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देशभक्ति का जज्बा ''किस्सा चांदी की सिल्ली का', जब बोले- जहां से हम भटके थे वहीं वापस पहुंचना होगा

Tue, 14 Aug 2018 10:03 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 14 Aug 2018 10:03 PM IST
सार

- ब्रिटिश हुकुमत ने कन्नौज के सेनानी कालीचरण टंडन ने स्वतंत्रता संग्राम के यज्ञ में सर्वस्व न्यौछावर किया

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Know the story of freedom fighter Kalicharan Tandon
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कालीचरण टंडन

विस्तार

देश के स्वतंत्रता संग्राम में कन्नौज के सेनानी कालीचरण टंडन ने 1930 से 1947 के बीच तीन बार छह माह का और एक बार 15 माह का कठोर कारावास भोगा। इसके अलावा इन पर 500 रुपये जुर्माना भी लगा। जिसकी वसूली के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने उनकी दुकान से चांदी की सिल्ली जब्त करके नीलाम कर जुर्माने की राशि वसूल की थी। 
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सन 2002 में छिबरामऊ में स्वतंत्रता सेनानी जुगुलकिशोर सक्सेना के पुत्र सुप्रभाष सक्सेना के संयोजन में प्रादेशिक स्वतंत्रता सेनानी सम्मेलन हुआ था। इसमें कन्नौज जनपद के विख्यात स्वतंत्रता सेनानी कालीचरण टंडन भी आए थे।
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डेमो पिक
अपनी शतायु के निकट अवस्था में भी उनमें गजब की शक्ति थी। हालांकि फर्रुखाबाद जिला परिषद के अध्यक्ष (तब कन्नौज फर्रुखाबाद जिले में ही था) के रूप में उनका कार्यकाल सदैव याद किया जाएगा। महात्मा गांधी व जवाहरलाल नेहरू को प्रेरणा स्रोत मानने वाले टंडन का कहना था कि जिन्ना की महत्वाकांक्षा के कारण ही देश का विभाजन हुआ। देश की वर्तमान पीढ़ी के प्रति निराशा जाहिर करते हुए कहा था कि आज वह भ्रमित हैं, जनता निराश है। आदर्श तो रहा ही नहीं।

उनका कहना था कि अब तो बिना सामाजिक परिवर्तन के राजनैतिक परिवर्तन संभव नहीं है। देश का आधार ग्राम हैं। विकास का ढांचा ऐसा बने कि कृषि व उद्योग साथ-साथ चले। इसके लिए अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचकर संभावना तलाशना, सिस्टम को बनाने व तराशने के समर्पित प्रयास करने होंगे। जहां से हम भटके थे, वहीं वापस पहुंचना होगा। हम सादा जीवन उच्च विचार का संदेश पूरी दुनिया को दे रहे थे पर खुद ही भटक गए।
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