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एनडी तिवारी के निधन पर यूपी के इन जिलों में लोगों ने नम आंखों से ताजा की पुरानी यादें

Fri, 19 Oct 2018 08:18 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Fri, 19 Oct 2018 08:18 AM IST
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life story of nd tiwari
नारायण दत्त तिवारी की पुरानी फोटो - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के 3 बार मुख्यमंत्री रहे एनडी तिवारी का बृहस्पतिवार को दिल्ली के मैक्स अस्पताल में निधन हो गया। इत्र नगरी कन्नौज में  केंद्रीय उद्योग मंत्री रहते नारायण दत्त तिवारी ने फर्रुखाबाद (तब कन्नौज जिला नहीं था) को एफएफडीसी (सुरस एवं सुगंध विकास केंद्र) की सौगात दी थी। उनके मुख्यमंत्री रहते ही जनपद को मेंहदीघाट पुल मिला। जिसने जिले को पड़ोसी जनपद हरदोई से जोड़ा। इसके अलावा उन्नाव के बाद दूरदर्शन का प्रसारण केंद्र भी उन्होंने स्थापित कराया। यहां आटोमेटिक टेलीफोन एक्सचेंज भी उनके कार्यकाल की देन है। 
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फर्रुखाबाद की सांसद शीला दीक्षित के अथक प्रयासों से वर्ष 1984 में कन्नौज को पहला नदी पुल मिला था। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी पहली बार पुल के उद्घाटन करने कन्नौज आए थे। शीला दीक्षित के अनुरोध पर उन्हाेंने 1987 में जिले को सीएचसी की सौगात दी थी। उसी दौरान विनोद दीक्षित (शीला दीक्षित के पति) चिकित्सालय के नाम से इसका निर्माण शहर के मकरंदनगर में किया गया। कन्नौज में देश की इकलौती एफएफडीसी को 1991 में केंद्रीय उद्योग मंत्री रहते हुए उन्होंने हरी झंडी दी थी।
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उन्हीं के प्रयासों के चलते कन्नौज शहर के विकास को नए पंख लगे। आज एफएफडीसी कई प्रयोग कर देश-विदेश के कोने-कोने में शहर की खुशबू बिखेर रहा है। जिले के तिर्वा क्षेत्र में लाख बहोसी पक्षी विहार व तिर्वा कस्बे में दूरदर्शन रिले टावर सेंटर उन्हीं के कार्यकाल की देन है। हसेरन में सीएचसी के अलावा जिले के सभी प्रमुख मार्गों को उन्होंने डामरीकृत कराया। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व युवा कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष विवेक मिश्रा ने बताया कि वास्तव में एनडी तिवारी विकास पुरूष थे। चाहे वो प्रदेश में मुख्यमंत्री हो अथवा केंद्र में मंत्री। उनका कार्यकर्ताओं से जुड़ाव हमेशा बना रहा। उन्होंने विकास के मामलों को हमेशा पहली प्राथमिकता दी। कन्नौज में तमाम विकास की योजनाएं आज भी उनकी याद दिलाती हैं। 
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नारायण दत्त तिवारी की पुरानी फोटो - फोटो : अमर उजाला
फतेहपुरः कांग्रेस नेता एनडी तिवारी के निधन पर जिले में शोक की लहर है। दो राज्यों के मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभालने वाले पूर्व मुख्यमंत्री का जिले से विशेष लगाव रहा है। मलवां क्षेत्र में फैक्ट्रियों की स्थापना उन्हीं की देन है। साथ ही उन्होंने जिले में कैबिनेट की बैठक भी की थी। 

पूर्व विधायक अमरनाथ सिंह उर्फ अनिल ने पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के निधन पर शोक जताया है। उन्होंने बताया कि उनका जन्म तो उत्तराखंड में हुआ था, लेकिन जिले से उनका विशेष लगाव रहा है। केंद्र में कैबिनेट मंत्री रहने के समय से मुख्यमंत्री के कार्यकाल तक हमेशा जिले में आना-जाना बना रहा है। मुख्यमंत्री बनने के बाद जिले में ही कैबिनेट की बैठक कराई थी। तब वह (अमरनाथ) विधायक थे। पूर्व मुख्यमंत्री ने जिले का विकास कराने के लिए पैकेज दिया था। उन्होंने बताया कि 1986 में मलवां के महादेव फर्टिलाइजर्स की आधारशिला रखी थी और वहीं पर लोगों को संबोधित किया था। कैबिनेट में जब इंडस्ट्रियल विभाग में जगह मिली तो उन्होंने मलवां क्षेत्र में फैक्ट्री लगवाने का प्रपोजल तैयार कराया और आज उद्योग नगरी का एक हिस्सा बना हुआ है।  

