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कानपुर होगा डिफेंस कॉरिडोर का प्रमुख केंद्र, सेना, सरकार और आईआईटी की तरफ से दी जाएंगी ये सुविधाएं
Sun, 05 May 2019 10:08 AM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 05 May 2019 10:08 AM IST
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डिफेंस कॉरिडोर में अपने कानपुर की भूमिका बेहद अहम होगी। कानपुर को ही कॉरिडोर का प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा। इसके लिए आईआईटी में भी 100 से अधिक स्टार्टअप कंपनियों को शुरू कराने लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस क्षेत्र में पहले से काम कर रहीं कई बड़ी कंपनियों ने भी इसमें शामिल होने की इच्छा जताई है। इस माह के अंत तक आईआईटी के टेक्नोपार्क में करीब दस कंपनियों की लैब और कार्यालय खोलने को लेकर करार भी हो जाएगा।
शनिवार को यह जानकारी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के सीईओ अवनीश अवस्थी ने दी। वह यहां आईआईटी में डिफेंस कॉरिडोर कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। कॉन्क्लेव में देश भर के कई उद्यमियों, उनके प्रतिनिधियों, डीआरडीओ (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन) और आईआईटी के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। सभी को अवनीश अवस्थी ने डिफेंस कॉरिडोर के तहत कंपनी स्थापित करने के लिए सरकार, सेना और आईआईटी से दी जाने वाली तमाम सुविधाओं की जानकारी दी।
सिडबी इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन सेंटर के इंचार्ज प्रो. अमिताभ बंदोपाध्याय ने बताया कि डिफेंस, हेल्थ, सर्विस किसी भी सेक्टर में काम करने की चाहत रखने वाली स्टार्टअप कंपनियों को उनके यहां से न केवल आर्थिक मदद दी जाएगी बल्कि उन्हें आईआईटी से तकनीकी सहायता, इंफ्रास्ट्रक्चर और लैब की सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी। इस दौरान आईआईटी निदेशक प्रो. अभय करंदीकर, उप निदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल, प्रो. एके घोष, डायरेक्टर डीआईएसबी चंद्रिका कौशिक, साइबर विशेषज्ञ प्रो. संदीप शुक्ला, प्रो. अविनाश अग्रवाल, प्रो. कांतेश बलानी, प्रो. अभिषेक आदि मौजूद रहे।
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शनिवार को यह जानकारी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के सीईओ अवनीश अवस्थी ने दी। वह यहां आईआईटी में डिफेंस कॉरिडोर कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। कॉन्क्लेव में देश भर के कई उद्यमियों, उनके प्रतिनिधियों, डीआरडीओ (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन) और आईआईटी के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। सभी को अवनीश अवस्थी ने डिफेंस कॉरिडोर के तहत कंपनी स्थापित करने के लिए सरकार, सेना और आईआईटी से दी जाने वाली तमाम सुविधाओं की जानकारी दी।
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सिडबी इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन सेंटर के इंचार्ज प्रो. अमिताभ बंदोपाध्याय ने बताया कि डिफेंस, हेल्थ, सर्विस किसी भी सेक्टर में काम करने की चाहत रखने वाली स्टार्टअप कंपनियों को उनके यहां से न केवल आर्थिक मदद दी जाएगी बल्कि उन्हें आईआईटी से तकनीकी सहायता, इंफ्रास्ट्रक्चर और लैब की सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी। इस दौरान आईआईटी निदेशक प्रो. अभय करंदीकर, उप निदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल, प्रो. एके घोष, डायरेक्टर डीआईएसबी चंद्रिका कौशिक, साइबर विशेषज्ञ प्रो. संदीप शुक्ला, प्रो. अविनाश अग्रवाल, प्रो. कांतेश बलानी, प्रो. अभिषेक आदि मौजूद रहे।
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चित्रकूट-झांसी में मिली जमीन, कानपुर में तलाश
