्हें सीआईएफ से ऋण उपलब्ध कराया गया। अब यह महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बन रहीं है। साथ ही अन्य महिलाओं को प्रेरणा प्रस्तुत कर रही हैं।
- गंगाराम, उपायुक्त, एनआरएलएम
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जय माता जी समूह से जुड़ी महिलाएं अगरबत्ती बनाने के साथ त्योहार के समय मोमबत्ती भी बनाने का काम करती है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन विभाग की जिला मिशन प्रबंधक निखा सचान बताती हैं कि कुछ महिलाओं ने मिलकर जय माता जी नाम से समूह बनाकर अगरबत्ती बनाने का कारोबार शुरू किया। समूह की अध्यक्ष सीमा देवी ने विभाग से संपर्क कर कारोबार को शुरू करने की इच्छा जताई। इसके लिए इन्हें करीब एक लाख 10 हजार रुपये का ऋण सीआईएफ से मिला। शुरूआत में कारोबार में अच्छा मुनाफा नहीं मिला, लेकिन इन महिलाओं ने हार नहीं मानी। इनकी मेहनत और लगन का नतीजा है कि अब इनकी बनाई अगरबत्ती जिले से बाहर आस पास के क्षेत्रों में खुशबू बिखेर रही है।
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सामाजिक बंधनों को तोड़, सपने को किया साकार
समूह से जुड़ी करिश्मा, सुधा, लीलावती, प्रियंका, रमा, विनीता और अन्य सदस्य बताती हैं कि कारोबार की शुरूआत करना आसान नहीं था। पहले 25 हजार रुपये से काम की शुरूआत कर मां नाम से उत्पाद बनाया गया। लेकिन, कारोबार न चल पाने से आसपास के लोगों ने मजाक बनाया। इसकी परवाह न करते हुए अपने सपनों को सभी ने जिंदा रखा। सभी ने आपस में मिलकर करीब डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर कारोबार को बड़े स्तर से शुरू करते हुए वंदे भारत नाम से उत्पाद बनाना शुरू किया। इसको सभी ने सराहा और इसका नतीजा रहा कि अगरबत्ती की मांग चित्रकूट, हमीरपुर, घाटमपुर व कालपी के छोटे बड़े कस्बों से होती है।
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मिला प्रशिक्षण, उपलब्ध हुआ कच्चा माल
शुरूआत अच्छी न होने से थोड़ी निराशा जरूर हुई, लेकिन हार नहीं मानी। पुखरायां में लगे मेले में श्याम इंटरप्राइजेज के पवन प्रताप सिंह से मुलाकात हुई। उत्पाद के विषय में जानकारी लेते हुए उन्होंने महिलाओं को प्रशिक्षण देने के साथ कच्चा माल उपलब्ध कराया। अब अगर बत्ती के साथ अन्य उत्पाद भी बना रहे हैं। इससे समूह की महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं। - सीमा देवी, इनायतपुर, मलासा
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महिला सशक्तिकरण खबर का इनसेट
ब्रांड की राष्ट्रीय स्तर पर दिलानी है पहचान
फोटो-17- करिश्मा, इनायतपुर, मलासा। स्रोत स्वयं
समूह की महिलाओं की मेहनत रंग ला रही है। इसका परिणाम है कि बनाए हुए उत्पाद को आस-पास के जिलों में पहचान मिली है। अगर मौका और सही मार्ग दर्शन मिले तो ब्रांड को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा। समूह की एकजुटता ही हमारी असली ताकत है, सभी मिलकर आत्मनिर्भर बनने की राह में अग्रसर हैं। पहले दूसरों पर निर्भर रहते थे, अब स्वयं कमाई कर परिवार को आर्थिक सहायता पहुंचा रहे हैं। - करिश्मा, इनायतपुर, मलासा
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वर्जन-
जय माता जी समूह की महिलाओं ने विभाग से संपर्क कर स्वयं का कारोबार शुरू करने की इच्छा व्यक्त की। इन्हें सीआईएफ से ऋण उपलब्ध कराया गया। अब यह महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बन रहीं है। साथ ही अन्य महिलाओं को प्रेरणा प्रस्तुत कर रही हैं।
- गंगाराम, उपायुक्त, एनआरएलएम