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एनडी तिवारी के निधन पर शोक की लहर
महोबाः उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में महोबा आगमन के दौरान मौदहा बांध और उर्मिल बांध की सौगात दी थी। जिससे आज महोबा और हमीरपुर जिले में सिंचाई के लिए पानी मिल रहा है। उनका महोबा जिले से विशेष लगाव रहा है। वह तीन बार जिले में आए थे। वर्ष 2002 में आखिरी बार जिले के श्रीनगर कस्बे में कांग्रेस प्रत्याशी मनोज तिवारी के प्रचार में आए थे।

नारायण तिवारी ने पहली बार महोबा आगमन पर मौदहा बांध और उर्मिल बांध की सौगात दी थी। उर्मिल बांध से आज जिले को सिंचाई के साथ-साथ पेयजल आपूर्ति भी मिल रही है। सूखे के संकट में लोगों को उर्मिल बांध ने पानी पिलाया है। जिले में उनके मित्र पूर्व विधायक बाबू लाल तिवारी और कांग्रेस नेता पन्नालाल उपाध्याय रहे हैं। जिनसे वह महोबा में आगमन के दौरान मुलाकात करते थे। पहली बार पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी डाक बंगला मैदान में आए थे। 

वर्ष 2002 में पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी आखिरी बार हेलीकाप्टर से कस्बा श्रीनगर में कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में चुनावी सभा करने आए थे। मनोज तिवारी दादा पूर्व विधायक बाबू लाल तिवारी से उनकी मित्रता थी। जिस कारण वह मनोज तिवारी के प्रचार में आए थे। उनके निधन से कांग्रेसियों को खासा दुख पहुंचा है। उनके मित्रों ने पूर्व मुख्यमंत्री के निधन पर शोक जताते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

चित्रकूटः प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी का धर्मनगरी से बड़ा लगाव था। खासकर मानिकपुर के पाठा क्षेत्र का विकास भी उन्होंने कराया। वह चार बार जिले में आ चुके हैं। सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जब एशिया की सबसे बड़ी पेयजल योजना के लिए विचार किया तो एनडी तिवारी को धर्मनगरी भेजा गया था। कई बार वह इस जिलें में आए और हर बार यही कहते थे कि कांग्रेस पार्टी गरीब व आम जन की सेवक के रूप में काम करती है। इस क्रम को बनाए रखना है। 

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी सबसे पहले जिले में 1976 में आए। जिसमें उन्होंने पाठा क्षेत्र में पेयजल सहित कई योजनाओं की सौगात दी। इसके बाद 1991 में कांग्रेस का प्रचार क रने के लिए आए। जिसमें उन्होंने कई स्थानों पर सभा की। इसके बाद वह 1995 में आए । मानिकपुर विधानसभा की कांग्रेस विधायक स्व. सियादुलारी व कांग्रसी नेता स्व. हीरालाल पांडेय व बछरन गांव के स्व.महेश प्रसाद मिश्र से अच्छी नजदीकियां रही हैं। जब कभी कार्यक्रम होता इनके निवास में पूर्व मुख्यमंत्री जरूर जाते थे। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष पंकज मिश्र ने बताया कि उनके बाबा स्व. महेश प्रसाद बताया करते थे कि पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी चाहते थे कि पाठा समेत जिले की पेयजल और बेरोजगारी की समस्या का निदान हो।

हमीरपुरः एनडी तिवारी के कार्यकाल में जिले का चौमुखी विकास हुआ। उन्हीं के कार्यक्रम में भरुआसुमेरपुर कस्बे में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित हुआ। मौदहा बांध भी उन्हीं की देन है। यमुना और बेतवा नदी पर पुलों का निर्माण भी उन्हीं के कार्यकाल में हुआ। कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश शिवहरे ने बताया मौदहा बांध का निर्माण भी कांग्रेस शासनकाल में एनडी तिवारी ने ही करवाया था। इस बांध से किसानों को खेत सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है।

उन्होंने बताया कि तीन दशक पूर्व राजीव गांधी मुख्यालय आकर रोड शो किया था उस वक्त पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी भी उनके साथ आए थे। मुंडेरा के पास चंद्रावल नदी पर बने सेतु का भी उद्घाटन उन्होंने किया था। वर्ष 1972 में श्रीतिवारी ने मुख्यालय में यमुना नदी के पुल को इंदिरा सेतु का नाम देकर आम जनता के लिए समर्पित किया था। इसी के बाद बेतवा नदी के पुल का उन्होंने उद्घाटन किया।
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