फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   know about this lady of Kanpur who was honored with Rani Lakshmibai Bravery Award

मिलिए कानपुर की ‘सुष्मिता सेन’ से, पेश की ममता की मिसाल

Tue, 28 Aug 2018 04:36 PM IST
शैली भल्ला, अमर उजाला, कानपुर
शैली भल्ला, अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 28 Aug 2018 04:36 PM IST
विज्ञापन
know about this lady of Kanpur who was honored with Rani Lakshmibai Bravery Award
सब इंस्पेक्टर भुनेश्वरी देवी और बेटी भूमिजा की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

आइए आज आपको मिलाते हैं यूपी के कानपुर शहर की ‘सुष्मिता सेन’ उपनिरीक्षक भुवनेश्वरी सिंह से। सुष्मिता ने जहां रुपहले पर्दे पर चमक बिखेरने के साथ कम उम्र में ही दो बच्चियों को गोद लेकर एक मिसाल कायम की। वहीं, कोहना थाने की रानीघाट चौकी प्रभारी भुवनेश्वरी सिंह ने भी उन्हीं की तरह एक बच्ची की परवरिश का बीड़ा उठाया है। गोद ली बेटी की परवरिश के कारण उन्होंने शादी नहीं की। 

विज्ञापन


 

know about this lady of Kanpur who was honored with Rani Lakshmibai Bravery Award
सब इंस्पेक्टर भुनेश्वरी देवी - फोटो : अमर उजाला
चौकी प्रभारी भुवनेश्वरी को हाल ही में रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। मूलरूप से अलीगढ़ की रहने वाली भुवनेश्वरी कहती हैं कि 2007 में आगरा के महिला थाने में तैनात थीं। एक रिक्शे वाला चार पांच घंटे की जन्मी बच्ची को लेकर थाने पहुंचा। बच्ची बेहद कमजोर थी। उसका इलाज कराया। करीब डेढ़ महीने तक बच्ची को पाला। जब वह ठीक हो गई तो उसे अनाथ आश्रम में दाखिल किया।

घर लौटी तो मन नहीं लगा। कानों में बच्ची की आवाज गूंजती रही। चार-पांच दिन के बाद उसे देखने अनाथालय पहुंची तो वह काफी रो रही थी। मैंने आवाज दी तो एकदम चुप हो गई। मुझे देखकर मुस्कुराई। उसे छोड़कर वापस घर लौट आई लेकिन मन नहीं लगा। दो दिन फिर अनाथालय पहुंच गई। देखा बच्ची के कमर के नीचे इंफेक्शन हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

know about this lady of Kanpur who was honored with Rani Lakshmibai Bravery Award
सब इंस्पेक्टर भुनेश्वरी की बेटी भूमिजा - फोटो : अमर उजाला
भुवनेश्वरी कहतीं है कि तभी मैंने बच्ची को अनाथालय से निकालने का फैसला कर लिया। उसका इलाज कराया। उसे गोद लेने का मन बना लिया था। बाल कल्याण मंत्रालय, दिल्ली से आदेश कराया। बच्ची मिलने में मुझे तीन महीने का समय लग गया।

बच्ची गोद देने से पहले शादी न करने की शर्त थी, जिसे सहर्ष स्वीकार कर लिया। बच्ची इस समय 11 साल की हो गई है। मैंने बच्ची का नाम भूमिजा रखा है। उसके स्कूल के फार्म में माता और पिता दोनों के कॉलम में मेरा ही नाम है। बच्ची को मैंने अपने रिश्ते के बारे में खुलकर बता दिया है और उसे मुझ पर गर्व है।  
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed