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बच्चों के बस्ते का बोझ करें कम

Wed, 20 Apr 2016 01:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 20 Apr 2016 01:02 AM IST
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Reduce the burden of carrying the children
स्कूल में पढ़ रहे बच्चे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। बस्ते के बोझ से दबे जा रहे बच्चों के लिए एक अच्छी खबर है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने एक बार फिर से स्कूलों को बच्चों के बस्ते का बोझ कम करने की हिदायत दी है। स्कूलों को कहा गया है कि वह पाठ्य पुस्तकों की संख्या को स्कूल बैग से कम करें। इस प्रयास के लिए सीबीएसई की ओर से स्कूलों को सुझाव दिए गए हैं। सीबीएसई ने अभिभावकों पर बिना अतिरिक्त वित्तीय भार डाले इन सुझावों के सही क्रियान्वयन की बात कही है।
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बस्ते के बोझ से बच्चों को हो रही परेशानियों को देखते सीबीएसई 2006, 2007 और 2008 में पाठ्यपुस्तकों को कम करने के सुझाव जारी कर चुका है। बोर्ड के सुझावों के बावजूद बच्चों के बस्ते से पुस्तकें कम होने के बजाए बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में बोर्ड ने एक बार फिर से स्कूलों को सुझाव दिए हैं।
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सीबीएसई ने कहा है कि शिक्षक व अभिभावक इस बात को सुनिश्चित करें कि बच्चे टाइम टेबल के मुताबिक ही पुस्तकें लेकर जाएं। यह भी
सुनिश्चित किया जाए कि पाठ्यक्रम सह शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ
सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) पर आधारित हो। बस्ते का बोझ कम करने के लिए गृहकार्य को क्रमबद्ध तरीके से दिया जाए।
बोर्ड ने कहा है कि पुस्तकें नॉन-बायोडिग्रेडेबल शीट से कवर नहीं होनी चाहिए। स्कूल दूसरी कक्षा तक की पुस्तकों को स्कूल में ही रखने का प्रयास करें। एक अन्य उपाय स्कूलों में ही बस्ते को रखने का प्रबंध सुनिश्चित करना हो सकता है। स्कूलों में ही रेफरेंस बुक, स्पोर्ट्स उपकरण, वर्दी रखने के लिए रैक व लॉकर की व्यवस्था की जाए। बस्ते का बोझ कम करने के लिए शिक्षकों व अभिभावकों की काउंसिलिंग की सिफारिश भी सीबीएसई ने की है। रोजाना सह शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन करने के लिए भी कहा है।
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