Kanpur: बंद नहीं होंगे मदरसे…बस समय में करना होगा परिवर्तन, 4500 छात्रों का कहीं नहीं हुआ दाखिला, पढ़ें मामला
Kanpur News: शासन की ओर से कराए गए सर्वे में खुलासा हुआ है कि शहर में 85 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त हैं। 40 मदरसों के पढ़ने वाले साढ़े चार हजार छात्रों का किसी भी विद्यालय में दाखिला नहीं हुआ है।
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कानपुर में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों का स्थानांतरण कराने की जिम्मेदारी खंड शिक्षा अधिकारियों को मिली है। सभी खंड शिक्षा अधिकारी मदरसों के आसपास के स्कूलों को चिह्नित कर रिपोर्ट सौंपेंगे। मदरसों के पास के विद्यालयों में ही छात्रों को स्थानांतरित किया जा सकता है। हालांकि मदरसे बंद नहीं होंगे। इन्हें सिर्फ समय परिवर्तित करना होगा। आखिरी निर्णय डीएम की बैठक में लिया जाएगा।
शहर में 85 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त हैं। सर्वे में पता चला है कि 40 मदरसों में पढ़ने वाले करीब साढ़े चार हजार छात्र किसी भी स्कूल में नहीं पढ़ते हैं, जबकि अन्य 45 मदरसों में पढ़ने वाले करीब पांच हजार छात्र दूसरे स्कूलों में भी पढ़ रहे हैं। ऐसे में उन मदरसों या मकतबों को अलग कर दिया गया है। इन साढ़े चार हजार छात्रों के स्थानांतरण की तैयारी शासन के निर्देश के अनुसार की जा रही है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी पवन कुमार सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में खंड शिक्षा अधिकारियों निर्देशित किया गया है कि वे बेसिक विद्यालयों की मैपिंग कराने के साथ ही जानकारी जुटा लें कि कौन से मदरसे के करीब कौन-कौन से स्कूल हैं, जहां पर छात्रों को स्थानांतरित किया जा सके। इससे वे बच्चे भी मुख्य धारा की शिक्षा से जुड़ सकेंगे। जिन मदरसों के छात्र स्थानांतरित होंगे वो बंद नहीं होंगे। अपनी धार्मिक शिक्षा देने का कार्य कर सकते हैं, बस उन्हें समय परिवर्तन करना होगा। वे स्कूल शुरू होने से पहले या बाद में उन्हें पढ़ा सकते हैं।
जो भी शासन से निर्देश मिले हैं, उसके अनुसार कार्रवाई की जा रही है। समिति बन गई है और मदरसों की सूची व छात्रों की संख्या भी बीएसए को उपलब्ध करा दी गई है। इससे खंड शिक्षा अधिकारी सभी विद्यालयों की मैपिंग कर सकें। -पवन कुमार सिंह, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
मदरसों का बंद किया जाना आर्टिकल 30 का उल्लंघन है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एक प्रतिनिधिमंडल ने सीएम योगी से मुलाकात कर वार्ता की है। इस निर्णय पर रोक लगनी चाहिए। इसके लिए हम कोर्ट का सहारा भी लेंगे। -डॉ. रशीद अनवर सिद्दीकी, महासचिव मैनेजर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया उ.प्र.
जिस तरह समाज में एक अच्छे डॉक्टर, इंजीनियर और अधिवक्ता की जरूरत है। उसी तरह एक अच्छे आलिम की भी जरूरत है, जो समाज को सही दिशा दे सके। उलेमा लोगों को दीन की सही तालीम देंगे। इस्लाम को सही अर्थों में पेश कर पाएंगे। अब ऐसे में मदरसों पर कुछ भी थोपा न जाए। हमारे मदरसों में तो अब हिंदी, अंग्रेजी और गणित भी पढ़ाई जाती है, और आगे की पढ़ाई के लिए एनआईओएस बोर्ड से काफी बच्चों को हाईस्कूल और इंटर करा चुके हैं जो आलिम बनने के बाद लोगों ने किया है। -मो. साद हातिम मदरसा शिक्षक (मीडिया प्रभारी- मदरसा जाम-ए-उल-उलूम पटकापुर)