Kanpur Violence: हयात के तीन गुर्गों की एनएसए की फाइल तैयार, 58 दिन जेल में रहे चार युवक भी रिहा
कानपुर हिंसा मामले में पुलिस ने वारदात के बाद लखनऊ से हयात के साथ तीन अन्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। उन पर एनएसए लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। वहीं, सबूत न मिलने पर चार और युवकों को जेल से रिहा किया गया है।
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नई सड़क बवाल की साजिश में शामिल हयात जफर हाशमी के तीन गुर्गों पर एनएसए लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। पुलिस ने फाइलें तैयार कर ली हैं। जब ये आरोपी जमानत अर्जी लगाएंगे उसी वक्त पुलिस एनएसए की कार्रवाई पूरी कर डीएम को फाइल भेजेगी। हयात पर पहले ही एनएसए लग चुका है। नई सड़क पर तीन जून को जुमे की नमाज के बाद भारी बवाल व हिंसा हुई थी।
पुलिस ने मुख्य आरोपी हयात जफर हाशमी व उसके तीन साथी जावेद अहमद खान, मोहम्मद राहिल व मोहम्मद सूफियान को दूसरे दिन लखनऊ से गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अब तक पूरे मामले में 62 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। हालांकि इसमें छह लोग छूट चुके हैं। पुलिस ने एक सप्ताह पहले हयात पर एनएसए लगाने के साथ ही हाजी वसी, मुख्तार बाबा, अकील खिचड़ी समेत चार पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की थी।
डीसीपी पूर्वी प्रमोद कुमार ने बताया कि 47 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। जांच में सामने आया था कि जावेद, राहिल व सूफियान मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल हैं। इसलिए पुलिस अब इन तीनों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। तीनों पर एनएसए लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। चूंकि जब तक आरोपी जमानत अर्जी नहीं डालते तब तक एनएसए नहीं लग सकता है, इसलिए कार्रवाई होल्ड पर है। अर्जी लगाते ही पुलिस एनएसए की कार्रवाई पूरी करेगी।
संपत्तियों को चिह्नित किया जा रहा है
पुलिस ने हाजी वसी, मुख्तार समेत चार पर गैंगस्टर लगाया था। गैंगस्टर एक्ट के तहत अब इनकी अवैध संपत्तियों पर पुलिस कार्रवाई करेगी। एसआईटी उनकी संपत्तियों का विवरण तैयार करने में जुट गई है। सबसे अधिक हाजी वसी की अवैध संपत्तियां हैं। उसके बाद मुख्तार की। पुलिस इसमें केडीए से भी मदद ले रही है। जब पूरी संपत्तियां चिह्नित कर ली जाएंगी, उसके बाद उनके जब्तीकरण की कार्रवाई शुरू होगी।
सबूत न मिलने पर चार और युवक जेल से रिहा
नई सड़क बवाल में जेल भेजे गए चार और युवकों को गुरुवार को जेल से रिहा कर दिया गया। बुधवार को ही उनको रिहा होना था लेकिन रिहाई आदेश में तकनीकी खराबी की वजह से नहीं हो सके थे। उसमें सुधार के बाद रिहा किया गया। एक दिन पहले ही दो लोग जेल से बाहर आए थे। बिना अपराध के इन सभी ने 58 दिन जेल में काटी। ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर आनंद प्रकाश तिवारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी को पकड़ गए छह लोगों के खिलाफ साक्ष्य नहीं मिले थे।
उसी आधार पर विवेचक ने कोर्ट में इस संबंध में रिपोर्ट दी थी, जिसके बाद सभी को रिहा करने का आदेश जारी हुआ था। बुधवार को शानू लफ्फाज व शारिक अहमद जेल से रिहा हो गए थे, जबकि आदेश में खामी की वजह से अन्य चार सरताज, सरफराज, मोहम्मद आकिब व मोहम्मद नासिर नहीं छूट पाए थे। जेल अधीक्षक बीपी पांडेय ने बताया कि आदेश में सुधार के बाद गुरुवार शाम करीब चार बजे चारों को जेल से रिहा किया गया।
सिपाही ने फोन कर बुलाया और जेल भेज दिया
छोटे मियां का हाता निवासी सरफराज और सरताज चचेरे भाई हैं। जेल से रिहा होने के बाद वह बोले कि घटना के दिन दोनों कारखाने से निकलकर घर चले गए थे। छह जून को एक सिपाही ने फोन कर बेकनगंज थाने बुलाया था। बातचीत करने के बाद गिरफ्तारी कर जेल भेज दिया था। वहीं जेल से छूटे मोहम्मद नासिर हाथ जोड़कर बोले कि मुझे कुछ नहीं कहना है।
दवा लेने गया था, जेल पहुंच गया
पेंचबाग रेडीमेड बाजार इलाके के रहने वाले मोहम्मद आकिब ने बताया कि तीन जून को वह अपनी मां की दवा लेने के लिए घर से निकला था। आकिब के मुताबिक जब वह दवा लेकर लौट रहा था तो बवाल शुरू हो गया था। इस दौरान वह खुद के बचाव के लिए गलियों में छिप गया था। बाद में पुलिस उसको वहां से उठा ले गई थी। दूसरे दिन उसको जेल भेज दिया था। दवा भी वह मां तक नहीं पहुंचा सका था।