{"_id":"b13cdaa707afd5e31193cd93f886994b","slug":"letter-of-creadit-is-also-not-safe-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘लेटर ऑफ क्रेडिट’ भी जोखिम भरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘लेटर ऑफ क्रेडिट’ भी जोखिम भरा
अमर उजाला, ब्यूरो
Updated Sat, 27 Feb 2016 02:13 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
निर्यातकों का हर कदम जोखिम भरा होता है। इसे कम करने के लिए निर्यात
विज्ञापन
संवर्धन, प्रक्रिया, दस्तावेज, ऋण पत्र, विदेशी मुद्रा आदि का प्रबंधन
बेहतर तरीके से करना होगा। बहुत से निर्यातक विदेशी खरीदारों से मिलने वाले
भुगतान ‘लेटर ऑफ क्रेडिट’ को सुरक्षित मानते हैं, लेकिन यह भी जोखिम भरा
है।
यह बात अंतरराष्ट्रीय व्यापार अकादमी के सलाहकार प्रो. एके उपाध्याय ने शुक्रवार को मर्चेंट चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश के सिविल लाइंस सभागार में कही। श्री उपाध्याय ‘व्यापार वित्त एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भुगतान की प्रक्रिया’ संबंधी सेमिनार में बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित थे।
कार्यक्रम का आयोजन फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन की ओर से उत्तर प्रदेश निर्यात प्रमोशन ब्यूरो और मर्चेट्स चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश के सहयोग से किया गया था। कार्यक्रम में उन्होंने निर्यातकों से कहा कि भुगतान की प्रक्रिया ‘लेटर ऑफ क्रेडिट वर्क’ एक डाक्यूमेंट्री क्रेडिट है।
इसे विदेशी खरीदार के भरोसे पर बिना पढ़े साइन नहीं करना चाहिए। लेटर ऑफ क्रेडिट पर साइन करते समय निर्यातक को किसी एक्सपर्ट से इसके प्रावधानों को बारीकी से समझ लेना चाहिए। इस दौरान उन्होंने निर्यात संबंधी प्रक्रियाओं और प्रलेखन में शामिल की गई प्रक्रिया और विभिन्न प्रकार के दस्तावेजों के बारे में जानकारी दी। फिओ के सीईओ वाईएस गर्ग ने बताया कि निर्यात संबंधी दस्तावेज अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बहुत जरूरी है।
निर्यातक बनने से पहले दस्तावेजी प्रक्रियाओं को जरूर समझ लेना चाहिए। फिओ ऐसे उद्यमियों की हर स्तर पर मदद करता है, जो अपने प्रोडक्ट को विदेशों में बेचना चाहते हैं। इस दौरान मर्चेंट चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. इंद्र मोहन रोहगती, फिओ के समन्वयक आलोक श्रीवास्तव, एके सिन्हा, जफर फि रोज, सलीम अख्तर, तहजिबुल उपस्थित थे।
यह बात अंतरराष्ट्रीय व्यापार अकादमी के सलाहकार प्रो. एके उपाध्याय ने शुक्रवार को मर्चेंट चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश के सिविल लाइंस सभागार में कही। श्री उपाध्याय ‘व्यापार वित्त एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भुगतान की प्रक्रिया’ संबंधी सेमिनार में बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित थे।
कार्यक्रम का आयोजन फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन की ओर से उत्तर प्रदेश निर्यात प्रमोशन ब्यूरो और मर्चेट्स चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश के सहयोग से किया गया था। कार्यक्रम में उन्होंने निर्यातकों से कहा कि भुगतान की प्रक्रिया ‘लेटर ऑफ क्रेडिट वर्क’ एक डाक्यूमेंट्री क्रेडिट है।
इसे विदेशी खरीदार के भरोसे पर बिना पढ़े साइन नहीं करना चाहिए। लेटर ऑफ क्रेडिट पर साइन करते समय निर्यातक को किसी एक्सपर्ट से इसके प्रावधानों को बारीकी से समझ लेना चाहिए। इस दौरान उन्होंने निर्यात संबंधी प्रक्रियाओं और प्रलेखन में शामिल की गई प्रक्रिया और विभिन्न प्रकार के दस्तावेजों के बारे में जानकारी दी। फिओ के सीईओ वाईएस गर्ग ने बताया कि निर्यात संबंधी दस्तावेज अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बहुत जरूरी है।
निर्यातक बनने से पहले दस्तावेजी प्रक्रियाओं को जरूर समझ लेना चाहिए। फिओ ऐसे उद्यमियों की हर स्तर पर मदद करता है, जो अपने प्रोडक्ट को विदेशों में बेचना चाहते हैं। इस दौरान मर्चेंट चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. इंद्र मोहन रोहगती, फिओ के समन्वयक आलोक श्रीवास्तव, एके सिन्हा, जफर फि रोज, सलीम अख्तर, तहजिबुल उपस्थित थे।