रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) की वेबसाइट पर जारी प्रोजेक्ट का पंजीकरण कराने के लिए बिल्डरों को अंतिम मौका दिया गया है। बिल्डर 31 जनवरी 2019 तक पंजीयन शुल्क और इसके चार गुना धनराशि के बराबर पेनाल्टी भरकर पंजीकरण करा सकेंगे। इस अवधि के बाद जारी प्रोजेक्ट का पंजीकरण नहीं होगा। इन्हें अवैध मानते हुए रेरा अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। प्रदेशभर में बन रहे सभी आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट का रेरा की वेबसाइट पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
निजी बिल्डर और सरकारी विभागों पर समान रूप से यह नियम लागू है। बीते वर्ष समीक्षा करने पर पता चला था कि बड़ी संख्या में बिल्डरों ने पंजीकरण नहीं कराया है। अधिकांश बिल्डर वेबसाइट पर तिमाही प्रगति रिपोर्ट, फ्लैटों की बिक्री, रजिस्ट्री व भुगतान से संबंधित विवरण भी अपलोड नहीं कर रहे हैं।
इसके बाद रेरा के अध्यक्ष राजीव कुमार ने प्रोजेक्ट के पंजीकरण, निरस्तीकरण, एडिटिंग, अपडेटिंग आदि के संबंध में मानक प्रक्रिया निर्धारित करते हुए इसके अनुपालन के आदेश जारी किए थे। पंजीकरण के बिना जारी योजनाओं को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। कुल प्रोजेक्ट की लागत की 10 फीसदी धनराशि के बराबर पेनाल्टी लगाई जा सकती है।
पेनाल्टी न चुकाने पर आरसी जारी हो सकती है। 500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल और सात फ्लैटों से अधिक वाले अपार्टमेंट पर रेरा के अधिनियम लागू हैं। पेनाल्टी के साथ अपलोड होगी तिमाही रिपोर्ट रेरा की वेबसाइट पर प्रोजेक्ट में बने फ्लैटों की बिक्री, उनकी रजिस्ट्री, निर्माण संबंधी भुगतान की तिमाही प्रगति रिपोर्ट (क्वार्टरली प्रोग्रेस रिपोर्ट) अपलोड करना अनिवार्य है।
31 दिसंबर 2018 तक स्टेटमेंट अपलोड न करने वाले बिल्डरों को अब 10 हजार रुपये शुल्क देना होगा। 31 जनवरी तक एडिटिंग का मौका वेबसाइट पर अपलोड की गई प्रोजेक्ट संबंधी जानकारियों में किसी प्रकार का संशोधन करने की सुविधा दी गई है। 31 दिसंबर तक एडिटिंग शुल्क (पंजीकरण शुल्क की 20 फीसदी धनराशि) और पेनाल्टी (पंजीकरण शुल्क की 20 फीसदी धनराशि) जमा कर चुके बिल्डर 31 जनवरी 2019 तक वेबसाइट पर दी गईं प्रोजेक्ट संबंधी जानकारियों को सुधार सकेंगे।