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काटजू बोले, 'देश के लिए कुछ नहीं सोचते फूलिश आईआईटीयंस' 

Sat, 22 Oct 2016 12:10 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 22 Oct 2016 12:10 AM IST
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katju says iitians so foolish nothing to think for country
कानपुर आईआईटी न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू - फोटो : रविंदर सिंह भाटिया
सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन रहे जस्टिस मार्कडेंय काटजू ने आईआईटी में आईआईटीयंस के बीच ही उनकी जमकर खिंचाई की। उन्होंने कई बार आईआईटीयंस को फूलिश बोला। कहा, जरूरी नहीं कि आईआईटी में पढ़ने वाला हर कोई तेज हो। मैं इस बात को नहीं मानता। पढ़ाई कहीं भी करो, लेकिन दिमाग होना चाहिए, जो शायद आपमें से कुछ के पास ही हो। खिंचाई के बावजूद जस्टिस काटजू के इस बयान पर खूब तालियां बजी। फिर उन्होंने यह भी कहा कि आप लोग आराम तलब जिंदगी जीना चाहते हो। आपमें से कोई भी देश के लिए कुछ नहीं सोचता। सभी चाहते हो कि अमेरिका, लंदन में नौकरी लग जाए या फिर यहां आईएएस बन जाएं। इसके अलावा आप कुछ नहीं सोचते।
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लाशें आएंगी तो ठिकाने लगेगी अक्ल 
जस्टिस काटजू ने सर्जिकल स्ट्राइक का मजाक उड़ाया। बोले, सरहद पार दो-तीन किलोमीटर अंदर घुसकर 15-20 लोगों को मारकर वाहवाही लूटी जा रही है। ये तो वैसा ही है जैसा सोते हुए किसी के घर में घुसकर एक थप्पड़ मारकर भाग आना। अभी तो खूब भोंपू बज रहा है, लेकिन जब हजार लाशें सामने आएंगी तब जाकर अक्ल ठिकाने आएगी। सेना को ये राजनीतिक लोग बलि का बकरा बना रहे हैं। मीडिया वाले सब दिखाकर अपनी टीआरपी बढ़ाने में लगे हुए हैं। 
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20 साल में यूएस के बराबर आ जाएगा चीन
जस्टिस काटजू ने चीन की तरक्की के कई उदाहरण पेश किए। बोले, चीन अपनी नीतियों के चलते हमसे आगे है। उसने मार्डन इंडस्ट्री सेट कर ली है, जबकि उनके यहां हमसे ज्यादा महंगा लेबर कॉस्ट है। अगर हमारे यहां भी सही और मार्डन इंडस्ट्री लगें तो हम चीन से ज्यादा सस्ता और अच्छा सामान बाजार में ला सकते हैं।
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जनता के दिमाग में गोबर और भूसा भरा 
जस्टिस काटजू ने छात्रों से संवाद के दौरान कई दफा भारतीय जनता को बेवकूफ कहा। यही नहीं उन्होंने यहां तक कह डाला कि यहां की जनता के दिमाग में गोबर और भूसा भरा हुआ है। ये अपने नेतृत्व के लिए ऐसे लोगों का चयन करते हैं, जो इन्हीं को लूटने का काम करते हैं।


खाने को देगा क्या राम मंदिर
जस्टिस काटजू ने एक सवाल का जवाब देते हुए बोला कि चुनाव आ गया है। अब फिर से राम मंदिर, राम मंदिर का राग अलापा जा रहा है। कोई रोजगार, विकास के लिए नहीं सोच रहा है। आखिर क्या राम मंदिर आप लोगों को खाने के लिए कुछ देगा क्या? पढ़ाई के बाद आपको नौकरी चाहिए या फिर राम मंदिर?
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