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Kanpur News: बहुत थे रंग जीवन के, मगर मरना नहीं आया...
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कानपुर। बहुत थे रंग जीवन के मगर मरना नहीं आया, हमें नाजुक पलों में फैसला करना नहीं आया....कवि सुरेश अलबेला ने अपनी कविता सुनाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मौका था बुधवार को छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में हिंदी विभाग की ओर से आयोजित हिंदी भाषा उत्सव के तहत कवि सम्मेलन का। कवियों ने कविताओं, गीत और विचारों से श्रोताओं को वाहवाही करने पर मजबूर किया।
शुभारंभ कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने किया। हास्य व्यंग्य के साथ प्रमोद पंकज ने बढ़ती महंगाई पर कटाक्ष किया। कवि सुरेश अलबेला ने काल के कपाल का, मैं भक्त महाकाल का गीत...सुनाकर तालियां बटोरीं। व्यंजना शुक्ला ने प्रेम की विश्वविद्यालय हैं... दिन-रात तड़पते हैं कोई काम नहीं करते, मिलने की तमन्ना में आराम नहीं करते सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। व्यंजना शुक्ला ने इक शाम मोहब्बत की तकदीर से मिलती है...., प्रमोद पंकज ने शब्द गढ़ते तो तुलसी के पुजारी बन गए होते, सूर के तट के पुजारी बन गए होते....., प्रीति अग्रवाल ने मैं रानी लक्ष्मीबाई के तेवर पर अभिमान करूंगी, देशभक्त परिपाटी से हूं, देश भक्ति का गान करूंगी, भारत माता की बेटी हूं, भारत का गुणगान करूंगी... जैसे गीत सुनाकर भावविभोर किया। काव्य पाठ का संचालन डॉ. कुमार मनोज ने किया, जबकि डॉ. नीता तिवारी, डॉ. सर्वेश मणि त्रिपाठी, डॉ. प्रकाश मिश्र आदि मौजूद रहे।
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शुभारंभ कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने किया। हास्य व्यंग्य के साथ प्रमोद पंकज ने बढ़ती महंगाई पर कटाक्ष किया। कवि सुरेश अलबेला ने काल के कपाल का, मैं भक्त महाकाल का गीत...सुनाकर तालियां बटोरीं। व्यंजना शुक्ला ने प्रेम की विश्वविद्यालय हैं... दिन-रात तड़पते हैं कोई काम नहीं करते, मिलने की तमन्ना में आराम नहीं करते सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। व्यंजना शुक्ला ने इक शाम मोहब्बत की तकदीर से मिलती है...., प्रमोद पंकज ने शब्द गढ़ते तो तुलसी के पुजारी बन गए होते, सूर के तट के पुजारी बन गए होते....., प्रीति अग्रवाल ने मैं रानी लक्ष्मीबाई के तेवर पर अभिमान करूंगी, देशभक्त परिपाटी से हूं, देश भक्ति का गान करूंगी, भारत माता की बेटी हूं, भारत का गुणगान करूंगी... जैसे गीत सुनाकर भावविभोर किया। काव्य पाठ का संचालन डॉ. कुमार मनोज ने किया, जबकि डॉ. नीता तिवारी, डॉ. सर्वेश मणि त्रिपाठी, डॉ. प्रकाश मिश्र आदि मौजूद रहे।
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