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टीबी से डकैत की मौत: साधु के वेश में रहता था लालाराम गैंग का छेदा, जानिए क्यों खुद को मरा घोषित कर चुका था?

Tue, 26 Jul 2022 07:59 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Tue, 26 Jul 2022 07:59 PM IST
सार

डकैत लालाराम गैंग के मुख्य सदस्य और 50  हजार के इनामी डकैत छेदा सिंह की उपचार के दौरान मौत हो गई। संत महात्माओं के साथ नाम बदलकर चित्रकूट में रह डकैत को पुलिस ने 24 साल बाद गिरफ्तार किया था। बता दें कि छेदा सिंह पर चंबल की खूंखार महिला डाकू फूलन देवी का अपहरण करने का भी आरोप था।
 

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Lalaram Gang's Dacoit Chheda Singh died due to TB, Was Hiding In Chitrakoot In The Guise Of A Sadhu
फूलनदेवी का अपहरण करने वाला डकैत गिरफ्तार। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इटावा जिले के जिला कारागार में बंद 50 हजार के इनामी डकैत छेदा सिंह की पीजीआई में उपचार के दौरान मौत हो गई। मृतक टीबी से ग्रस्ति था। बता दें कि औरैया जिले के अयाना थाना पुलिस ने भासौन निवासी छेदा सिंह (65) पुत्र अजब सिंह को गिरफ्तार कर 26 जून 2022 को जेल भेजा था। जेल अधीक्षक डॉ. रामधनी ने बताया कि टीबी से पीड़ित होने पर उसे पीजीआई में भर्ती कराया गया था, जहां सोमवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों को मामले की सूचना दे दी गई है। 

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फूलन देवी का किया था अपहरण, 24 साल बाद हुआ था गिरफ्तार
बता दें कि छेदा सिंह पर चंबल के बीहड़ों में आतंक का पर्याय बनने लेकर देश की संसद तक सफर तय करने वाली दस्यू सुंदरी फूलन देवी के अपहरण का भी आरोप था। आरोपी को औरैया पुलिस ने 24 साल बाद गिरफ्तार कर लिया। डकैत साधू के भेष में फरारी काट रहा था। पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए डाकू को गिरफ्तार किया। आरोपी करीब 24 साल से फरार चल रहा था, उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था।

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जानिए कौन है छेदा सिंह
छेदा सिंह, अयाना थाना क्षेत्र के गांव भसौन का रहना वाला था। वह लालाराम गैंग का सक्रिय सदस्य था, जो 24 साल पहले फरार हो गया था। पुलिस को इसकी सक्रियता से तलाश थी। उसके खिलाफ मध्य प्रदेश के अलावा, जालौन, कानपुर देहात और औरैया में दर्जनों फिरौती और लूट की घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज हैं। यही नहीं, आरोपी अस्ताकांड में फूलन देवी के साथ बैहमई कांड का बदला लेने के दौरान लालाराम का साथ देते हुए अस्ता में 12 लोगों को गोली का शिकार बनाने की घटना में शामिल था। 

इसलिए खुद को मृत दिखाया, संत के रूप में छिपा हुआ था
छेदा सिंह नाम बदलकर चित्रकूट में संत महात्माओं के साथ रहता था। जब गैंग समाप्त होने लगे, तो उसने खुद को मृत घोषित दिखाकर अपनी जमीन अपने भाई अजब सिंह के नाम करवा दी थी। इसके बाद क्षेत्र छोड़कर चित्रकूट में दूसरे नाम से आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज बनवाकर सन्यासी के रूप में रह रहा था। 

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जब उसको गिरफ्तार किया गया, तब उसके पास से बृजमोहन दास पुत्र राम बालक दास के नाम का फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर कार्ड और राशन कार्ड भी बरामद हुआ है। गिरफ्तारी के बाद उसने बताया कि वह लालाराम गैंग का सक्रिय सदस्य था। इस गैंग के साथ में मिलकर उसने फिरौती के लिए दर्जनों अपहरण और लूट की घटनाओं को अंजाम दिया। 

इस बीच 1998 में उसने अयाना क्षेत्र के जसवंतपुर गांव के चार लोगों का अपहरण किया था। इसमें से कुछ लोगों को फिरौती के बाद छोड़ा गया। इस दौरान एक अपहर्ता को पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान छुड़वाया था और छेदा सिंह इसी मुकदमे में फरार चल रहा था। बता दें कि छेदा सिंह पर अयाना थाना समेत आसपास के जिलों व मध्यप्रदेश में करीब 24 से अधिक मुकदमें दर्ज हैं। उसको गिरफ्तार करने वाली टीम को 50 हजार की राशि से पुरस्कृत किया गया था।

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