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Kanpur News: प्रेमिका के हत्यारे को उम्रकैद, सीसीटीवी फुटेज में साथ दिखने पर पकड़ा गया था
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कानपुर। प्रेमिका के हत्यारे को अपर जिला जज प्रथम सुदामा प्रसाद ने उम्रकैद और 33 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है जबकि सबूतों के अभाव में साथी को बरी कर दिया है। जुर्माने की आधी धनराशि मृतका के पति को क्षतिपूर्ति के रूप में मिलेगी। साढ़े तीन साल पहले प्रेमी ने उसकी हत्या कर शव नाले में फेंक दिया था। रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज में साथ दिखने पर पकड़ा गया था।
पंजाब के पटियाला निवासी हरजीत सिंह की पत्नी श्रद्धा सिंह 12 नवंबर 2021 को चकरपुर स्थित कन्या महाविद्यालय में यूपी पुलिस की दरोगा भर्ती परीक्षा देने पटियाला से आई थी। परीक्षा के बाद वापस नहींं लौटी। इस पर हरजीत ने श्रद्धा के कन्नौज के छिबरामऊ स्थित मायके में फोन किया लेकिन वहां भी श्रद्धा के न पहुंचने की जानकारी हुई। इसके बाद तलाश शुरू हुई। 15 नवंबर को सचेंडी थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। इसके बाद किसनपुर गांव के नाले में श्रद्धा का शव मिलने पर 17 नवंबर को हरजीत ने सचेंडी थाने में श्रद्धा के प्रेमी बिधनू के साहपुर निवासी सुजीत कुमार गौतम और उसके साथी सूरज के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। मुकदमे में सूरज को तो हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी लेकिन सुजीत अब भी जेल में ही बंद है।
एडीजीसी प्रदीप कुमार साहू ने बताया कि अभियोजन की ओर से मृतका के पति हरजीत, मां लज्जावती व जीजा अखिलेश समेत 11 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने सुजीत को हत्या का दोषी मानकर सजा सुनाई जबकि सबूतों के अभाव में सूरज को बरी कर दिया गया। बताया कि रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज में सुुजीत को श्रद्धा के साथ देखा गया था। रमईपुरवा हाईवे से पुलिस ने सुजीत को गिरफ्तार किया था। सुजीत के घर से श्रद्धा का मोबाइल बरामद हुआ था। मौत के बाद श्रद्धा के कपड़ों व बैग को जला दिया गया था जिसकी पुलिस ने राख बरामद कर ली थी।
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तीन साल तक सुजीत की पत्नी बनकर रही थी श्रद्धा
वारदात से तीन साल पहले तक श्रद्धा सुजीत के साथ पत्नी के रूप में रही थी इसके बाद घरवालों ने श्रद्धा की शादी हरजीत से करवा दी थी। यह खुलासा श्रद्धा के जीजा अखिलेश कुमार के बयान से हुआ था। उसने बताया था कि सुजीत की रिश्तेदारी श्रद्धा के गांव में थी इसलिए उसका आना-जाना था। वर्ष 2016 में वह श्रद्धा को साथ ले गया और पत्नी के रूप में रखने लगा। माता-पिता को शादी मंजूर नहीं थी इसलिए श्रद्धा को वापस ले आए और हरजीत से मंदिर में शादी करवा दी थी।
लावारिस में हो गया था श्रद्धा का दाह संस्कार
बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता डीएस मिश्रा ने बताया कि मुकदमे में मतदाता सूची की प्रति दाखिल की गई थी। इसमें श्रद्धा सिंह के पति के रूप में सुजीत कुमार का नाम दर्ज था। घरवालों ने बिना तलाक के श्रद्धा की शादी हरजीत से कर दी थी। श्रद्धा का शव नाले में मिलने की सूचना महाराजपुर पुलिस को मिली थी। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर शव का दाहसंस्कार भी करा दिया था। बाद में व्हाट्सएप पर भेजे गए फोटो से परिवारवालों ने श्रद्धा की पहचान की थी।
न गहरी दोस्ती, न कोई लाभ तो सूरज क्यों देगा साथ
कोर्ट ने माना कि अभियोजन के पास ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे साबित हो कि सूरज और सुजीत इतने गहरे दोस्त थे कि सुजीत के कहने पर सूरज कुछ भी कर सकता था। कोई ऐसा चश्मदीद गवाह भी नहीं जिसने सुजीत और मृतका के साथ सूरज को देखा हो। कोई भी व्यक्ति हत्या जैसे अपराध में किसी का साथ तभी दे सकता है जब उसका कोई ठोस लाभ हो, उद्देश्यपूर्ति हो या मृतक के प्रति अतिघृणा हो। इस मामले में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला इसलिए सूरज को दोषमुक्त कर दिया गया।
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पंजाब के पटियाला निवासी हरजीत सिंह की पत्नी श्रद्धा सिंह 12 नवंबर 2021 को चकरपुर स्थित कन्या महाविद्यालय में यूपी पुलिस की दरोगा भर्ती परीक्षा देने पटियाला से आई थी। परीक्षा के बाद वापस नहींं लौटी। इस पर हरजीत ने श्रद्धा के कन्नौज के छिबरामऊ स्थित मायके में फोन किया लेकिन वहां भी श्रद्धा के न पहुंचने की जानकारी हुई। इसके बाद तलाश शुरू हुई। 15 नवंबर को सचेंडी थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। इसके बाद किसनपुर गांव के नाले में श्रद्धा का शव मिलने पर 17 नवंबर को हरजीत ने सचेंडी थाने में श्रद्धा के प्रेमी बिधनू के साहपुर निवासी सुजीत कुमार गौतम और उसके साथी सूरज के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। मुकदमे में सूरज को तो हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी लेकिन सुजीत अब भी जेल में ही बंद है।
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एडीजीसी प्रदीप कुमार साहू ने बताया कि अभियोजन की ओर से मृतका के पति हरजीत, मां लज्जावती व जीजा अखिलेश समेत 11 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने सुजीत को हत्या का दोषी मानकर सजा सुनाई जबकि सबूतों के अभाव में सूरज को बरी कर दिया गया। बताया कि रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज में सुुजीत को श्रद्धा के साथ देखा गया था। रमईपुरवा हाईवे से पुलिस ने सुजीत को गिरफ्तार किया था। सुजीत के घर से श्रद्धा का मोबाइल बरामद हुआ था। मौत के बाद श्रद्धा के कपड़ों व बैग को जला दिया गया था जिसकी पुलिस ने राख बरामद कर ली थी।
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तीन साल तक सुजीत की पत्नी बनकर रही थी श्रद्धा
वारदात से तीन साल पहले तक श्रद्धा सुजीत के साथ पत्नी के रूप में रही थी इसके बाद घरवालों ने श्रद्धा की शादी हरजीत से करवा दी थी। यह खुलासा श्रद्धा के जीजा अखिलेश कुमार के बयान से हुआ था। उसने बताया था कि सुजीत की रिश्तेदारी श्रद्धा के गांव में थी इसलिए उसका आना-जाना था। वर्ष 2016 में वह श्रद्धा को साथ ले गया और पत्नी के रूप में रखने लगा। माता-पिता को शादी मंजूर नहीं थी इसलिए श्रद्धा को वापस ले आए और हरजीत से मंदिर में शादी करवा दी थी।
लावारिस में हो गया था श्रद्धा का दाह संस्कार
बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता डीएस मिश्रा ने बताया कि मुकदमे में मतदाता सूची की प्रति दाखिल की गई थी। इसमें श्रद्धा सिंह के पति के रूप में सुजीत कुमार का नाम दर्ज था। घरवालों ने बिना तलाक के श्रद्धा की शादी हरजीत से कर दी थी। श्रद्धा का शव नाले में मिलने की सूचना महाराजपुर पुलिस को मिली थी। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर शव का दाहसंस्कार भी करा दिया था। बाद में व्हाट्सएप पर भेजे गए फोटो से परिवारवालों ने श्रद्धा की पहचान की थी।
न गहरी दोस्ती, न कोई लाभ तो सूरज क्यों देगा साथ
कोर्ट ने माना कि अभियोजन के पास ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे साबित हो कि सूरज और सुजीत इतने गहरे दोस्त थे कि सुजीत के कहने पर सूरज कुछ भी कर सकता था। कोई ऐसा चश्मदीद गवाह भी नहीं जिसने सुजीत और मृतका के साथ सूरज को देखा हो। कोई भी व्यक्ति हत्या जैसे अपराध में किसी का साथ तभी दे सकता है जब उसका कोई ठोस लाभ हो, उद्देश्यपूर्ति हो या मृतक के प्रति अतिघृणा हो। इस मामले में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला इसलिए सूरज को दोषमुक्त कर दिया गया।