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इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग में महाशिवरात्रि, मनाेकामना पूरी करने के लिए एेसे करिए पूजा
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 20 Feb 2017 10:54 PM IST
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महाशिवरात्री
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इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग में महाशिवरात्रि 24 फरवरी को है। महर्षि भारद्वाज वेद वेदांग शिक्षण संस्थानम् के अाचार्य माेहित पांडेय ने बताया कि प्रदोष व्रत एवं महाशिवरात्रि पर द्वादश पूजन का विधान है। महानिशीथ काल का पूजन सर्वोत्तम माना जाता है।
इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6:30 बजे से अगले दिन 7:37 बजे तक रहेगा। रात 9:39 बजे तक त्रयोदशी है। महानिशीथकाल में चतुर्दशी है।
एेसे करें पूजा
स्कंद पुराण के अनुसार इस कालखंड में साधना करना अनेक प्रकार के भयो से मुक्त कराता है। उन्होंने बताया कि प्रदोषकाल में पुन: स्नान करके रुद्राक्ष की माला धारण करे पूर्व या उत्तर मुख करकेशिव भगवान की आराधना करें। तीनों पहर में जल, गंध, पुष्प, बेलपत्र, धतूरे के फूल, गुलाबजल, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से पूजन करें। ऐसा करने से शासन सत्ता, राजनीति मुकदमे आदि में सफलता मिलती है। मानसिक रोगों से मुक्ति मिलती है।
इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6:30 बजे से अगले दिन 7:37 बजे तक रहेगा। रात 9:39 बजे तक त्रयोदशी है। महानिशीथकाल में चतुर्दशी है।
एेसे करें पूजा
स्कंद पुराण के अनुसार इस कालखंड में साधना करना अनेक प्रकार के भयो से मुक्त कराता है। उन्होंने बताया कि प्रदोषकाल में पुन: स्नान करके रुद्राक्ष की माला धारण करे पूर्व या उत्तर मुख करकेशिव भगवान की आराधना करें। तीनों पहर में जल, गंध, पुष्प, बेलपत्र, धतूरे के फूल, गुलाबजल, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से पूजन करें। ऐसा करने से शासन सत्ता, राजनीति मुकदमे आदि में सफलता मिलती है। मानसिक रोगों से मुक्ति मिलती है।
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दोनों दिन पड़ रहे हैं सिद्ध योग पड़ रहे
अाचार्य माेहित पांडेय
इस वर्ष सबसे खास बात यह है कि दोनों दिन सिद्ध योग पड़ रहे हैं। 24 फरवरी को स्वार्थ सिद्ध योग तथा 25 फरवरी को सिद्ध योग पड़ रहा है।
24 फरवरी को चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होने के साथ ही भद्रा भी लग जाएगी लेकिन भद्रा पाताल लोक में होने के कारण महाभिषेक में कोई बाधा नहीं होगी बल्कि यह अत्यंत शुभ रहेगा। महाशिवरात्रि का व्रत कर रात्रि में ओम नम: शिवाय का जाप करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होगी।
अाचार्य माेहित पांडेय बताते हैं कि पौराणिक मान्यता के अनुसार जो व्यक्ति वर्ष भर कोई व्रत उपवास नहीं रखता है और वह मात्र महाशिवरात्रि का व्रत रखता है तो उसे पूरे वर्ष के व्रतों का पुण्य प्राप्त हो जाता है। इससे पूर्व 30 वर्ष पहले महाशिवरात्रि दो दिन मनाई गई थी। शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा अत्यंत फलदायी होती है। शिव रात्रि पर चार प्रहर की पूजा से सभी प्रकार की कामनाएं पूर्ण होती है।
24 फरवरी को चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होने के साथ ही भद्रा भी लग जाएगी लेकिन भद्रा पाताल लोक में होने के कारण महाभिषेक में कोई बाधा नहीं होगी बल्कि यह अत्यंत शुभ रहेगा। महाशिवरात्रि का व्रत कर रात्रि में ओम नम: शिवाय का जाप करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होगी।
अाचार्य माेहित पांडेय बताते हैं कि पौराणिक मान्यता के अनुसार जो व्यक्ति वर्ष भर कोई व्रत उपवास नहीं रखता है और वह मात्र महाशिवरात्रि का व्रत रखता है तो उसे पूरे वर्ष के व्रतों का पुण्य प्राप्त हो जाता है। इससे पूर्व 30 वर्ष पहले महाशिवरात्रि दो दिन मनाई गई थी। शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा अत्यंत फलदायी होती है। शिव रात्रि पर चार प्रहर की पूजा से सभी प्रकार की कामनाएं पूर्ण होती है।