अवनीश अवस्थी ने बताया कि डिफेंस कॉरिडोर के लिए झांसी में 600 हेक्टेयर, चित्रकूट में 50 हेक्टेयर भूमि खरीदी जा चुकी है। अब कानपुर में तलाश शुरू हो चुकी है। उन्होंने बताया कि कॉरिडोर में वे सभी कंपनियां शामिल हो सकेंगी जिनके उत्पाद या सर्विस सेना के लिए लाभदायक होगी।
छह मंजिला होगा टेक्नोपार्क
टेक्नोपार्क के प्रभारी प्रो. अविनाश अग्रवाल ने बताया कि कैंपस में छह मंजिला टेक्नोपार्क का निर्माण कार्य सितंबर 2019 से शुरू हो जाएगा। 2021 तक यह बनकर तैयार हो जाएगा। इसमें सबसे निचले हिस्से को बड़ी कंपनियों के लिए आवंटित किया जाएगा जो यहां से उत्पाद भी शुरू कर सकेंगी। बड़ी-बड़ी मशीनें लगाई जा सकेंगी। बीच में हिस्से में इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी कंपनियों को जगह दी जाएगी और सबसे ऊपर कंप्यूटर साइंस से जुड़ी कंपनियां होंगी। सभी कंपनियों को उनकी डिमांड के अनुसार आईआईटी के नोएडा एक्सटेंशन सेंटर और लखनऊ इंडस्ट्रियल हब में भी जगह आवंटित हो सकेगी।
अवनीश अवस्थी ने बताया कि डिफेंस कॉरिडोर के लिए झांसी में 600 हेक्टेयर, चित्रकूट में 50 हेक्टेयर भूमि खरीदी जा चुकी है। अब कानपुर में तलाश शुरू हो चुकी है। उन्होंने बताया कि कॉरिडोर में वे सभी कंपनियां शामिल हो सकेंगी जिनके उत्पाद या सर्विस सेना के लिए लाभदायक होगी।
छह मंजिला होगा टेक्नोपार्क
टेक्नोपार्क के प्रभारी प्रो. अविनाश अग्रवाल ने बताया कि कैंपस में छह मंजिला टेक्नोपार्क का निर्माण कार्य सितंबर 2019 से शुरू हो जाएगा। 2021 तक यह बनकर तैयार हो जाएगा। इसमें सबसे निचले हिस्से को बड़ी कंपनियों के लिए आवंटित किया जाएगा जो यहां से उत्पाद भी शुरू कर सकेंगी। बड़ी-बड़ी मशीनें लगाई जा सकेंगी। बीच में हिस्से में इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी कंपनियों को जगह दी जाएगी और सबसे ऊपर कंप्यूटर साइंस से जुड़ी कंपनियां होंगी। सभी कंपनियों को उनकी डिमांड के अनुसार आईआईटी के नोएडा एक्सटेंशन सेंटर और लखनऊ इंडस्ट्रियल हब में भी जगह आवंटित हो सकेगी।
आईआईटीयंस भी तैयार करेंगे सेना के लिए तकनीक
निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने बताया कि डिफेंस कॉरिडोर के तहत आईआईटी के छात्र-छात्राएं और शिक्षक भी कई तकनीकें सेना के लिए तैयार करेंगे। इनमें अनमेंड एयर व्हीकल, मटेरियल्स, साइबर, कम्युनिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स आधारित तकनीकें होंगी। आईआईटी की स्टार्टअप कंपनियों को संस्थान की तरफ से भी विशेष मदद दी जाएगी। इसके अलावा इन कंपनियों को सिडबी के अधीन हर सुविधाएं मिलेंगी।
डीआरडीओ भी करेगा काम, बनाएगा उपकरण
डीआरडीओ के डीआईएसबी की निदेशक डॉ. चंद्रिका कौशिक ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत डीआरडीओ भी कई उत्पाद तैयार करेगा। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का प्रयोग करते हुए अत्याधुनिक सैन्य उपकरण तैयार करवाए जाएंगे। आईआईटी, आईआईएससी जैसे बड़े संस्थानों के विशेषज्ञों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने बताया कि डिफेंस कॉरिडोर के तहत आईआईटी के छात्र-छात्राएं और शिक्षक भी कई तकनीकें सेना के लिए तैयार करेंगे। इनमें अनमेंड एयर व्हीकल, मटेरियल्स, साइबर, कम्युनिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स आधारित तकनीकें होंगी। आईआईटी की स्टार्टअप कंपनियों को संस्थान की तरफ से भी विशेष मदद दी जाएगी। इसके अलावा इन कंपनियों को सिडबी के अधीन हर सुविधाएं मिलेंगी।
डीआरडीओ भी करेगा काम, बनाएगा उपकरण
डीआरडीओ के डीआईएसबी की निदेशक डॉ. चंद्रिका कौशिक ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत डीआरडीओ भी कई उत्पाद तैयार करेगा। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का प्रयोग करते हुए अत्याधुनिक सैन्य उपकरण तैयार करवाए जाएंगे। आईआईटी, आईआईएससी जैसे बड़े संस्थानों के विशेषज्ञों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।