Kanpur Zoo: 51 साल का हुआ अपना चिड़ियाघर, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने दिया है खास तोहफा, पढ़ें डिटेल
Kanpur News: केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने विशाखापट्टनम से वन्यजीवों को लाने की अनुमति दे दी है। इसके तहत काला हंस, कांकड़, ढ़ोल, हाइना, भेड़िया, स्टार कछुआ, ल्यूटिनो पैराकीट, हरी छिपकली जैसे दुर्लभ जीवों को लाया जाएगा।
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कानपुर चिड़ियाघर की स्थापना के 51 वर्ष पूरे हो गए। प्रबंधन मंगलवार को धूमधाम से वर्षगांठ मना रहा है। वहीं, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) ने विशाखापट्टनम से वन्यजीवों को लाने की अनुमति देकर तोहफा दिया है। मौसम सामान्य होते ही नए वन्यजीवों को यहां लाया जाएगा। इस समय चिड़ियाघर में करीब 1240 वन्यजीव मौजूद हैं। हालांकि उम्र पूरी कर चुके कुछ जीवों को इस वर्ष खोने का मलाल भी प्रबंधन को है।
प्रबंधन की मेहनत ने बनाया पिकनिक स्पॉट
उपनिदेशक डॉ. अनुराग सिंह ने बताया कि चिड़ियाघर की जगह पर पहले अपराधियों का गढ़ हुआ करता था। लोग यहां आने से हिचकते थे। वर्ष 1971 में चिड़ियाघर का निर्माण शुरू हुआ था और चार फरवरी 1974 को यह अस्तित्व में आया। बाद के समय में पसंदीदा पिकनिक स्पॉट के रूप उभरा। यहां न केवल शहरवासी बल्कि विदेशी भी आते हैं। शुरुआत के समय यहां कुछ जानवर थे।
दुर्लभ जीवों को लाया जाएगा
आज 20 से ज्यादा तेंदुआ, पांच बाघ (सफेद बाघ भी), दो गेंडा, दो जेब्रा, चार बब्बर शेर, चार वलाबी (कंगारू जैसा दिखने वाला जीव) और एक हजार से ज्यादा छोटे-बड़े जानवर दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं। सबसे पहला जानवर ऊदबिलाव था। डॉ. अनुराग ने बताया कि केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने विशाखापट्टनम से वन्यजीवों को लाने की अनुमति दे दी है। अभी दिन और रात के तापमान में काफी अंतर है। मौसम सामान्य होने के बाद विशाखापट्टनम से काला हंस, कांकड़, ढ़ोल, हाइना, भेड़िया, स्टार कछुआ, ल्यूटिनो पैराकीट, हरी छिपकली जैसे दुर्लभ जीवों को यहां लाया जाएगा।
पवन को मिलेगा नया साथी
उप निदेशक डॉ. अनुराग सिंह ने बताया कि गेंडा मानू की मौत के बाद गौरी जन्मी थी, लेकिन गौरी को वनतारा भेजा जा चुका है। 52वीं वर्षगांठ से पहले पवन को नया साथी (मादा गेंडा) मिलेगा। चिम्पैंजी को भी यहां लाए जाने की बात चल रही है।
प्रशांत, श्याम और प्रिया को खोने का मलाल
चिड़ियाघर ने कुछ पुराने जानवरों को इस वर्ष खोया है। इनमें सबसे पुराना बाघ प्रशांत,भालू प्रिया, जेब्रा ऐश्वर्या और तेंदुआ श्याम शामिल हैं। प्रबंधन को इन्हें खोने का मलाल है, लेकिन जल्द ही इनके स्थान पर कुछ और वन्यजीवों को लाने का प्रयास जारी है।
चिड़ियाघर के विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। आने वाले वर्षों में भी कई दुर्लभ जीव दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। इसे विश्वस्तरीय पहचान दिलाने के लिए प्रबंधन प्रयासरत है। -कृष्ण कुमार सिंह, निदेशक