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कोठारी और देसाई ने बैंकों को मिलकर लगाया चूना, 7000 करोड़ रुपये का फ्रॉड
Sat, 21 Mar 2020 10:42 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 21 Mar 2020 10:42 AM IST
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विक्रम कोठारी, उदय देसाई
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर के दो बड़े घोटालेबाज उदय देसाई और विक्रम कोठारी ने आपस में मिलकर बैंकों को कुल 7000 करोड़ रुपये का चूना लगाया। हद की बात ये है कि वर्षों तक बैंक इनके खेल का शिकार होते रहे और जनता की जमा पूंजी इन पर लुटाते रहे।
सीबीआई की अब तक की जांच में यह बात साफ हो गई है कि विक्रम कोठारी और उदय देसाई एक दूसरे के गुमनाम कारोबार में साझेदार थे। उदय देसाई ने ही विक्रम कोठारी को बैंकों के लूटने का खेल सिखाया, जिसे कोठारी ने आगे बढ़ाया।
उदय देसाई के 3595 करोड़ रुपये के फ्रॉड पर बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के बाद सीबीआई ने केस दर्ज कर दो महीने तक इनके खातों की जांच की। पता चला कि उदय देसाई की कंपनी फ्रास्ट इंटरनेशनल और विक्रम कोठारी की कंपनी रोटोमैक के बीच बीते सात-आठ वर्षों में 8000 करोड़ से ज्यादा लेनदेन हुए हैं।
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सीबीआई की अब तक की जांच में यह बात साफ हो गई है कि विक्रम कोठारी और उदय देसाई एक दूसरे के गुमनाम कारोबार में साझेदार थे। उदय देसाई ने ही विक्रम कोठारी को बैंकों के लूटने का खेल सिखाया, जिसे कोठारी ने आगे बढ़ाया।
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उदय देसाई के 3595 करोड़ रुपये के फ्रॉड पर बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के बाद सीबीआई ने केस दर्ज कर दो महीने तक इनके खातों की जांच की। पता चला कि उदय देसाई की कंपनी फ्रास्ट इंटरनेशनल और विक्रम कोठारी की कंपनी रोटोमैक के बीच बीते सात-आठ वर्षों में 8000 करोड़ से ज्यादा लेनदेन हुए हैं।
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दोनों कंपनियों के बीच पैसे का नियमित लेनदेन होता था। माना जा रहा है कि कारोबार दिखाने के लिए दोनों के बीच फर्जी खरीद फरोख्त हुई। इसके धन का आदान प्रदान आपस में ही कर लिया गया। फायदा ये रहा कि न तो माल बना न बिका लेकिन पैसे का खेल चलता रहा।
दोनों उद्योगपतियों ने जिस काम के लिए पैसा लिया, उसमें लगाया ही नहीं। यह पैसा अन्य तरह के धंधों में लगाया गया। नतीजा ये हुआ कि बैंक से ली गई रकम का आपस में ही बंदर बांट हो गया। सीबीआई की जांच में सामने आया कि 7000 करोड़ रुपये की रकम में 3000 करोड़ का लेनदेन आपस में ही हुआ।
बता दें कि उदय देसाई ने 14 बैंकों का 3595 करोड़ रुपये हजम किया है, जबकि विक्रम कोठारी ने 3536 करोड़। विक्रम कोठारी को दो साल पहले भी इसी मामले में गिरफ्तार किया था। अब उदय देसाई के साथ मिलकर बैंकों को चूना लगाने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई की गंभीर धोखाधड़ी जांच टीम ने देसाई और उनके बेटे सुजय को मुंबई से जबकि विक्रम कोठारी को दिल्ली से गिरफ्तार किया।
दोनों उद्योगपतियों ने जिस काम के लिए पैसा लिया, उसमें लगाया ही नहीं। यह पैसा अन्य तरह के धंधों में लगाया गया। नतीजा ये हुआ कि बैंक से ली गई रकम का आपस में ही बंदर बांट हो गया। सीबीआई की जांच में सामने आया कि 7000 करोड़ रुपये की रकम में 3000 करोड़ का लेनदेन आपस में ही हुआ।
बता दें कि उदय देसाई ने 14 बैंकों का 3595 करोड़ रुपये हजम किया है, जबकि विक्रम कोठारी ने 3536 करोड़। विक्रम कोठारी को दो साल पहले भी इसी मामले में गिरफ्तार किया था। अब उदय देसाई के साथ मिलकर बैंकों को चूना लगाने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई की गंभीर धोखाधड़ी जांच टीम ने देसाई और उनके बेटे सुजय को मुंबई से जबकि विक्रम कोठारी को दिल्ली से गिरफ्तार किया।